Kashmir Protests: खामेनेई की मौत से कश्मीर में उबाल, श्रीनगर से बडगाम तक प्रदर्शन; पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद कश्मीर घाटी में गुस्से की लहर है। श्रीनगर के लाल चौक और बडगाम में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की शांति की अपील और पुलिस की नई एडवाइजरी के बीच, क्या घाटी में स्थिति काबू में रहेगी?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 1, 2026

Kashmir Protests: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की एक सैन्य हमले में हुई अचानक मौत की खबर ने पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में भी हलचल तेज कर दी है। जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई, कश्मीर घाटी के विभिन्न जिलों, विशेषकर श्रीनगर और बारामूला में तनाव फैल गया। लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए और अमेरिका व इज़रायल के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करने लगे। संवेदनशील स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया है।

श्रीनगर और बारामूला की सड़कों पर उतरा जनसैलाब

खामेनेई की मौत की खबर फैलते ही श्रीनगर के पुराने शहर और बारामूला के कई इलाकों में सुबह से ही विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में काले झंडे और खामेनेई की तस्वीरें लेकर अमेरिका और इज़रायल विरोधी नारे लगाए। भीड़ की बढ़ती संख्या को देखते हुए श्रीनगर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात को डायवर्ट करना पड़ा ताकि आम नागरिकों को असुविधा न हो। प्रदर्शनों के कारण कई जगहों पर बाजार बंद रहे और लोगों में इस घटना को लेकर गहरा शोक और आक्रोश देखा गया।

बारामूला पुलिस की सख्त एडवाइजरी: मीडिया और सोशल मीडिया पर नजर

हालात की गंभीरता को भांपते हुए बारामूला पुलिस ने एक विस्तृत आधिकारिक एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने सभी मीडिया घरानों, स्वतंत्र पत्रकारों और सोशल मीडिया प्रभावितों (Influencers) को निर्देश दिया है कि वे इस संवेदनशील मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय अत्यधिक जिम्मेदारी बरतें। पुलिस का कहना है कि किसी भी अपुष्ट जानकारी या उत्तेजक वीडियो को साझा करने से घाटी में सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि किसी भी खबर को चलाने से पहले उसके आधिकारिक स्रोतों की पुष्टि अनिवार्य है।

अफवाह फैलाने वालों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई

प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं या अफवाहें फैलाने वाले तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस की साइबर सेल लगातार सक्रिय है और संदिग्ध पोस्ट्स की निगरानी कर रही है। एडवाइजरी में कहा गया है कि गलत जानकारी से समाज में पैनिक और अस्थिरता पैदा होती है, जो कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है। जो भी व्यक्ति शांति भंग करने की कोशिश करेगा या झूठी खबरें प्रसारित करेगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।

शांति बनाए रखने के लिए भारी सुरक्षा बलों की तैनाती

घाटी में किसी भी अप्रत्याशित हिंसा को रोकने के लिए प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों की टुकड़ियों को संवेदनशील इलाकों में तैनात कर दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में प्रदर्शन शांतिपूर्ण हैं, लेकिन वे किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते। शहर के प्रवेश और निकास द्वारों पर नाकाबंदी की गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर ड्रोन के जरिए भी नजर रखी जा रही है। अधिकारियों ने स्थानीय धार्मिक और सामाजिक नेताओं से भी संवाद किया है ताकि युवाओं को शांति बनाए रखने के लिए प्रेरित किया जा सके।

नागरिकों से अपील: संयम बरतें और केवल भरोसेमंद स्रोतों पर भरोसा करें

स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने आम नागरिकों से बार-बार अपील की है कि वे किसी के बहकावे में न आएं। लोगों से अनुरोध किया गया है कि वे संयम बरतें और शहर में भाईचारा बनाए रखने में पुलिस का सहयोग करें। अधिकारियों ने जोर देकर कहा है कि नागरिकों की सहयोगात्मक भूमिका ही इस कठिन समय में कानून-व्यवस्था को सुचारू रखने में सबसे महत्वपूर्ण साबित होगी। वर्तमान में पूरी कश्मीर घाटी में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और स्थिति की पल-पल की निगरानी की जा रही है।

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