Jharkhand News: शराब तस्करों की बढ़ेगी मुश्किलें, अवैध निर्माण और बिक्री रोकने के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल

रांची  झारखंड में अवैध शराब का कारोबार करने वालों की मुश्किलें बढ़ने वाली है। अब शराब माफिया की गतिविधियों पर जमीन के साथ आसमान से भी नजर रखने की तैयारी है। राज्य का उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए ड्रोन तकनीक का सहारा लेने की योजना बना रहा है। इसके लिए विभाग ने ड्रोन से निगरानी की तकनीक का प्रदर्शन करने के लिए कंपनियों को आमंत्रित किया है। प्रदर्शन के दौरान तकनीक की उपयोगिता और निगरानी की क्षमता का आकलन किया जाएगा। उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री योगेंद्र प्रसाद

Wrriten By :

Editor

Published On :

अक्टूबर 27, 2026

Advertisements
728x90-Pension-Mission-Shakti-Digital

रांची
 झारखंड में अवैध शराब का कारोबार करने वालों की मुश्किलें बढ़ने वाली है। अब शराब माफिया की गतिविधियों पर जमीन के साथ आसमान से भी नजर रखने की तैयारी है। राज्य का उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए ड्रोन तकनीक का सहारा लेने की योजना बना रहा है।

इसके लिए विभाग ने ड्रोन से निगरानी की तकनीक का प्रदर्शन करने के लिए कंपनियों को आमंत्रित किया है। प्रदर्शन के दौरान तकनीक की उपयोगिता और निगरानी की क्षमता का आकलन किया जाएगा।

उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि राज्य में अवैध शराब के कारोबार को पूरी तरह समाप्त करना सरकार का लक्ष्य है। इसके लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने की दिशा में पहल की जा रही है। ड्रोन से निगरानी की व्यवस्था अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हो सकती है।

जंगल और दुर्गम इलाकों में भी होगी निगरानी
राज्य के कई इलाकों में जंगलों, नदी किनारे और दुर्गम स्थानों पर अवैध शराब बनाने की शिकायतें मिलती रही हैं। ऐसे स्थानों तक पहुंचने में उत्पाद विभाग की टीम को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

728x90-Pension-Mission-Shakti-Digital

ड्रोन तकनीक से संदिग्ध गतिविधियों और स्थानों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। इससे छापेमारी की योजना बनाने और अवैध शराब के ठिकानों तक पहुंचने में आसानी होगी।

अवैध कारोबार पर रोक से सरकार और आम लोगों को फायदा
अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगने से सरकार को कई स्तरों पर लाभ होगा। अवैध बिक्री के कारण होने वाली राजस्व हानि कम हो सकती है। वैध दुकानों से शराब की बिक्री बढ़ने पर उत्पाद शुल्क से मिलने वाले राजस्व में वृद्धि की संभावना रहेगी।

वहीं, मिलावटी और जहरीली शराब की बिक्री रोकने से लोगों के स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा होगी। अवैध शराब से जुड़े आपराधिक नेटवर्क और तस्करी पर भी अंकुश लगेगा। इससे कानून-व्यवस्था मजबूत होने के साथ उत्पाद विभाग की प्रवर्तन कार्रवाई अधिक प्रभावी हो सकेगी।