UP News: आपके शहर की कोचिंग सुरक्षित है? कानपुर में अवैध निर्माण पर KDA की बड़ी कार्रवाई

लखनऊ अग्निकांड के बाद कानपुर प्रशासन पूरी तरह सख्त हो गया है। KDA ने काकादेव की 'कोचिंग मंडी' में ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए बेसमेंट में अवैध रूप से संचालित 16 कोचिंग संस्थानों को सील कर दिया है। 22 अन्य संस्थान रडार पर हैं। अधिकांश संस्थान सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर छात्रों की जान जोखिम में डालकर चलाए जा रहे थे।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 23, 2026

UP News: लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत के बाद कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) पूरी तरह सतर्क हो गया है। मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बाद, केडीए उपाध्यक्ष अंकुर कौशिक के नेतृत्व में प्रवर्तन दस्ते ने सोमवार शाम एक बड़ा अभियान चलाया। दो घंटे चली इस ताबड़तोड़ कार्रवाई में नक्शे के विपरीत संचालित हो रहे 16 कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील कर दिया गया। केडीए सचिव अभय पांडेय ने स्पष्ट किया है कि बेसमेंट का दुरुपयोग कर चलाई जा रही गतिविधियों पर अब कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

चिह्नित किए गए 22 और संस्थान

प्राधिकरण की यह कार्रवाई केवल शुरुआत है। सीलिंग की प्रक्रिया के दौरान दस्ते ने 22 अन्य ऐसे प्रतिष्ठानों को चिह्नित किया है, जो सुरक्षा मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं। इन सभी पर मंगलवार को कड़ी कार्रवाई की जाएगी। केडीए ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन बेसमेंट का उपयोग पार्किंग या स्टोरेज के बजाय कोचिंग सेंटर, डिजिटल लाइब्रेरी या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए हो रहा है, उन्हें तत्काल खाली कराकर सील किया जाएगा। यह अभियान भविष्य में भी अनवरत जारी रहेगा।

काकादेव की कोचिंग मंडी में मौत का जाल

दैनिक जागरण की पड़ताल में काकादेव स्थित कोचिंग मंडी की भयावह हकीकत सामने आई है। यहाँ इंजीनियरिंग, मेडिकल और सिविल सेवा की तैयारी कराने वाले 100 से अधिक संस्थान और डिजिटल लाइब्रेरी संचालित हैं। अधिकांश संस्थान बेसमेंट में चल रहे हैं, जहाँ आवागमन के लिए मात्र एक संकरा रास्ता है। आग लगने जैसी आपातकालीन स्थिति में यहाँ से सुरक्षित बाहर निकलना लगभग नामुमकिन है। सुरक्षा के नाम पर केवल नाममात्र के फायर एक्सटिंग्विशर दिखाई दिए, जो छात्रों की सुरक्षा के लिए नाकाफी हैं।

अग्निशमन विभाग के नोटिसों से नहीं सुधरे हालात

बीते वर्षों में कई बार हादसे होने के बावजूद अग्निशमन विभाग ने केवल नोटिस जारी कर अपना पल्ला झाड़ लिया, जिसका नतीजा आज इन संस्थानों की लापरवाही के रूप में सामने है। हजारों छात्र अपनी जान जोखिम में डालकर यहाँ पढ़ाई करने को मजबूर हैं। दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड के बाद भी पूरे उत्तर प्रदेश में बेसमेंट खाली कराने का अभियान चला था, लेकिन कुछ समय बाद ही इन बेसमेंटों का व्यावसायिक उपयोग फिर से शुरू हो गया।

अस्पताल और रेस्टोरेंट के लिए भी बेसमेंट का अवैध उपयोग

नियमों के अनुसार, बेसमेंट का उपयोग केवल वस्तुओं के संग्रह के लिए किया जा सकता है, लेकिन कानपुर के कोचिंग माफिया और व्यावसायिक संचालकों ने नियमों को ताक पर रख दिया है। कोचिंग सेंटरों के अलावा अस्पताल और रेस्टोरेंट भी बेधड़क बेसमेंट में चलाए जा रहे हैं। लखनऊ अग्निकांड की त्रासदी ने यह साबित कर दिया है कि सुरक्षा मानकों के साथ खिलवाड़ करने वाले ये ‘डेथ ट्रैप’ कभी भी मौत का कारण बन सकते हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन की यह सख्ती कब तक बरकरार रहती है।