Jharkhand Students Protest: रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा छात्र आंदोलन शनिवार को 15वें दिन भी जारी रहा। 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी लगातार अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी बीच शनिवार को आंदोलनरत अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू से मुलाकात कर अपनी समस्याएं और मांगें सामने रखीं। बातचीत के बाद सरकार की ओर से सभी संबंधित पक्षों से संवाद जारी रखने की बात कही गई।
सरकार सभी छात्र संगठनों से करेगी बातचीत
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार किसी एक छात्र संगठन या समूह तक अपनी बातचीत सीमित नहीं रखेगी। अलग-अलग छात्र संगठनों, अभ्यर्थियों और अन्य संबंधित पक्षों से चर्चा की जाएगी। सरकार का उद्देश्य सभी पक्षों की राय और चिंताओं को समझना है, ताकि परीक्षा व्यवस्था से जुड़े विवाद का व्यापक समाधान निकाला जा सके। उन्होंने कहा कि सामूहिक विचार-विमर्श के बाद ही आगे की कार्रवाई की दिशा तय की जाएगी।
ईमेल के जरिए भी छात्र भेज सकेंगे सुझाव
मंत्री ने बताया कि सरकार ने छात्रों और अन्य लोगों से लिखित सुझाव लेने की व्यवस्था भी की है। इसके लिए एक ईमेल आईडी जारी की गई है, जिस पर अभ्यर्थी, आम नागरिक और अन्य संबंधित पक्ष अपनी शिकायतें, सुझाव और आपत्तियां भेज सकते हैं। सरकार इन सुझावों को भी आगामी निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने पर विचार करेगी। इस पहल का उद्देश्य आंदोलन से जुड़े मुद्दों को व्यापक स्तर पर समझना बताया गया है।
परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए बनेगी नीति
सुदिव्य कुमार सोनू के अनुसार, सरकार को ईमेल और बैठकों के माध्यम से मिलने वाली सभी शिकायतों एवं सुझावों का अध्ययन किया जाएगा। इसके आधार पर परीक्षा व्यवस्था में आवश्यक बदलावों के लिए एक रिफॉर्म पॉलिसी तैयार करने की कोशिश होगी। सरकार चाहती है कि प्रस्तावित सुधार नीति में छात्रों की ओर से लगातार उठाई जा रही चिंताओं को पर्याप्त जगह मिले। इससे भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने में मदद मिल सकती है।
अलग-अलग पक्षों के साथ बैठक का सिलसिला जारी रहेगा
मंत्री ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में विभिन्न छात्र संगठनों और अन्य स्टेकहोल्डर्स के साथ बैठकें की जाएंगी। सरकार का मानना है कि सभी पक्षों को सुनने के बाद ही किसी सामूहिक निर्णय पर पहुंचना उचित होगा। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से ले रही है और बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। आंदोलन के बीच सरकार और अभ्यर्थियों के बीच संवाद को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
NSUI प्रतिनिधिमंडल ने भी रखी अपनी मांगें
मंत्री ने बताया कि नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया यानी NSUI का एक प्रतिनिधिमंडल भी अपनी मांगों और सुझावों को लेकर उनसे मिला। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल की ओर से रखी गई मांगें उन्हें जायज लगीं। मंत्री के मुताबिक, इन मांगों को मुख्यमंत्री के सामने रखा जाएगा और उन्हें उम्मीद है कि वहां से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल सकती है। इससे छात्रों की मांगों पर सरकार के स्तर पर आगे चर्चा का रास्ता खुल सकता है।
CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र
छात्र आंदोलन का मुख्य केंद्र 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को लेकर उठे विवाद हैं। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की पहली प्रमुख मांग है कि परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से कराई जाए। छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया पर उठे सवालों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है। उनके अनुसार, जब तक पूरे मामले की स्पष्ट जांच नहीं होती, तब तक परीक्षा परिणाम की विश्वसनीयता को लेकर अभ्यर्थियों के बीच असमंजस बना रहेगा।
14वीं JPSC पीटी दोबारा कराने की मांग
छात्रों की दूसरी बड़ी मांग 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित कराने की है। आंदोलनरत अभ्यर्थियों का तर्क है कि कथित अनियमितताओं के कारण सभी उम्मीदवारों को समान अवसर नहीं मिल पाया। इसलिए वे चाहते हैं कि परीक्षा को निरस्त कर पारदर्शी तरीके से दोबारा कराया जाए। छात्रों का कहना है कि निष्पक्ष प्रक्रिया और समान अवसर सुनिश्चित होने के बाद ही वे परीक्षा परिणाम को स्वीकार कर पाएंगे।
समाधान के लिए बातचीत पर टिकी निगाहें
फिलहाल सरकार की ओर से विभिन्न छात्र संगठनों और संबंधित पक्षों से बातचीत जारी रखने का भरोसा दिया गया है। वहीं, आंदोलनकारी छात्र अपनी प्रमुख मांगों पर कायम हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और छात्रों के बीच होने वाली बैठकों पर सभी की नजर रहेगी। यदि बातचीत के जरिए कोई सहमति बनती है, तो लंबे समय से जारी आंदोलन को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठ सकता है।








