Jharkhand Student Protest: रांची में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन अब राजनीतिक रूप लेता जा रहा है। विधानसभा घेराव के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर झारखंड सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। इसी बीच झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता रघुवर दास ने राज्य सरकार को सीधी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार ने एक सप्ताह के भीतर भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच की सिफारिश नहीं की, तो वह आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू करेंगे।
19 दिनों से भर्ती परीक्षाओं के खिलाफ आंदोलन
‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच’ के बैनर तले झारखंड में बड़ी संख्या में छात्र पिछले 19 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठने से उनके भविष्य और वर्षों की मेहनत पर असर पड़ रहा है। आंदोलन के दौरान छात्रों ने सरकार से मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचे रघुवर दास
ओडिशा के राज्यपाल की जिम्मेदारी संभाल चुके रघुवर दास बुधवार को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचे और आंदोलनरत छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने छात्रों के बीच अपनी बात रखते हुए राज्य सरकार से भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश करने की मांग की। दास ने कहा कि यदि सरकार तय समय सीमा में इस दिशा में कदम नहीं उठाती है, तो वह खुद छात्रों के साथ भूख हड़ताल पर बैठने के लिए मजबूर होंगे।
एक सप्ताह का दिया अल्टीमेटम
रघुवर दास ने राज्य सरकार को एक सप्ताह का समय देते हुए कहा कि इस अवधि के भीतर भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच की सिफारिश की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांग को गंभीरता से लेना सरकार की जिम्मेदारी है। दास ने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के कारण राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य पर असर पड़ रहा है। उनके मुताबिक, सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट और पारदर्शी रवैया अपनाना चाहिए।
सरकार की भूमिका पर उठाए सवाल
भाजपा नेता ने कहा कि यदि झारखंड सरकार का इन कथित अनियमितताओं में कोई संबंध नहीं है और वह पूरी तरह निष्पक्ष है, तो उसे सीबीआई जांच की सिफारिश करने में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। दास ने कहा कि जांच से सच्चाई सामने आ जाएगी और इससे सरकार पर लगे आरोपों की भी स्थिति स्पष्ट होगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार जांच से बचती है, तो जनता के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कहीं शीर्ष राजनीतिक नेताओं या अधिकारियों की भूमिका तो नहीं है।
पिछले छह वर्षों में भर्ती घोटालों का लगाया आरोप
रघुवर दास ने झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार पर पिछले छह वर्षों के दौरान बड़े पैमाने पर भर्ती घोटाले होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्तियों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। भाजपा नेता के मुताबिक, युवाओं को निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया और रोजगार के समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
आबकारी सिपाही भर्ती में हुई मौतों का मुद्दा उठाया
दास ने वर्ष 2024 की आबकारी सिपाही भर्ती की शारीरिक परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों की मौत का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने इस घटना में जान गंवाने वाले 19 लोगों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की। भर्ती अभियान की शारीरिक परीक्षा के दौरान 15 से अधिक अभ्यर्थियों की मौत की बात सामने आई थी। इस घटना को लेकर भाजपा लगातार तत्कालीन हेमंत सोरेन सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाती रही है।
भाजपा ने प्रशासन पर लापरवाही का लगाया आरोप
भाजपा का आरोप रहा है कि आबकारी सिपाही भर्ती के दौरान अभ्यर्थियों की मौतों को रोकने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। पार्टी ने प्रशासन पर कुप्रबंधन और लापरवाही के आरोप लगाते हुए सरकार को घेरा है। रघुवर दास ने भी इस मुद्दे को छात्रों और युवाओं के व्यापक हित से जोड़ते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मृत अभ्यर्थियों के परिवारों को उचित आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए।
छात्रों को स्टेडियम से हटाने का आरोप
रघुवर दास ने रांची जिला प्रशासन पर आंदोलन कर रहे छात्रों को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से जबरन हटाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि छात्र भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं। दास के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों पर दबाव बनाकर आंदोलन खत्म कराने की कोशिश लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ है।
प्रशासनिक अधिकारियों को दी चेतावनी
पूर्व मुख्यमंत्री ने आंदोलन के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के कथित रवैये पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन अधिकारियों को अपने करियर और भविष्य का भी ध्यान रखना चाहिए। दास ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ नागरिकों और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का सम्मान करना भी है।
छात्रों का मनोबल तोड़ने का लगाया आरोप
दास ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर दबाव बनाने की रणनीति का उद्देश्य छात्रों का मनोबल कमजोर करना और उन्हें आंदोलन समाप्त करने के लिए मजबूर करना था। उन्होंने इस कथित कार्रवाई की कड़ी निंदा की। भाजपा नेता ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों की चिंताओं को दबाने के बजाय सरकार को उनके सवालों का जवाब देना चाहिए और पारदर्शी जांच के जरिए विवाद का समाधान निकालना चाहिए।
आंदोलन को व्यापक समर्थन मिलने का दावा
रघुवर दास ने दावा किया कि छात्रों के इस आंदोलन को राज्य के करीब चार करोड़ लोगों का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने झारखंड सरकार को अहंकार से बचने की सलाह देते हुए कहा कि जनता ही सरकार को सत्ता में लाती है और जरूरत पड़ने पर सत्ता से बाहर भी कर सकती है। उनके इस बयान से साफ है कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन को भाजपा राजनीतिक मुद्दे के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
सीबीआई जांच की मांग पर टिकी निगाहें
अब सबकी नजर झारखंड सरकार के अगले कदम पर है। रघुवर दास ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि एक सप्ताह के भीतर सीबीआई जांच की सिफारिश नहीं की गई, तो वह भूख हड़ताल शुरू कर सकते हैं। दूसरी ओर, छात्र लगातार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध और बढ़ने की संभावना है। भर्ती परीक्षाओं की कथित अनियमितताओं और विधानसभा घेराव के दौरान हुए लाठीचार्ज का मुद्दा झारखंड की राजनीति में फिलहाल बड़ा विषय बना हुआ है।
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