झारखंड सरकार ने जारी की 30 नई क्लाइमेट-फ्रेंडली फसलें

 रांची  झारखंड सरकार ने राज्य के किसानों को बड़ी सौगात देते हुए 30 नई फसल किस्मों को जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। विभिन्न कृषि शोध संस्थानों द्वारा लगभग एक दशक (10 साल) तक लगातार किए गए कड़े अनुसंधान और वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद इन किस्मों को विकसित किया गया है। ये सभी फसलें उच्च उत्पादकता देने वाली, शीघ्र पकने वाली, रोग-कीट प्रतिरोधी, तनाव सहनशील और पूरी तरह से जलवायु अनुकूल (क्लाइमेट फ्रेंडली) हैं। झारखंड सरकार के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव अबूबकर सिद्दीकी पी. की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में आयोजित राज्य वेरायटी

Wrriten By :

Editor

Published On :

मई 28, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

 रांची

 झारखंड सरकार ने राज्य के किसानों को बड़ी सौगात देते हुए 30 नई फसल किस्मों को जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। विभिन्न कृषि शोध संस्थानों द्वारा लगभग एक दशक (10 साल) तक लगातार किए गए कड़े अनुसंधान और वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद इन किस्मों को विकसित किया गया है।

ये सभी फसलें उच्च उत्पादकता देने वाली, शीघ्र पकने वाली, रोग-कीट प्रतिरोधी, तनाव सहनशील और पूरी तरह से जलवायु अनुकूल (क्लाइमेट फ्रेंडली) हैं। झारखंड सरकार के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव अबूबकर सिद्दीकी पी. की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में आयोजित राज्य वेरायटी रिलीज कमेटी (एसवीआरसी) की बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगाई गई।

इस उच्च स्तरीय बैठक में विभाग के विशेष सचिव गोपाल तिवारी, बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (बीएयू) के कुलपति डाॅ. एससी दुबे, अनुसंधान निदेशक डाॅ. पीके सिंह, विभिन्न संस्थानों के निदेशक और प्रगतिशील किसान नकुल महतो व मीनू महतो सहित कई विज्ञानी उपस्थित थे।

किस संस्थान की कितनी किस्मों को मिली स्वीकृति?
इस बैठक में राज्य के अलग-अलग प्रतिष्ठित कृषि अनुसंधान संस्थानों द्वारा तैयार की गई फसलों को हरी झंडी दिखाई गई:

बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (बीएयू): वैज्ञानिकों द्वारा विकसित सबसे अधिक 10 किस्में शामिल हैं। इनमें सोयाबीन और गेहूं की दो-दो तथा मक्का, फलारू (एरियल याम), अरहर, चारा जई, चारा घास और सरसों की एक-एक किस्म है।
पलांडू केंद्र (ICAR-RCER): फार्मिंग सिस्टम रिसर्च सेंटर फॉर हिल एंड प्लेटो रीजन, पलांडू द्वारा विकसित 8 बागवानी और सब्जी किस्मों को मंजूरी मिली।
आईआईएबी रांची: भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएबी) की 4 आधुनिक धान किस्मों को विमोचन की स्वीकृति मिली।
आईएआरआई हजारीबाग: भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आइएआरआइ) हजारीबाग की 1 अरहर और 3 मक्का किस्मों के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही क्षेत्र विस्तार के लिए 2 अन्य फसलों को भी स्वीकृति मिली।
केंद्रीय वर्षा आधारित ऊपराऊं धान अनुसंधान केंद्र हजारीबाग: इस संस्थान द्वारा विकसित 2 विशेष धान किस्मों को भी हरी झंडी दिखाई गई।

जारी की गई प्रमुख फसलों की पूरी सूची
मंजूरी पाने वाली प्रमुख किस्मों के नाम इस प्रकार हैं:
धान: सीआर धान 110, सीआर धान 215, स्वर्ण मोहन धान, आईआईएबी धान 1, आईआईएबी धान 2, आईआईएबी धान 3 और आईआईएबी धान 4।
मक्का: बिरसा मक्का हाइब्रिड 1, भद्रिका मेज हाइब्रिड 1, भद्रिका मेज हाइब्रिड 2, भद्रिका क्वालिटी मेज हाइब्रिड 1 और शालीमार मेज हाइब्रिड 5।
गेहूं व सरसों: बिरसा गेहूं 5, बिरसा गेहूं 6 और बिरसा भारत सरसों 1।
दालें: बिरसा अरहर 3, वंशिका (अरहर) और पूसा अवंतिका (मसूर)।
सब्जियां व अन्य: स्वर्ण रत्न (टमाटर), स्वर्ण प्रफुल्य (मिर्च), स्वर्ण अतुल्य (शिमला मिर्च), स्वर्ण यामिनी (करेला), स्वर्ण सुगंधा (सब्जी सोयाबीन), स्वर्ण सुपर्णा (चौलाई साग), स्वर्ण निधि (सेम) और बिरसा कोंकण फलारू 1 (हवाई रतालू)।
चारा फसलें: बिरसा सोयाबीन 5, बिरसा सोयाबीन 6, बिरसा ओट 1 (चारा जई) और बिरसा दीनानाथ 1 (घास)।

