Jodhpur News: ‘क्या यही है तुम मर्दों की पहचान?’ 4 महीने की मासूम से रेप के फैसले में कविता पढ़ रो पड़े जज, दरिंदे को सुनाई ताउम्र कैद

जोधपुर में 4 महीने की मासूम बच्ची से दरिंदगी के मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी को आखिरी सांस (शेष प्राकृतिक जीवन) तक कठोर कारावास और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा दी है।

Jodhpur News

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 7, 2026

Jodhpur News: राजस्थान के जोधपुर में चार महीने की एक बेकसूर मासूम बच्ची के साथ हुई रूह कंपा देने वाली दरिंदगी के मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने सोमवार को एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस अमानवीय कृत्य के आरोपी को दोषी करार देते हुए उसे अंतिम सांस (शेष प्राकृतिक जीवन) तक कठोर कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही एक लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। इस बेहद संवेदनशील मामले का फैसला लिखते समय विशिष्ट न्यायाधीश डॉ. दुष्यंत दत्त अपने अंतर्मन की पीड़ा को रोक नहीं पाए और बेहद भावुक हो गए। उन्होंने अपने 66 पन्नों के ऐतिहासिक फैसले में मशहूर कवयित्री हीना जैन की कविता की मर्मस्पर्शी पंक्तियां— ‘क्या यही है तुम मर्दों की पहचान?’ को शामिल किया। न्यायाधीश ने इस घटना को समाज पर एक गहरा कलंक बताते हुए कहा कि इस कृत्य को ‘पशुता’ की संज्ञा भी नहीं दी जा सकती, क्योंकि पशु भी कभी ऐसा आचरण नहीं करते।

Haryana Weather: हरियाणा में मानसून मेहरबान, 7 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

सूने कमरे में मासूम को पाकर कलयुगी दरिंदे ने पार की थीं हदें

यह दिल दहला देने वाली घटना 14 मार्च 2025 की है। बच्ची के माता-पिता रोजाना की तरह मजदूरी करने के लिए एक फैक्ट्री में गए हुए थे और 4 महीने की नवजात बच्ची घर के कमरे में अकेली सो रही थी। मासूम को अकेला पाकर आरोपी नियत खराब कर कमरे में घुस गया और उसने बच्ची के साथ अमानवीय दुष्कर्म किया। बच्ची की चीखें सुनकर दौड़े स्थानीय लोगों ने आरोपी को मौके पर ही रंगे हाथों पकड़ लिया था और जमकर धुनाई के बाद पुलिस के हवाले कर दिया था। बच्ची के पिता की तहरीर पर पुलिस ने तुरंत मुकदमा दर्ज कर त्वरित कार्रवाई की। विशिष्ट लोक अभियोजक नरपत चौधरी ने बताया कि अदालत के समक्ष न्याय की इस लड़ाई में कुल 23 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए और 53 पुख्ता दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए गए, जिसके आधार पर कोर्ट ने आरोपी को बिना किसी ढिलाई के ताउम्र कैद की सजा सुनाई।

न्यायाधीश का अमानवीय कृत्य पर फूटा आक्रोश

न्यायाधीश डॉ. दुष्यंत दत्त ने अपने फैसले में जिस कविता का उल्लेख किया, वह पुरुष प्रधान समाज और कथित मर्दानगी पर एक करारा तमाचा है। फैसले में लिखा गया:

“अरे शर्म करो तुम मर्द, समझो उस लड़की का दर्द। आओ दिखाओ अपनी मर्दानगी… क्या अब वह इज्जत से बन पाएगी किसी की बेटी, बहू या अर्धांगिनी…”

न्यायाधीश ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि हमारा देश और संस्कृति वह है जहाँ कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजा जाता है, लेकिन उसी समाज में ऐसी विकृत मानसिकता पनप रही है जो अंतर्मन को छलनी कर देती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे अपराधियों के लिए ‘पशुवत’ शब्द भी उचित नहीं है, क्योंकि जानवर भी प्रकृति के स्वाभाविक नियमों के विपरीत ऐसा घिनौना काम नहीं करते।

पीड़ित बच्ची के भविष्य के लिए 15 लाख की एफडी का आदेश

अदालत केवल आरोपी को सलाखों के पीछे भेजने तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उसने पीड़िता के अंधकारमय भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भी एक सराहनीय और अभूतपूर्व कदम उठाया। कोर्ट ने आदेश दिया कि पीड़िता के नाम पर 15 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) जमा कराई जाए, जो उसके बालिग होने तक सुरक्षित रहेगी। इस एफडी की देखरेख की जिम्मेदारी ‘लीगल एड’ को सौंपी गई है। सबसे खास बात यह है कि इस राशि से मिलने वाला मासिक ब्याज सीधे पीड़िता की मां के बैंक खाते में भेजा जाएगा, ताकि बच्ची के पालन-पोषण, उचित खान-पान और इलाज में परिवार को कोई आर्थिक तंगी न झेलनी पड़े। यह फैसला यह भरोसा दिलाता है कि हमारी न्याय व्यवस्था न केवल अपराधियों को उनके कर्मों का दंड देती है, बल्कि पीड़ितों का हाथ थामकर उन्हें समाज में सम्मान से जीने का संबल भी प्रदान करती है।

सभी सरकारी दस्तावेज होंगे ऑनलाइन, हरियाणा सरकार ने विभागों को दिए निर्देश