CJP Protest: ‘हर सत्ता अस्थायी होती है…’ छात्र आंदोलन पर कपिल सिब्बल की चेतावनी से मचा सियासी हड़कंप

राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार से मानवीय रुख अपनाने की अपील की है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों तक खाने की सप्लाई रोकने और इंटरनेट बंद करने जैसी कार्रवाइयों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि सरकार को युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।

CJP Protest

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 25, 2026

CJP Protest: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) और छात्रों के नेतृत्व में चल रहे प्रदर्शनों के बीच, राज्यसभा सांसद एवं वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार से बेहद संवेदनशील और मानवीय रुख अपनाने की अपील की है। वर्तमान राजनीतिक माहौल और कड़े प्रशासनिक कदमों के बीच सिब्बल ने स्पष्ट रूप से कहा कि एक स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे देश के युवाओं और छात्रों के साथ किसी भी प्रकार का कठोर या दमनकारी व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि आंदोलनरत प्रदर्शनकारियों तक बिना किसी रुकावट के भोजन और बुनियादी जरूरतों की आपूर्ति होने दी जाए, ताकि स्थिति को और अधिक बिगड़ने से रोका जा सके।

देश के भविष्य के साथ संवेदनशीलता की अपील

बताते चले कि, जंतर-मंतर पर चल रहे इस चर्चित प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कपिल सिब्बल ने सरकार से एक भावुक और गंभीर अपील की है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि सरकार को अपने रवैये में इतनी संवेदनहीनता नहीं दिखानी चाहिए और प्रशासन को यह समझना होगा कि ये प्रदर्शनकारी छात्र कोई और नहीं बल्कि हमारे अपने देश का भविष्य हैं। उनके साथ पूरी संवेदनशीलता, सहानुभूति और मानवीय दृष्टिकोण के साथ पेश आना प्रशासन की जिम्मेदारी है। विरोध को कुचलने के बजाय सरकार को उनकी जायज चिंताओं को सुनना चाहिए, क्योंकि युवाओं के असंतोष को इस तरह नजरअंदाज करना देशहित में उचित नहीं है।

बुनियादी जरूरतों को राजनीति से दूर रखने की मांग

कपिल सिब्बल ने सरकार और स्थानीय प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि प्रदर्शन स्थल तक भोजन पहुंचाने वाले होटल, ढाबे, रेस्तरां और अन्य भोजनालयों को किसी भी तरह के दबाव में न रखा जाए और न ही खाने की आपूर्ति को रुकवाया जाए। उनका साफ तौर पर कहना था कि भोजन, पानी जैसी बुनियादी और मानवीय जरूरतों को किसी भी राजनीतिक आंदोलन या विरोध प्रदर्शन का हथियार या मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत नागरिकों को उनकी मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित करना न केवल अमानवीय है, बल्कि यह कानून और न्याय के सिद्धांतों के भी खिलाफ है।

दमनकारी नीतियों पर जताई चिंता

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कपिल सिब्बल ने प्रदर्शन स्थल के आसपास इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने और जंतर-मंतर की ओर आने वाले समर्थकों व आम नागरिकों को अनावश्यक रूप से परेशान किए जाने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि इस तरह के दमनकारी कदम उठाने से स्थितियां कभी सामान्य नहीं होतीं, बल्कि जनता के बीच अविश्वास और असंतोष की भावना और अधिक तेजी से फैलती है। सरकार को जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करते हुए संचार पर से रोक हटानी चाहिए और बेवजह की बाधाएं पैदा करना बंद करना चाहिए।

संवाद की बजाय दमन के खिलाफ कड़ी चेतावनी

अंत में चेतावनी देते हुए कपिल सिब्बल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सरकार खाने की आपूर्ति रोकने, इंटरनेट बैन करने और प्रदर्शनकारियों से मिलने आने वाले लोगों को परेशान करने जैसी कार्रवाई जारी रखती है, तो इससे यह आंदोलन कमजोर होने के बजाय और अधिक आक्रामक और तेज हो जाएगा। उन्होंने सरकार को नसीहत दी कि विरोध की आवाज़ों को बलपूर्वक दबाने के बजाय हमेशा संवाद और बातचीत का मार्ग चुना जाना चाहिए। इतिहास और लोकतंत्र की दुहाई देते हुए उन्होंने अंत में बहुत बड़ी बात कही कि सरकारें और हर सत्ता अस्थायी होती है, इसलिए अहंकार त्यागकर जनहित में फैसले लेने चाहिए।