Kangana Ranaut on Rahul Gandhi: राहुल गांधी के व्यवहार पर कंगना का बड़ा बयान, विपक्ष के नेता पर उठाए सवाल

बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने राहुल गांधी के व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए उन्हें 'असहज' करने वाला बताया है। वहीं, 200 से अधिक पूर्व नौकरशाहों और सैन्य अधिकारियों ने एक खुला पत्र लिखकर संसद के मकर द्वार पर राहुल द्वारा चाय-बिस्किट खाने की घटना को अमर्यादित बताते हुए उनसे सार्वजनिक माफी की मांग की है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मार्च 18, 2026

Kangana Ranaut on Rahul Gandhi: संसद के गलियारों में राजनीतिक गर्माहट तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी के व्यवहार पर तीखे सवाल उठाए हैं। वहीं दूसरी ओर, देश के पूर्व नौकरशाहों और सैन्य दिग्गजों ने एक खुला पत्र लिखकर राहुल गांधी के हालिया कृत्यों को ‘संसदीय मर्यादा का उल्लंघन’ करार दिया है।

कंगना रनौत ने राहुल गांधी के व्यवहार को बताया असहज

न्यूज एजेंसी से बातचीत के दौरान कंगना रनौत ने राहुल गांधी के सांसदों और अन्य लोगों के साथ मेल-जोल के तरीके की कड़ी आलोचना की। कंगना ने कहा कि जिस तरह से राहुल गांधी पेश आते हैं, वह विशेष रूप से महिला सांसदों के लिए काफी असहज करने वाला अनुभव होता है। उन्होंने राहुल के बॉडी लैंग्वेज पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह इंटरव्यू दे रहे लोगों के बीच में आकर उन्हें परेशान करते हैं। कंगना ने राहुल गांधी की तुलना उनकी बहन प्रियंका गांधी से करते हुए कहा कि उन्हें अपनी बहन के शालीन व्यवहार से सीखना चाहिए।

पूर्व नौकरशाहों और सैनिकों ने ‘मकर द्वार’ की घटना पर जताया कड़ा विरोध

यह विवाद तब और गहरा गया जब 84 पूर्व नौकरशाहों, 116 पूर्व सैन्य अधिकारियों और कई वकीलों ने राहुल गांधी के खिलाफ एक साझा मोर्चा खोल दिया। इस समूह ने एक खुला पत्र (Open Letter) जारी कर राहुल गांधी से माफी की मांग की है। मामला 12 मार्च की एक घटना से जुड़ा है, जहाँ राहुल गांधी को संसद के प्रतिष्ठित ‘मकर द्वार’ पर चाय-बिस्किट खाते हुए देखा गया था। पत्र में इसे “संसदीय अधिकार की जानबूझकर की गई अवहेलना” और “निंदनीय कृत्य” बताया गया है।

विपक्ष के नेता के पद की गरिमा

जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने इस विरोध का नेतृत्व करते हुए कहा कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता (Leader of Opposition) की गरिमा को समझने में विफल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय पीना और नारेबाजी करना केवल “राजनीतिक नाटकबाजी” है। वैद के अनुसार, यह व्यवहार राहुल गांधी के भीतर मौजूद “अहंकार और विशेषाधिकार की भावना” को दर्शाता है, जो लोकतंत्र के मंदिर के लिए उचित नहीं है।

संसदीय मर्यादा की रक्षा और जवाबदेही की मांग

हस्ताक्षरकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि संसद कोई तमाशा दिखाने की जगह नहीं है, बल्कि यह देश के भविष्य के लिए कानून बनाने वाला सर्वोच्च संस्थान है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अपीलों का हवाला देते हुए कहा कि बार-बार चेतावनी के बावजूद राहुल गांधी का संसदीय शिष्टाचार के प्रति उदासीन रवैया देश के लिए गलत उदाहरण पेश कर रहा है। उन्होंने मांग की है कि राहुल गांधी को एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी भूमिका समझनी चाहिए और देश से माफी मांगनी चाहिए।