Kaushambi toll plaza accident: उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में शुक्रवार सुबह एक हृदय विदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। कोखराज-हंडिया बाईपास स्थित सिरोही टोल प्लाजा पर एलपीजी (LPG) से लदे एक टैंकर में भीषण आग लग गई। आग के कारण टैंकर अनियंत्रित होकर टोल प्लाजा के ढांचे से जा टकराया, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई और पांच टोलकर्मी गंभीर रूप से झुलस गए।
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हादसे का मंजर और घटनाक्रम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना आज सुबह करीब 6:30 बजे की है। एलपीजी से भरा यह टैंकर कानपुर की ओर से वाराणसी की तरफ जा रहा था। सिरोही टोल प्लाजा के पास पहुंचते ही टैंकर से गैस का रिसाव (Leakage) शुरू हो गया। देखते ही देखते रिसाव ने आग का विकराल रूप ले लिया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि टैंकर चालक का नियंत्रण वाहन पर से हट गया और वह सीधा टोल प्लाजा के बूथ से जा टकराया।
टक्कर इतनी जोरदार थी कि टोल गेट का चैंबर आग की चपेट में आ गया। आसमान में धुएं का काला गुबार छा गया, जिसे देखकर आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। इस भयावह स्थिति के बीच, टोल प्लाजा पर ड्यूटी पर तैनात पांच कर्मचारी बुरी तरह आग की चपेट में आकर झुलस गए। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद अन्य 10 कर्मचारियों ने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए वहां से भागकर अपनी जान बचाई।
घायलों की स्थिति और राहत कार्य
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और दमकल विभाग की टीमें तुरंत सक्रिय हो गईं। फायरफाइटरों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। झुलसे हुए पांचों कर्मचारियों—हीरामन, आलोक, कृष्ण पाल, अतुल और राजू—को आनन-फानन में स्थानीय जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां उनका इलाज चल रहा है। चिकित्सा सूत्रों के अनुसार, सभी घायलों की हालत गंभीर है और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत रखा गया है।
प्रशासन की जांच और सुरक्षा पर सवाल
पुलिस ने घटनास्थल को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि टैंकर में तकनीकी खराबी किस कारण से आई और क्या सुरक्षा मानकों का उल्लंघन किया गया था। इस हादसे ने टोल प्लाजाओं पर मौजूद सुरक्षा व्यवस्था और खतरनाक रसायनों के परिवहन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल, प्रशासन का पूरा ध्यान घायलों के उपचार और क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करने पर है। हाईवे पर यातायात को भी कुछ समय के लिए बाधित किया गया ताकि बचाव कार्य निर्बाध रूप से चल सके। यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि राजमार्गों पर खतरनाक गैसों और रसायनों का परिवहन कितना जोखिम भरा हो सकता है और इसके लिए कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना कितना अनिवार्य है।
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