Jharkhand News: पश्चिमी सिंहभूम के नोवामुंडी प्रखंड में जंगली हाथी ने तबाही का सबसे खौफनाक मंजर पेश किया। बीती रात बाबरिया गांव में एक दंतैल हाथी ने सोते हुए परिवार पर हमला कर दिया, जिसमें पति-पत्नी और उनके दो मासूम बच्चों समेत 5 लोगों की जान चली गई। मृतकों की पहचान सनातन मेराल, उनकी पत्नी जोंकों कुई और उनके दो बच्चों के रूप में हुई है। इसी हमले में पड़ोस के एक व्यक्ति मोगदा लागुरी की भी जान चली गई। वहीं, बड़ा पासीया और लांपाईसाई गांवों में भी हाथी के हिंसक हमले से 2 अन्य ग्रामीणों की मौत हो गई।
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6 दिनों से जारी हाथियों का आतंक
जिले में वन्यजीव संघर्ष ने विकराल रूप ले लिया है। 1 जनवरी से शुरू हुआ मौत का यह सिलसिला अब तक 17 जिंदगियां निगल चुका है। हाथी का खौफ अब केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आसपास के दर्जनों गांवों में फैल गया है। ग्रामीण रातों को जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। आक्रोशित ग्रामीणों और पीड़ित परिवारों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से तत्काल सुरक्षा मुहैया कराने और मृतकों के आश्रितों के लिए उचित मुआवजे की मांग की है। हालांकि, अधिकारियों ने सुरक्षा का भरोसा दिया है, लेकिन जमीन पर स्थिति अब भी अनियंत्रित है।
1 से 5 जनवरी के बीच हुई सिलसिलेवार घटनाएं
हाथी के हमलों का इतिहास देखें तो साल के पहले दिन यानी 1 जनवरी को टोंटो और सदर प्रखंड में 3 लोगों की जान गई थी। इसके बाद 2 जनवरी को गोइलकेरा में 13 वर्षीय रेंगा कयोम को हाथी ने कुचल दिया। 4 जनवरी को संतरा वन क्षेत्र में एक 47 वर्षीय महिला की मौत हुई और उनके पति-बच्चे घायल हो गए। 5 जनवरी को फिर से गोइलकेरा के मिस्त्रीबेड़ा में 50 वर्षीय जोंगा लागुरी को हाथी ने अपना शिकार बनाया। इन घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि हाथी लगातार अपना इलाका बदल-बदल कर हमला कर रहा है।
दंतैल हाथी की बेरहमी
मंगलवार, 6 जनवरी को हाथी की दरिंदगी चरम पर पहुंच गई। गोइलकेरा के सोवा गांव में हाथी ने एक ही झटके में कुंदरा बाहदा, उनके 6 साल के बेटे और महज 8 महीने की मासूम बच्ची सामू बाहदा को मौत के घाट उतार दिया। इस हृदयविदारक घटना के बाद बेकाबू हाथी कुईलसूता गांव पहुंचा, जहां उसने 21 वर्षीय जगमोहन सवईया को पटक-पटक कर मार डाला। वन विभाग अब इस ‘किलर एलिफेंट’ को ट्रैक करने की कोशिश कर रहा है, ताकि और अधिक जान-माल के नुकसान को रोका जा सके।










