Jauhar University Row: रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ प्रस्तावित बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि शिक्षा के किसी संस्थान पर बुलडोजर चलाना छात्रों और देश के युवाओं के भविष्य को तबाह करने जैसा है। मसूद ने तर्क दिया कि यदि यूनिवर्सिटी के भवनों के नक्शों में कोई तकनीकी कमी है, तो प्रशासन के पास ‘कम्पाउंडिंग’ (जुर्माना भरकर नियमितीकरण) जैसे कानूनी रास्ते खुले हैं। सीधा बुलडोजर चलाना किसी भी सभ्य समाज में न्यायसंगत नहीं है।
राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
सांसद इमरान मसूद ने इस पूरी कार्रवाई को सीधे तौर पर आजम खान के प्रति राजनीतिक विद्वेष का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार को आजम खान से आपत्ति हो सकती है, लेकिन एक ऐसे संस्थान को खत्म करना जहां हजारों छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, पूरी तरह से अनुचित है। मसूद ने पूछा कि जब प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों ही देश में ‘शिक्षा बचाओ, शिक्षा पढ़ाओ’ का नारा देते हैं, तो फिर शिक्षा के इन मंदिरों को ध्वस्त करने का आदेश क्यों दिया जा रहा है? उन्होंने कहा कि एक यूनिवर्सिटी को खड़ा करने में दशकों की मेहनत लगती है, जिसे कुछ ही घंटों में मिटाना विनाशकारी है।
सांप्रदायिक चश्मे से देखने वालों को लगाई कड़ी फटकार
इमरान मसूद ने इस संवेदनशील मसले को सांप्रदायिक चश्मे से देखने वालों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने जोर देकर कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी का मुद्दा सिर्फ एक समुदाय या एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के शैक्षणिक ढांचे पर हमला है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के 40 में से 38 भवनों को ढहाने की योजना सरकार के ‘बदले की राजनीति’ को दर्शाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर चुप्पी साधने के बजाय सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर आकर आवाज उठानी चाहिए।
न्यायपालिका से स्वतः संज्ञान लेने की अपील
कांग्रेस सांसद ने अपनी बात दोहराते हुए सभी विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर खुलकर बोलने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा है कि एक सक्रिय शिक्षण संस्थान को केवल व्यक्तिगत राजनीतिक दुश्मनी के चलते जमींदोज किया जा रहा है। मसूद ने अंत में देश की सर्वोच्च न्यायपालिका यानी हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वे इस मामले का ‘स्वतः संज्ञान’ (Suo Motu) लें और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए तुरंत हस्तक्षेप करें।










