Kartavya Path Violence Case: दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा को लेकर कर्तव्य पथ थाना पुलिस की एफआईआर में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। संसद और रेल भवन के आसपास हुई झड़प के मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1) यानी हत्या के प्रयास सहित कुल 13 गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया, सुरक्षाकर्मियों पर पथराव और चप्पलें फेंकी, मारपीट की तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। वहीं पुलिस का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम में 129 पुलिसकर्मी और 60 से अधिक प्रदर्शनकारी घायल हुए।
इंस्पेक्टर की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई एफआईआर
कर्तव्य पथ थाने में यह एफआईआर वहां तैनात एक इंस्पेक्टर की लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। शिकायत में 20 जुलाई की सुबह हुई घटनाओं का क्रमवार विवरण दर्ज किया गया है। एफआईआर के अनुसार, इंस्पेक्टर की ड्यूटी सुबह 5 बजे से सी-हेक्सागन, जोन-11 स्थित पिंक बूथ पर लगी थी। इसी दौरान वायरलेस संदेश के जरिए सूचना मिली कि रेल भवन राउंडअबाउट के पास बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र हो गए हैं। सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा, जहां हजारों लोग प्रदर्शन कर रहे थे और स्थिति लगातार तनावपूर्ण होती जा रही थी।
धारा 163 लागू होने की घोषणा के बावजूद नहीं मानी भीड़
एफआईआर के मुताबिक, पुलिस अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के माध्यम से प्रदर्शनकारियों को बताया कि क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है और किसी भी प्रकार के प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। पुलिस ने भीड़ से शांतिपूर्वक वहां से हटने की अपील भी की, लेकिन प्रदर्शनकारी लगातार नारेबाजी करते रहे। पुलिस का आरोप है कि इसी दौरान कुछ लोगों ने भीड़ को बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर आगे बढ़ने के लिए उकसाया। इसके बाद कई प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटाने का प्रयास किया और पुलिसकर्मियों को चारों ओर से घेर लिया।
पुलिस पर हमले और हिंसा के गंभीर आरोप
एफआईआर में दावा किया गया है कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की। पुलिस का आरोप है कि सुरक्षाबलों पर पत्थर और चप्पलें भी फेंकी गईं, जिससे कई जवान घायल हो गए। शिकायत में यह भी कहा गया है कि हमला जानलेवा इरादे से किया गया था। इसी आधार पर पुलिस ने हत्या के प्रयास की धारा सहित कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। हालांकि इन आरोपों की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
सरकारी संपत्ति को नुकसान और पुलिस की कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने एफआईआर में यह भी आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान सरकारी संपत्ति और कुछ निजी वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस का कहना है कि संसद और आसपास स्थित संवेदनशील सरकारी इमारतों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हालात नियंत्रित करने के लिए सीमित बल प्रयोग किया गया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का लाठीचार्ज किया गया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। पुलिस का दावा है कि यह कदम केवल सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शनकारियों को प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने से रोकने के लिए उठाया गया।
13 गंभीर धाराओं में केस और FRS से पहचान जारी
कर्तव्य पथ थाने में दर्ज एफआईआर में हत्या के प्रयास के अलावा सरकारी कर्मचारी पर हमला, सरकारी कार्य में बाधा डालना, गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और लोगों की जान खतरे में डालने सहित कुल 13 गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, जंतर-मंतर क्षेत्र में लगे फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) कैमरों की मदद से प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। पुलिस का दावा है कि अब तक 2,000 से अधिक ऐसे लोगों की पहचान की जा चुकी है, जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
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