Kangana Ranaut-Chirag Paswan: बॉलीवुड की ‘क्वीन’ और मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपनी बेबाकी के कारण चर्चा के केंद्र में हैं। हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने अपनी निजी जिंदगी और राजनीतिक करियर को लेकर ऐसे खुलासे किए हैं, जिन्होंने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। पिछले कुछ समय से इंटरनेट पर कंगना रनौत और लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान के बीच नजदीकियों की खबरें तैर रही थी। इन चर्चाओं पर पूर्णविराम लगाते हुए कंगना ने बेहद मजाकिया लेकिन स्पष्ट लहजे में सफाई दी।
कंगना रनौत ने कहा कि, चिराग उनके पुराने मित्र हैं और वे एक-दूसरे को लगभग एक दशक से जानते हैं। अफवाहों को खारिज करते हुए कंगना ने कहा, “अगर हमारे बीच कोई प्रेम प्रसंग होता, तो आज हमारे बच्चे भी स्कूल जा रहे होते।” उनके इस बयान ने यह साफ कर दिया कि दोनों के बीच केवल एक स्वस्थ मित्रता और पेशेवर सम्मान का रिश्ता है।
कंगना का सियासी अंदाज
एक सांसद के तौर पर कंगना ने राजनीतिक गलियारों की हलचल पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह उन्हें किसी महत्वपूर्ण पद के योग्य नहीं मानतीं। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपना अटूट विश्वास दोहराते हुए कंगना ने उनकी कार्यशैली की सराहना की। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी का दृष्टिकोण समावेशी है और वह विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण और नारी शक्ति को मुख्यधारा में लाने के लिए समर्पित हैं।
शुरुआती संघर्षों को याद करते हुए दिलचस्प किस्सा सुनाया
कंगना ने अपने करियर के शुरुआती संघर्षों को याद करते हुए एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि सुपरस्टार सलमान खान ने बहुत पहले ही उनकी प्रतिभा को पहचान लिया था। कंगना के अनुसार, सलमान ने उनसे कहा था कि उनमें संजय लीला भंसाली की फिल्मों की हीरोइन बनने की क्षमता है। एक बाहरी व्यक्ति (आउटसाइडर) के लिए उस समय इस तरह की सराहना मिलना बहुत मायने रखता था, जिसने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में टिके रहने का हौसला दिया।
नेपोटिज्म की बहस में आई नरमी
फिल्म इंडस्ट्री में ‘नेपोटिज्म’ की जंग छेड़ने वाली कंगना के सुर इस बार फिल्म निर्माता करण जौहर को लेकर थोड़े बदले हुए नजर आए। जिस फिल्म मेकर पर वह अक्सर निशाना साधती रही हैं, उनके बारे में इस बार उन्होंने संतुलित राय रखी. कंगना ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि करण जौहर व्यक्तिगत रूप से एक ‘बुरे इंसान’ हैं। हालांकि वह विचारधारा और काम करने के तरीके पर असहमत हो सकती हैं, लेकिन उनकी यह टिप्पणी उनके स्वभाव में आए ठहराव और परिपक्वता को दर्शाती है।









