Kanpur Kidney Racket Case: उत्तर प्रदेश के कानपुर के रावतपुर इलाके में स्थित ‘आहूजा अस्पताल’ से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है जिसने पूरी इंसानियत और चिकित्सा जगत को झकझोर कर रख दिया है। यहाँ इलाज के नाम पर बड़े पैमाने पर अवैध किडनी ट्रांसप्लांट (गुर्दा प्रत्यारोपण) का गोरखधंधा चलाया जा रहा था। जब पुलिस ने इस काले साम्राज्य पर छापा मारा, तो अस्पताल का पूरा स्टाफ रातों-रात फरार हो गया। अस्पताल के बाहर तैनात सुरक्षा गार्ड ने सारा सच एक ही पंक्ति में बयां करते हुए बताया कि पुलिस डॉक्टर दंपति को पकड़ ले गई है और उसके बाद डर के मारे बाकी कर्मचारी भाग निकले। रिसेप्शन पर खुले पड़े रजिस्टर और इमरजेंसी वार्ड में टंगी आधी खाली ड्रिप इस बात की गवाही दे रही हैं कि यहाँ मानवता का खून करने वाला यह धंधा बेखौफ तरीके से फल-फूल रहा था।
किडनी की अवैध खरीद-फरोख्त
पुलिस की शुरुआती तफ्तीश और जांच में यह बात सामने आई है कि डॉक्टर प्रीति आहूजा और सुरजीत सिंह आहूजा का यह पूरा सिंडिकेट बेहद शातिर और संगठित तरीके से काम करता था। ये लोग दलालों के जरिए गरीब, असहाय और मजबूर लोगों को ढूंढते थे और उन्हें थोड़े से रुपयों का लालच देकर उनकी बेशकीमती किडनी निकाल लेते थे। पुलिस को एक बेहद चौंकाने वाला मामला मिला है, जिसमें उत्तराखंड के एक सीधे-साधे युवक को 10 लाख रुपये देने का झांसा देकर उसकी किडनी निकाल ली गई, लेकिन उसे पूरे पैसे भी नहीं दिए गए। आरोप है कि उसी युवक की किडनी का सौदा एक रईस महिला मरीज के परिवार से करीब 90 लाख रुपये की भारी-भरकम रकम में किया गया था। पकड़े जाने के खौफ से ये लोग डोनर (दाता) और रिसीवर (पाने वाले) को ऑपरेशन के तुरंत बाद अलग-अलग गुप्त ठिकानों पर छिपा देते थे।
दलाल शिवम अग्रवाल जरूरतमंद छात्रों को फंसाता था
इस पूरे किडनी तस्करी कांड का मुख्य मोहरा शिवम अग्रवाल नाम का एक बिचौलिया था, जो जरूरतमंद छात्रों और गरीबों को रुपयों का लालच देकर अपने जाल में फंसाता था। पुलिस की सघन पूछताछ में यह डरावना सच भी सामने आया है कि एमबीए (MBA) के छात्र-छात्राओं तक को पैसों की तंगी का फायदा उठाकर इस गैरकानूनी धंधे में धकेला गया था। आहूजा अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में बिना किसी कानूनी अनुमति और कागजी कार्रवाई के ये जटिल सर्जरियां की जाती थीं। इस खूनी खेल में अस्पताल प्रबंधन हर केस के लिए साढ़े तीन से चार लाख रुपये की मोटी कमीशन और फीस वसूलता था। इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश तब हुआ जब पैसों के अनैतिक बंटवारे को लेकर आपस में अनबन हुई और एक पीड़ित डोनर ने हिम्मत दिखाकर पुलिस को अपनी पूरी आपबीती सुना दी।
छापेमारी में कई अन्य नर्सिंग होम भी जांच के दायरे में आए
मामले की संगीनता को देखते हुए कानपुर की क्राइम ब्रांच ने शहर के कई अस्पतालों में एक साथ दबिश दी और छापेमारी की। इस कार्रवाई में आहूजा अस्पताल के अलावा ‘प्रिया’ और ‘मेडलाइफ’ हॉस्पिटल भी पुलिस की तफ्तीश के दायरे में आ गए हैं। पुलिस ने भारी मात्रा में संदिग्ध दस्तावेज, जाली कागजात और मरीजों का गोपनीय डेटा जब्त किया है। इसके साथ ही पुलिस ने डॉक्टर दंपति समेत मास्टरमाइंड दलाल शिवम को सलाखों के पीछे भेज दिया है। जांच टीम अब उन कड़ियों को जोड़ रही है जहां किडनी पाने वाले रईस मरीजों को गुपचुप तरीके से शिफ्ट किया गया था। फिलहाल आहूजा अस्पताल को पूरी तरह सील कर दिया गया है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस मौत के व्यापार के तार देश के और किन बड़े महानगरों से जुड़े हुए हैं।










