Karnataka Politics : कर्नाटक कांग्रेस में पिछले कई महीनों से मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चल रही खींचतान पर अब विराम लग गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में फिलहाल नेतृत्व परिवर्तन की कोई संभावना नहीं है। खरगे ने दो टूक शब्दों में कहा कि वर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अपने पद पर बने रहेंगे और पार्टी आलाकमान उनके कामकाज से संतुष्ट है। इस घोषणा के बाद उन अटकलों को गहरा झटका लगा है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद डी.के. शिवकुमार को कमान सौंपी जा सकती है। खरगे का यह फैसला राज्य में प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
डी.के. शिवकुमार का आलाकमान के प्रति पूर्ण समर्पण
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार ने भी इस मुद्दे पर अपनी स्थिति साफ कर दी है। दिल्ली से लौटने के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वे और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पूरी तरह से पार्टी के अनुशासित सिपाही हैं। शिवकुमार ने जोर देकर कहा, “पार्टी हाईकमान जो भी निर्णय लेगा, हम उसका अक्षरशः पालन करेंगे।” उनका यह बयान उस समय आया है जब राजनीतिक गलियारों में उनके मुख्यमंत्री बनने की चर्चाएं जोरों पर थीं। शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि उन्हें नेतृत्व पर पूरा भरोसा है और पार्टी संगठन के हित में सही समय पर सही फैसला लेगी।
4 मई के चुनावी नतीजों के बाद बदलाव की थीं अटकलें
दरअसल, कर्नाटक की राजनीति में यह हलचल 4 मई को आने वाले विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनाव और कर्नाटक की दो सीटों पर हुए उपचुनाव के परिणामों को लेकर बढ़ी थी। राजनीतिक विशेषज्ञों का अनुमान था कि चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस आलाकमान कर्नाटक कैबिनेट में बड़ा फेरबदल कर सकता है। जब शिवकुमार से दिल्ली में हुई उनकी गुप्त बैठकों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने रहस्यमयी अंदाज में कहा, “मैं मीडिया के सामने हर बात साझा नहीं कर सकता। उचित समय आने पर सब कुछ सार्वजनिक हो जाएगा।” हालांकि, खरगे के ताजा बयान ने फिलहाल इन चर्चाओं पर ताला लगा दिया है।
पार्टी के भीतर आंतरिक गुटबाजी और मतभेदों का खंडन
मंत्रिमंडल में कथित कलह और वरिष्ठ मंत्री सतीश जारकीहोली के बयानों को लेकर भी डी.के. शिवकुमार ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के भीतर किसी भी तरह का कोई मतभेद नहीं है। जारकीहोली के बयानों पर सफाई देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह सब मीडिया की उपज है; असल में पूरी कैबिनेट एकजुट होकर काम कर रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जनता तक पहुँचाने में मदद करें।
सिद्धारमैया और शिवकुमार की जोड़ी पर आलाकमान का भरोसा
मल्लिकार्जुन खरगे के इस फैसले से यह साफ हो गया है कि कांग्रेस हाईकमान सिद्धारमैया के अनुभव और शिवकुमार की संगठनात्मक शक्ति के तालमेल को बिगाड़ना नहीं चाहता। आगामी लोकसभा चुनावों और क्षेत्रीय चुनौतियों को देखते हुए पार्टी किसी भी तरह के जोखिम से बचना चाहती है। खरगे ने संकेत दिया कि पार्टी की प्राथमिकता फिलहाल आंतरिक कलह के बजाय शासन-प्रशासन को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री पद पर यथास्थिति बनाए रखने के इस फैसले से सिद्धारमैया खेमे में खुशी की लहर है, जबकि शिवकुमार के समर्थकों को अब ‘सही समय’ का इंतजार करने का संदेश दिया गया है।









