Karur Stampede: करूर भगदड़ मामले में सीएम विजय के दौरे पर रोक लगाने से SC का इनकार, FIR में नाम न होने का दिया हवाला

सुप्रीम कोर्ट ने करूर भगदड़ मामले में विपक्षी दल डीएमके (DMK) को बड़ा झटका देते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (थलापति विजय) के करूर दौरे और पीड़ितों को मुआवजा बांटने पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है।

Karur Stampede

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 7, 2026

Karur Stampede: तमिलनाडु की सियासत और कानूनी गलियारे से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने करूर भगदड़ मामले में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके (TVK) प्रमुख सी. जोसेफ विजय (थलापति विजय) को बहुत बड़ी राहत दी है। इसके साथ ही देश की शीर्ष अदालत ने मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके (DMK) की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे सख्त हिदायत और फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट को राजनीतिक लड़ाई का मंच या अखाड़ा न बनाया जाए।

दरअसल, डीएमके ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर करूर हादसे को लेकर सत्ताधारी दल के मंत्रियों की बयानबाजी पर रोक लगाने की मांग की थी। इतना ही नहीं, विपक्ष ने मुख्यमंत्री विजय के पीड़ित परिवारों से मिलने और राहत राशि बांटने के लिए करूर जाने पर भी पाबंदी लगाने की गुहार लगाई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने सिरे से ठुकरा दिया।

पंजाब के बठिंडा में पुलिसकर्मी किडनैप, 2 लाख की फिरौती मांगने का आरोप, जांच शुरू

‘हम किसी मुख्यमंत्री की गतिविधियां तय नहीं करेंगे’— सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख

जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की अवकाशकालीन पीठ (Vacation Bench) ने इस मामले की गंभीरता से सुनवाई की। जब डीएमके के वकीलों ने मुख्यमंत्री के दौरे को रोकने की दलील दी, तो बेंच ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अदालत किसी राज्य के संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री की राजनीतिक या सामाजिक गतिविधियों को तय या नियंत्रित नहीं करेगी।

इसके साथ ही, जजों की पीठ ने रिकॉर्ड को खंगालते हुए यह बेहद महत्वपूर्ण बात भी साफ कर दी कि करूर भगदड़ मामले में दर्ज की गई मुख्य प्राथमिकी (FIR) में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय का नाम बतौर आरोपी कहीं भी दर्ज नहीं है।

पीड़ितों को ₹10 लाख का मुआवजा और नौकरी देने करूर जाएंगे सीएम विजय

इस पूरे विवाद की मुख्य वजह मुख्यमंत्री विजय का आगामी करूर दौरा है। करूर में हुए भीषण हादसे में 41 बेकसूर लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। मुख्यमंत्री विजय इस हादसे के शिकार हुए पीड़ित परिवारों से खुद मुलाकात करने और उन्हें सांत्वना देने के लिए करूर जाने वाले हैं। सरकार की तरफ से प्रत्येक मृतक के आश्रितों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक मुआवजा राशि और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की गई है, जिसे सौंपने के लिए सीएम खुद वहां पहुंच रहे हैं। डीएमके इसी दौरे और मुआवजे को राजनीति से प्रेरित बताकर इसका पुरजोर विरोध कर रही थी।

डीएमके का आरोप

डीएमके की तरफ से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने दलील दी कि 27 सितंबर 2025 को टीवीके (TVK) की रैली के दौरान हुई इस भगदड़ की गंभीरता को देखते हुए खुद सुप्रीम कोर्ट ने इसकी जांच देश की शीर्ष एजेंसी सीबीआई (CBI) को सौंपी थी। इतना ही नहीं, निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए शीर्ष अदालत ने अपने पूर्व जज जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय निगरानी समिति का भी गठन किया था। डीएमके का आरोप है कि अब राज्य की सत्ता में आने के बाद थलापति विजय की पार्टी और उनके कैबिनेट मंत्री इस हादसे की जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं और मीडिया में लगातार अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं।

कोर्ट की दो टूक

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के जज डीएमके के वकील की इन दलीलों से रत्ती भर भी सहमत नजर नहीं आए। जस्टिस विश्वनाथन ने वरिष्ठ वकील को टोकते हुए सीधे शब्दों में पूछा, “आखिर आप हमसे क्या उम्मीद कर रहे हैं? क्या हम आपके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के बोलने के मौलिक अधिकार पर रोक लगा दें? कोर्ट को अपनी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का मंच मत बनाइए। अगर उनके नेता आपके खिलाफ बयान दे रहे हैं, तो लोकतंत्र में आपके पास भी उसके जवाब में बयान देने की पूरी आजादी है। यह विशुद्ध रूप से एक राजनीतिक लड़ाई है और इसे कोर्ट के बाहर ही लड़ा जाना चाहिए।”

बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, जंगल के 10 KM के भीतर आरा मिलों पर प्रतिबंध कायम