UP News: कांवड़ यात्रा शुरू होने के साथ ही प्रदेश के शिव मंदिरों में घंटियों की गूंज और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया है। हरिद्वार, कछला घाट और गंगोत्री जैसे प्रमुख तीर्थों से गंगाजल लेकर निकले शिवभक्त पैदल, दौड़ते हुए और कलश सजाकर अपने-अपने आराध्य शिवालयों की ओर बढ़ रहे हैं। यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं है, बल्कि यह सनातन आस्था, अटूट अनुशासन और सामाजिक समरसता का एक जीवंत उदाहरण बन चुकी है। मंदिरों की सजावट और परिसर में गूंजते बम-बम भोले के नारे इस पूरे अनुष्ठान को और अधिक भव्य बनाते हैं।
काशी से अयोध्या तक उमड़ी कांवड़ियों की भारी भीड़
उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख शिव मंदिर—चाहे वह काशी विश्वनाथ हों, अयोध्या के नागेश्वरनाथ हों या फिर छोटे कस्बों के प्राचीन शिवालय—इस सावन भी कांवड़ियों के जयघोष से पूरी तरह गूंज रहे हैं। शासन-प्रशासन के पुख्ता इंतजाम, व्यापारियों के भारी उत्साह और श्रद्धालुओं की अटूट भक्ति ने मिलकर कांवड़ यात्रा को धार्मिक आस्था का सबसे बड़ा उत्सव बना दिया है। समय के साथ भले ही कांवड़ के स्वरूप में बदलाव आया हो, लेकिन भगवान शिव के प्रति भक्तों का समर्पण आज भी उतना ही अटूट है। यही कारण है कि अयोध्या, काशी, प्रयागराज, मेरठ और सहारनपुर के सभी छोटे-बड़े मंदिरों में शिव भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है।
योगी सरकार का सुरक्षा मॉडल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों के तहत इस बार कांवड़ यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए पूरे बरेली जोन सहित नौ जिलों में एक नया संवाद मॉडल लागू किया गया है। इसके अंतर्गत 19 प्रमुख बिंदुओं पर पुलिस प्रशासन सीधे जनता और धर्मगुरुओं के संपर्क में है, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की अफवाह या असामाजिक तत्वों को पनपने का कोई मौका न मिले। सड़क सुरक्षा के साथ-साथ सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। पहले सोमवार को निकलने वाले कांवड़ियों के महाजत्थे के लिए विश्राम स्थल, स्ट्रीट लाइट और सेवा शिविरों की चाक-चौबंद व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
युवाओं की पहली पसंद बने महादेव स्लोगन वाली टी-शर्ट और वस्त्र
कांवड़ यात्रा की दस्तक के साथ ही मेरठ सहित पूरे उत्तर प्रदेश के बाजार भगवा रंग में रंग चुके हैं। दुकानों पर भगवान शिव और महादेव के आकर्षक स्लोगन वाली टी-शर्ट युवाओं की पहली पसंद बनी हुई हैं, जिन पर ‘काल उसका क्या करे, जो भक्त हो महाकाल का’ जैसे जोश से भरे संदेश लिखे हैं। 80 रुपये से लेकर 500 रुपये तक की इन टी-शर्ट्स के अलावा भगवा गमछे, वाटरप्रूफ मोबाइल कवर और हाफ पैंट की बिक्री में भारी तेजी आई है। इसके साथ ही जलाभिषेक के लिए उपयोग होने वाले सजावटी स्टील कलश और अन्य पूजन सामग्रियों की मांग भी आसमान छू रही है।
आस्था के इस महापर्व से व्यापार और कारोबार को नई रफ्तार
आस्था और श्रद्धा के इस महापर्व से राज्य के व्यापार और उद्योग जगत को भी एक नई और तेज गति मिल रही है। व्यापारिक आंकड़ों और अनुमानों के मुताबिक, इस बार की कांवड़ यात्रा से उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लगभग 1500 करोड़ रुपये का जबरदस्त बल मिलने की उम्मीद है। अकेले मेरठ शहर में ही करीब 300 करोड़ रुपये के बड़े कारोबार की संभावना जताई जा रही है। स्थानीय व्यापारियों का साफ कहना है कि यात्रा के पूरी तरह परवान चढ़ते ही बाजारों में आर्थिक गतिविधियों और खरीदारों की संख्या में और अधिक तेजी दर्ज की जाएगी।










