Kangana On Rahul Gandhi : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा दिए गए हालिया संबोधन पर राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने राहुल गांधी के भाषण की तीखी आलोचना करते हुए इसे एक ‘थका देने वाला अनुभव’ करार दिया है। कंगना ने न केवल राहुल गांधी की भाषण शैली पर सवाल उठाए, बल्कि संसद की गरिमा और विपक्षी दलों की कार्यप्रणाली पर भी कड़ा प्रहार किया। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक नई बहस छेड़ दी है।
राहुल का भाषण और ‘बचपन का ट्रॉमा’
संसद भवन के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए कंगना रनौत ने कहा कि राहुल गांधी का भाषण सुनना उनके लिए किसी सिरदर्द से कम नहीं था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी सदन में गंभीर राजनीतिक चर्चा करने के बजाय अपने बचपन के अनुभवों, डर और जादू के शो की कहानियों में उलझे हुए थे। कंगना के अनुसार, “ऐसा लग रहा था मानो वह अपने बचपन के किसी ट्रॉमा या किसी पुराने जादू के शो की यादों से गुजर रहे हों।” उन्होंने आरोप लगाया कि इन व्यक्तिगत बातों के कारण राहुल की बातों का कोई तार्किक सिरा पकड़ पाना मुश्किल हो रहा था।
संसद की गरिमा और अनुशासन पर सवाल
कंगना ने सदन के भीतर राहुल गांधी के व्यवहार पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ने उन्हें टोकने या रुकने के लिए कहा, तब भी राहुल गांधी ने उनकी बात अनसुनी कर दी। कंगना ने कहा, “एक सांसद और नेता प्रतिपक्ष के रूप में उन्हें अनुशासन का पालन करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।” उनके अनुसार, संसद गंभीर नीतिगत निर्णयों और देश के मुद्दों पर चर्चा का मंच है, लेकिन राहुल गांधी ने इसे व्यक्तिगत किस्सागोई का केंद्र बनाकर लोकतंत्र की छवि को नुकसान पहुँचाया है।
व्यक्तिगत अनुभवों बनाम राजनीतिक गंभीरता
बीजेपी सांसद ने जोर देकर कहा कि संसद में होने वाली बहस तथ्यों और जनता की समस्याओं पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह गंभीर बहस से ज्यादा अपनी निजी यादों को साझा करने में रुचि ले रहे थे। कंगना ने सुझाव दिया कि हर नेता को इस तरह की गैर-राजनीतिक बातों से बचना चाहिए, क्योंकि इससे सदन का समय नष्ट होता है और जनता के बीच गलत संदेश जाता है। उन्होंने राहुल के भाषण को ‘भ्रमित करने वाला’ और ‘अपरिपक्व’ बताया।
महिला आरक्षण और विपक्ष की ‘बहानेबाजी’
भाषण के अलावा, कंगना रनौत ने महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) और परिसीमन के मुद्दे पर भी विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष हमेशा की तरह हर सकारात्मक पहल में बाधा डालने का काम कर रहा है। परिसीमन को लेकर विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे सवालों को उन्होंने ‘कोरी बहानेबाजी’ करार दिया। कंगना ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और विपक्ष को इस ऐतिहासिक कदम में सरकार का कंधा से कंधा मिलाकर साथ देना चाहिए।
विपक्ष की मंशा पर देश की नजर
कंगना ने अपने बयान के अंत में कहा कि देश की जनता अब जागरूक है और वह विपक्ष की दोहरी मानसिकता को देख रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ विपक्ष महिलाओं के हक की बात करता है और दूसरी तरफ महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण बिल के कार्यान्वयन में तकनीकी अड़चनें पैदा करता है। उन्होंने सवाल किया कि अगर विपक्ष वाकई बेटियों की प्रगति को लेकर गंभीर है, तो वह परिसीमन जैसे संवैधानिक प्रावधानों पर बेवजह हंगामा क्यों कर रहा है? कंगना के इन तीखे तेवरों ने संसद के मौजूदा सत्र की गर्मी को और बढ़ा दिया है।









