UP Politics: राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने बुधवार, 26 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे वक्त हुई है, जब उत्तर प्रदेश की सियासत में जयंत चौधरी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग लगातार तेज होती जा रही है।
PM मोदी से मुलाकात की जयंत ने दी जानकारी
जयंत चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा और मार्गदर्शन मिला। इनमें कृषि और स्किल कंपटीशन जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। जयंत चौधरी के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने नीतियों से जुड़े मामलों में क्रिएटिव थिंकिंग और गुड गवर्नेंस के लिए जनभागीदारी के प्रभाव पर भी जोर दिया। मुलाकात को ऐसे समय में अहम माना जा रहा है, जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं।
अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच क्यों बढ़ी सियासी तकरार?
जयंत चौधरी और अखिलेश यादव के बीच पिछले करीब दो सप्ताह से राजनीतिक बयानबाजी जारी है। हाल ही में अखिलेश यादव ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के बीच संभावित सीट बंटवारे को लेकर टिप्पणी की थी। इसमें उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल के हिस्से में 73 सीटें आने की बात कही थी। अखिलेश यादव की इस टिप्पणी के बाद दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी और तेज हो गई। RLD की भूमिका और आगामी चुनाव में सीटों को लेकर भी राजनीतिक चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।
‘चवन्नी’ वाले बयान पर जयंत चौधरी ने किया पलटवार
अखिलेश यादव की ओर से की गई ‘चवन्नी’ वाली टिप्पणी पर जयंत चौधरी ने भी तीखा जवाब दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर सियासी लड़ाई में कुछ सस्ते शब्दों का इस्तेमाल करना ही था, तो उनका नाम लेकर सीधे कहा जा सकता था। जयंत चौधरी ने जाट समाज को लेकर की गई टिप्पणी पर भी नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें इस तरह के अहंकार का अनुभव पहले भी हुआ है और उनका मानना है कि ऐसा आचरण आखिरकार राजनीतिक पतन की ओर ले जाता है।
जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव पर कसा था तंज
जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए कहा था कि उन्हें राष्ट्रीय लोकदल की सीटों की चिंता करने के बजाय दूसरे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा था कि उन्हें गुलाब जामुन और रसगुल्ले की कीमत की चिंता है, लेकिन गन्ना किसानों की नहीं। उन्होंने गाड़ी के माइलेज को लेकर भी तंज कसा और कहा कि देश की ऊर्जा स्वाधीनता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। जयंत के इन बयानों के बाद सपा और RLD के बीच राजनीतिक दूरी और ज्यादा स्पष्ट नजर आने लगी।
2022 में सपा के साथ था RLD, 2024 में NDA में हुआ शामिल
राष्ट्रीय लोकदल ने 2022 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में लड़ा था। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी ने बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा बनने का फैसला किया। इसके बाद से अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के राजनीतिक रिश्तों में दूरी दिखाई देती रही है।
NDA में शामिल होने से कुछ महीने पहले जब जयंत चौधरी के अखिलेश यादव का साथ छोड़ने की अटकलें चल रही थीं, तब उन्होंने बयान दिया था कि वह ‘चवन्नी’ नहीं हैं जो पलट जाएं। बाद में जब RLD ने बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन का साथ थाम लिया, तो समाजवादी पार्टी की ओर से इसी पुराने बयान को लेकर लगातार तंज किए जाते रहे।
PM मोदी-जयंत मुलाकात के बीच यूपी की सियासत में बढ़ी हलचल
अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जयंत चौधरी की ताजा मुलाकात ने उत्तर प्रदेश की सियासत में चर्चाओं को और हवा दे दी है। एक ओर अखिलेश यादव लगातार RLD और जयंत चौधरी पर राजनीतिक हमले कर रहे हैं, वहीं जयंत चौधरी एनडीए के साथ अपनी राजनीतिक भूमिका को आगे बढ़ाते नजर आ रहे हैं। ऐसे में PM मोदी से जयंत चौधरी की मुलाकात को कृषि, कौशल विकास और सुशासन जैसे मुद्दों के साथ-साथ मौजूदा राजनीतिक माहौल के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में अखिलेश और जयंत के बीच जारी जुबानी जंग किस दिशा में जाती है, इस पर भी राजनीतिक नजरें टिकी हैं।










