JNU News: जेएनयू की दीवारों पर किसने लिखे विवादित नारे? प्रशासन ने शुरू की जांच

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की दीवारों पर ‘Free Umar Khalid’, ‘Long Live Naxalbari’ और ‘RSS Go Back’ जैसे नारे लिखे मिलने से विवाद बढ़ गया है। इसके बाद ‘अखंड भारत’ के नारे भी सामने आए। ABVP ने आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की मांग की है, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने नारे लिखने वालों की पहचान के लिए जांच शुरू की है।

JNU News

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 25, 2026

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JNU News: जामिया मिलिया इस्लामिया के बाद अब जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में भी दीवारों पर लिखे राजनीतिक नारों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कैंपस की दीवारों पर ‘Free Umar Khalid’, ‘Long Live Naxalbari’, ‘RSS Go Back’ और ‘VC Go Back’ जैसे नारे लिखे मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आ गया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। इसी बीच दीवारों पर ‘अखंड भारत’ के नारे भी दिखाई दिए हैं, जिससे कैंपस में वैचारिक बहस और तेज हो गई है।

‘फ्री उमर खालिद’ और ‘नक्सलबाड़ी जिंदाबाद’ से बढ़ा विवाद

जेएनयू की दीवारों पर लिखे नारों को लेकर छात्र संगठनों के बीच बहस शुरू हो गई है। ‘Free Umar Khalid’ के जरिए जेल में बंद पूर्व जेएनयू छात्र उमर खालिद की रिहाई की मांग की गई है, जबकि ‘Long Live Naxalbari’ और ‘RSS Go Back’ जैसे नारों ने भी राजनीतिक चर्चा को हवा दी है। ‘VC Go Back’ के नारे को विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रति विरोध के तौर पर देखा जा रहा है।

‘फ्री उमर खालिद’ और ‘नक्सलबाड़ी जिंदाबाद’ से बढ़ा विवाद

इससे पहले जामिया मिलिया इस्लामिया में भी छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग और प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर ‘Free Kashmir’ और ‘Free Sharjeel Imam’ जैसे नारे सामने आने की खबरें आई थीं। अब जेएनयू में दीवारों पर लिखे संदेशों ने छात्र राजनीति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

‘अखंड भारत’ के नारों से तेज हुई वैचारिक लड़ाई

जेएनयू परिसर में अलग-अलग विचारधाराओं से जुड़े नारों के सामने आने के बाद इस विवाद को ‘ग्रैफिटी वॉर’ कहा जा रहा है। एक तरफ कुछ दीवारों पर वामपंथी विचारधारा से जुड़े संदेश दिखाई दिए, तो दूसरी तरफ ‘अखंड भारत’ जैसे नारे भी सामने आए। इस घटनाक्रम ने कैंपस में छात्र संगठनों के बीच वैचारिक टकराव को फिर चर्चा में ला दिया है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की जेएनयू इकाई ने दीवारों पर लिखे नारों और कथित आपत्तिजनक संदेशों पर कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन ने आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियों से विश्वविद्यालय का शैक्षणिक माहौल प्रभावित होता है और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचता है।

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ABVP ने लगाए आरोप, दोषियों पर कार्रवाई की मांग

ABVP के जेएनयू अध्यक्ष मयंक पंचाल और सचिव प्रवीण पियूष ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के सदस्यों को हिंदुत्व विचारक वीर सावरकर के चित्र के पास आपत्तिजनक बातें लिखते हुए देखा जा सकता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना जरूरी है।

ABVP ने लगाए आरोप, दोषियों पर कार्रवाई की मांग

ABVP नेताओं का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर राष्ट्रीय व्यक्तित्वों का अपमान करना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना सही नहीं है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उचित कार्रवाई की जाए।

JNU प्रशासन ने शुरू की जांच, CCTV के तार कटे मिलने की बात

JNU प्रशासन ने शुरू की जांच, CCTV के तार कटे मिलने की बात

दीवारों पर लिखे नारों के मामले में जेएनयू प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाया है। प्रशासन का कहना है कि कैंपस की शांति और पढ़ाई के माहौल को बिगाड़ने वाली गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नारे किसने और कब लिखे। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, घटनास्थल के पास लगे कुछ सीसीटीवी कैमरों के तार कटे हुए मिलने की बात भी सामने आई है। अगर इसकी पुष्टि होती है, तो इससे संबंधित लोगों की पहचान करने में परेशानी हो सकती है। फिलहाल जांच के नतीजों का इंतजार है।

छात्र राजनीति और चुनावों की बहाली के बीच बढ़ी सरगर्मी

जेएनयू में यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव, छात्र राजनीति और वैचारिक मुद्दों को लेकर बहस जारी है। दीवारों पर लिखे नारों ने छात्र संगठनों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।

अब सबकी नजर विश्वविद्यालय प्रशासन की जांच पर है। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि विवादित संदेश किसने लिखे और ‘अखंड भारत’ के नारे कब सामने आए। फिलहाल, इस मामले ने जेएनयू परिसर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राजनीतिक विचारधारा और सार्वजनिक संपत्ति की जिम्मेदारी को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।