KDMC Election 2026: महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों के नतीजे आते ही राज्य की राजनीति में नई हलचल देखने को मिल रही है। खासकर ठाकरे परिवार से जुड़ी राजनीति में अब मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। चुनाव प्रचार के दौरान एकजुट दिखाई देने वाले ठाकरे बंधुओं के बीच चुनाव परिणामों के बाद दूरी बढ़ती नजर आ रही है। कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) का घटनाक्रम इस बदलते समीकरण का ताजा उदाहरण बन गया है।
KDMC में साथ लड़े थे ठाकरे बंधु
कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका चुनाव में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने मिलकर चुनाव लड़ा था। इस गठबंधन को ठाकरे परिवार की एकजुटता के रूप में देखा जा रहा था। माना जा रहा था कि चुनाव के बाद भी दोनों दल एक-दूसरे के साथ खड़े रहेंगे और नगर निगम में साझा भूमिका निभाएंगे।
नतीजों के बाद बदली तस्वीर
चुनाव परिणाम सामने आते ही यह एकता ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी। नतीजों के तुरंत बाद राज ठाकरे की पार्टी MNS ने बड़ा फैसला लेते हुए एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को समर्थन देने की घोषणा कर दी। इस कदम को उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि गठबंधन के बावजूद MNS ने अलग राह चुन ली।
कल्याण-डोंबिवली में सीटों का पूरा गणित
कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में कुल 31 वार्ड हैं, जिनमें 122 पार्षद चुने गए हैं। चुनाव नतीजों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी को 50 सीटें मिलीं, जबकि शिवसेना शिंदे गुट ने 53 सीटों पर जीत दर्ज की। शिवसेना (यूबीटी) को 11, MNS को 5, कांग्रेस को 2 और एनसीपी शरद पवार गुट को 1 सीट हासिल हुई है। यहां बहुमत के लिए 62 सीटों की जरूरत होती है।
बहुमत के बावजूद MNS का समर्थन अहम क्यों
बीजेपी और शिवसेना शिंदे गुट के पास पहले से ही बहुमत से ज्यादा सीटें मौजूद हैं। इसके बावजूद MNS का शिंदे गुट को समर्थन देना राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह फैसला न सिर्फ ठाकरे बंधुओं के रिश्तों में आई दरार को उजागर करता है, बल्कि भविष्य की राजनीति के संकेत भी देता है।
उद्धव ठाकरे के लिए बढ़ी चुनौती
राज ठाकरे के इस कदम से उद्धव ठाकरे की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। जिस गठबंधन को एक मजबूत विपक्ष के तौर पर देखा जा रहा था, वह चुनाव के तुरंत बाद बिखरता दिखाई दिया। इससे शिवसेना (यूबीटी) की स्थिति KDMC में और कमजोर हो गई है।
महाराष्ट्र की राजनीति पर दूरगामी असर
KDMC में हुआ यह घटनाक्रम आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति को नई दिशा दे सकता है। ठाकरे बंधुओं के बीच बढ़ती दूरी और MNS का शिंदे गुट के करीब जाना, राज्य में राजनीतिक समीकरणों को और जटिल बना सकता है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले नगर निकायों और विधानसभा चुनावों में ये दल किस रणनीति के साथ उतरते हैं।










