Japan PM India Visit : जापान की नवनियुक्त प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची अपनी तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर 1 जुलाई से 3 जुलाई तक भारत में हैं। पदभार संभालने के बाद यह उनकी भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच भविष्य के कूटनीतिक संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित होगी। इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ताकाइची गुरुवार को 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगी। इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता होगी, जिसमें व्यापार, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक दोनों देशों की ‘विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी’ को और अधिक सुदृढ़ करेगी।
आर्थिक सुरक्षा और चीन पर कूटनीतिक रुख
शिखर सम्मेलन के समापन पर दोनों देश ‘आर्थिक सुरक्षा’ के मुद्दे पर एक ऐतिहासिक संयुक्त घोषणा जारी करेंगे। हालांकि, इस घोषणा में किसी देश विशेष का नाम नहीं लिया जाएगा, लेकिन इसमें ‘आर्थिक जबरदस्ती’ (Economic Coercion) की स्पष्ट और कड़े शब्दों में निंदा की जाएगी। यह कदम हाल के दिनों में चीन द्वारा जापान और अन्य पड़ोसी देशों के खिलाफ अपनाई गई नीतियों के मद्देनजर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गौरतलब है कि ताकाइची ने पहले भी ताइवान के प्रति चीन के आक्रामक रवैये पर कड़ा रुख अपनाया है, जिसके चलते चीन ने उन पर और जापानी संस्थानों पर कड़े निर्यात नियंत्रण लागू किए हैं। यह संयुक्त घोषणा अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत और जापान की एकजुटता को दर्शाएगी।
एआई और डिजिटल तकनीक में भविष्य की साझेदारी
शिखर सम्मेलन के एजेंडे में ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ (AI) में सहयोग सबसे प्रमुख है। भारत और जापान एक दीर्घकालिक एआई सहयोग ढांचे को संस्थागत रूप देने के लिए एक रोडमैप तैयार करेंगे। इस पहल के तहत दोनों देशों के प्रमुख अनुसंधान संस्थान, तकनीकी विश्वविद्यालय और निजी कंपनियां मिलकर बहुभाषी और क्षेत्र-विशिष्ट एआई सिस्टम विकसित करेंगी। इसके अलावा, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर निर्माण और डेटा सेंटर जैसी डिजिटल बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवा और मोबिलिटी (गतिशीलता) जैसे क्षेत्रों के लिए संयुक्त एआई समाधान विकसित करना इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य होगा, जिससे वैश्विक तकनीक बाजार में दोनों देशों का दबदबा बढ़ेगा।
ऊर्जा सुरक्षा और मानव संसाधन का आदान-प्रदान
ऊर्जा सुरक्षा इस यात्रा का एक और महत्वपूर्ण स्तंभ है। दोनों राष्ट्र वैश्विक ऊर्जा बाजार में आने वाली संभावित बाधाओं से अपनी अर्थव्यवस्थाओं को सुरक्षित रखने के लिए एलएनजी (LNG) भंडारण में सहयोग और ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने पर विचार करेंगे। इसके साथ ही, टोक्यो से एक सकारात्मक संकेत यह मिल रहा है कि वह 2030 तक करीब 500 उच्च कुशल भारतीय आईटी पेशेवरों को जापान में काम करने के अवसर प्रदान करने की सुविधा दे सकता है। यह कदम भारत की युवा शक्ति और जापान की तकनीकी जरूरतों के बीच एक सेतु का काम करेगा, जो भविष्य में दोनों देशों के बीच पेशेवर जुड़ाव को और प्रगाढ़ बनाएगा।
औद्योगिक विकास और कनेक्टिविटी पर केंद्रित रणनीति
निवेश और नवाचार के माध्यम से आर्थिक विकास को नई गति देने के लिए महत्वपूर्ण खनिजों और सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला पर विशेष चर्चा होगी। समुद्री सुरक्षा और रक्षा तकनीकी सहयोग के साथ-साथ, बंगाल की खाड़ी को पूर्वोत्तर भारत से जोड़ने वाली एक विशाल ‘औद्योगिक मूल्य शृंखला’ के विकास पर भी सहमति बन सकती है। प्रधानमंत्री ताकाइची भारत-जापान बिजनेस फोरम में भी शिरकत करेंगी, जहाँ ओडिशा में प्रस्तावित ग्रीन अमोनिया परियोजना और बायोगैस क्षेत्र में सहयोग के प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। ये परियोजनाएं न केवल भारत के औद्योगिक विकास को गति देंगी, बल्कि टिकाऊ और स्वच्छ ऊर्जा के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को भी प्रदर्शित करेंगी।
द्विपक्षीय व्यापार और रणनीतिक साझेदारी की मजबूती
जापान वर्तमान में भारत का पांचवां सबसे बड़ा निवेशक है। मार्च 2026 तक भारत में जापान का संचयी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 48.17 अरब डॉलर के प्रभावशाली आंकड़े को छू चुका है। देश में करीब 1,500 जापानी कंपनियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं और द्विपक्षीय व्यापार 27 अरब डॉलर को पार कर गया है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल जैसी परियोजनाएं दोनों देशों के बीच गहरे भरोसे की मिसाल हैं। ‘मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए यह यात्रा मील का पत्थर मानी जा रही है। पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा के दौरान घोषित ‘अगले दशक के लिए जापान-भारत साझा दृष्टि’ को आगे बढ़ाते हुए, यह शिखर सम्मेलन दोनों देशों की साझेदारी को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा। शुक्रवार को प्रधानमंत्री ताकाइची अपने टोक्यो वापसी से पहले इस ऐतिहासिक दौरे का समापन करेंगी।
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