Karnataka Politics: कर्नाटक की राजनीति में इस समय बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पद से सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद, कांग्रेस आलाकमान राज्य में एक बिल्कुल नई और ऊर्जावान टीम तैयार करने की योजना बना रहा है। माना जा रहा है कि कर्नाटक का अगला मंत्रिमंडल केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के प्रयोग जैसा हो सकता है, जिसे ‘केरलम मॉडल’ कहा जा रहा है। पार्टी इस बार युवाओं को तरजीह देकर एक नया राजनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश में है, जबकि सत्ता की कमान 64 वर्षीय डी.के. शिवकुमार को सौंपी जा सकती है।
Giribala Singh Arrest: 6 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद CBI ने किया गिरफ्तार
वरिष्ठ नेताओं पर गिरेगी गाज
राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें बेहद तेज हैं कि यदि डी.के. शिवकुमार मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालते हैं, तो सिद्धारमैया सरकार के कई सीनियर मंत्रियों को नई कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।
जिन प्रमुख चेहरों की कुर्सी जाने की संभावना है, उनमें 73 वर्षीय समाज कल्याण मंत्री एच.सी. महादेवप्पा, 76 वर्षीय ऊर्जा मंत्री के.जे. जॉर्ज और 74 वर्षीय गृह मंत्री जी. परमेश्वर जैसे दिग्गज शामिल हैं। निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेहद करीबी माने जाने वाले मंत्रियों—बैरथी सुरेश, संतोष लाड, दिनेश गुंडू राव और बी.जेड. जमीर अहमद खान के राजनीतिक भविष्य पर भी तलवार लटकी हुई है। आलाकमान इन चेहरों की जगह नए चेहरों को आजमाना चाहता है।
क्या है राहुल गांधी का ‘युवा कैबिनेट’ प्लान?
मंत्रिमंडल में होने वाला यह बड़ा फेरबदल लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की दूरगामी सोच का हिस्सा माना जा रहा है। राहुल गांधी काफी समय से राज्यों में युवा लीडरशिप को आगे बढ़ाने की वकालत करते रहे हैं।
कर्नाटक में मुख्यमंत्री सहित मंत्रिमंडल के कुल 34 पद हैं। वर्तमान में के.एन. राजन्ना और बी. नागेंद्र के इस्तीफे तथा डी. सुधाकर के दुखद निधन के बाद तीन पद पहले से खाली चल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने पहले भी सिद्धारमैया को सलाह दी थी कि कैबिनेट में 50 वर्ष से कम उम्र के विधायकों की संख्या बढ़ाई जाए। अब नई सरकार के गठन में इसी ’50 से कम’ वाले फॉर्मूले को सख्ती से लागू करने की तैयारी है।
अनुभव और युवा जोश का अनूठा मिश्रण
पार्टी के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि पूरी तरह वरिष्ठों को दरकिनार करना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए शीर्ष नेतृत्व अनुभव और युवा चेहरों के एक स्वस्थ मिश्रण (Blend) पर विचार कर रहा है।
रणनीति के मुताबिक, सिद्धारमैया सरकार के लगभग 15 अनुभवी मंत्रियों और 5 युवा मंत्रियों को नई सरकार में बरकरार रखा जा सकता है। इसके अलावा बाकी बचे सभी खाली पदों पर उन नए और युवा चेहरों को मौका दिया जाएगा, जिन्हें डी.के. शिवकुमार खुद अपनी टीम के लिए चुनेंगे। हालांकि, अंतिम फैसला होना अभी बाकी है।
बुजुर्ग नेताओं की चेतावनी
इस बड़े बदलाव की रेस के बीच कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक और 79 वर्षीय पूर्व मंत्री आर.वी. देशपांडे ने पार्टी को आगाह किया है। उन्होंने साफ कहा कि केवल नए चेहरों के दम पर सरकार नहीं चलाई जा सकती।
पूर्व उद्योग मंत्री आर.वी. देशपांडे का बयान
“हमें अभी तक नई कैबिनेट के स्वरूप के बारे में आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं बताया गया है। नए चेहरों का स्वागत होना चाहिए, लेकिन प्रशासनिक काम में निरंतरता (Continuity) बेहद जरूरी है। सरकार को कुशलता से चलाने के लिए तजुर्बेकार लोगों की आवश्यकता होती है। जहां तक मेरा सवाल है, मैं किसी पद के पीछे नहीं भाग रहा, लेकिन जिम्मेदारी मिलने पर विचार जरूर करूंगा।”
पीएम सूर्य घर योजना से बड़ी राहत! 39,975 उपभोक्ताओं के खातों में पहुंची ₹311 करोड़ से ज्यादा सब्सिडी