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU) की 10 खास किस्में और उनकी खासियत
बीएयू के विज्ञानियों द्वारा तैयार की गई ये 10 किस्में झारखंड की मिट्टी और मौसम के लिहाज से गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं:

1. बिरसा मक्का हाइब्रिड 1 (डेवलपर: डाॅ. मणिगोपा चक्रवर्ती)
इस किस्म की उत्पादन क्षमता 70 से 73 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसमें 10 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। यह फसल खरीफ के मौसम में 93 दिनों में और रबी में 127 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। यह तनाव सहनशील है और इससे 376 क्विंटल हरा चारा व 103 क्विंटल सूखा चारा भी प्राप्त होता है।

2. बिरसा कोंकन फलारू (डेवलपर: डाॅ. शुभ्रांशु सेनगुप्ता)
यह झारखंड की पहली हवाई रतालू किस्म है जो 150 से 165 दिनों में तैयार होती है। इसकी बुलबिल उपज क्षमता 10 टन प्रति हेक्टेयर तक है।

3. बिरसा सोयाबीन 5 (डेवलपर: डाॅ. नूतन वर्मा)
इस किस्म में 41.5 प्रतिशत प्रोटीन और 17 प्रतिशत तेल की मात्रा होती है। यह 115 से 118 दिनों में तैयार होती है और इसकी उपज क्षमता 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जो मानक किस्मों से 28 प्रतिशत अधिक है।

4. बिरसा सोयाबीन 6 (डेवलपर: डाॅ. नूतन वर्मा)
यह किस्म मात्र 105 से 108 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसकी उत्पादन क्षमता 27 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसमें 39 प्रतिशत प्रोटीन और 20 प्रतिशत तेल की मात्रा पाई जाती है।

5. बिरसा अरहर 3 (डेवलपर: डाॅ. नीरज कुमार)
यह मध्यम अवधि (178 से 180 दिन) में तैयार होने वाली अरहर की बेहतरीन किस्म है। इसकी उपज क्षमता 21 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जो पुरानी मानक किस्मों की तुलना में 20 प्रतिशत ज्यादा उत्पादन देती है।

6. बिरसा ओट 1 (डेवलपर: डाॅ. योगेंद्र प्रसाद)
पशुपालकों के लिए विकसित यह चारा किस्म प्रति हेक्टेयर 420 क्विंटल हरा चारा और करीब 25.7 क्विंटल दाना उत्पादन देती है। बहु-कट (मल्टी-कट) प्रणाली के लिए उपयुक्त इस चारे में 10.8 प्रतिशत क्रूड प्रोटीन होता है।

7. बिरसा दीनानाथ 1 (डेवलपर: डाॅ. योगेंद्र प्रसाद)
यह एकल कट प्रणाली के लिए उपयुक्त चारा घास है, जिसकी उपज क्षमता 468 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसमें 8.4 प्रतिशत क्रूड प्रोटीन पाया जाता है।

8. बिरसा गेहूं 5 (डेवलपर: डाॅ. सूर्य प्रकाश)
इस गेहूं की उत्पादन क्षमता 53 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है और यह 106 से 109 दिनों में पक जाती. है। कुपोषण से लड़ने के लिए इसमें आयरन (42.5 पीपीएम) और जिंक (39.6 पीपीएम) की मात्रा काफी अधिक रखी गई है।

9. बिरसा गेहूं 6 (डेवलपर: डाॅ. सूर्य प्रकाश)
समय पर बुआई और सिंचित क्षेत्रों के लिए यह बेहद शानदार किस्म है, जिसकी उपज क्षमता लगभग 69 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। यह 120 दिनों में पकती है। इसमें 11.3 प्रतिशत प्रोटीन के साथ-साथ आयरन (42.5 पीपीएम) और जिंक (39.8 पीपीएम) प्रचुर मात्रा में मौजूद है।

10. बिरसा भारत सरसों 1 (डेवलपर: डाॅ. अरुण कुमार)
कम पानी या वर्षा आधारित मध्यम भूमि के लिए यह किस्म सर्वोत्तम है। यह 108 से 111 दिनों में तैयार होती है और इसमें 40.1 प्रतिशत तेल की मात्रा होती है। इसकी संभावित पैदावार 26.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है।

 

2