Sonam Wangchuk Health Update: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) का विरोध-प्रदर्शन मंगलवार को 11वें दिन भी पूरी तीव्रता के साथ जारी है। सीजेपी नीट समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित धांधली के विरोध में सड़कों पर उतरी है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भारी पुलिस बल की तैनाती कर उनके समर्थकों और कोर टीम के सदस्यों को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोका जा रहा है। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर दिपके ने दावा किया कि पुलिस न केवल लोगों को जंतर-मंतर तक आने से रोक रही है, बल्कि सार्वजनिक परिवहन और आवाजाही के साधनों में भी बाधा उत्पन्न की जा रही है। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे दमनकारी कार्रवाई करार दिया है।
डबल इंजन-डबल लीक
अभिजीत दिपके ने इस आंदोलन को और धार देते हुए राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल की परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने का मामला उठाया। उन्होंने भाजपा सरकार को निशाने पर लेते हुए कटाक्ष किया कि “डबल इंजन सरकार का मतलब डबल लीक” हो गया है। दिपके ने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था परीक्षा प्रणाली को सुचारु रूप से संचालित करने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। उन्होंने तर्क दिया कि जब सरकार निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से परीक्षाएं कराने में सक्षम नहीं है, तो उसे सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। यह बयान परीक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार और युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ पर पार्टी के कड़े रुख को दर्शाता है।
सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत
आंदोलन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है। पिछले रविवार से भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक का ब्लड शुगर लेवल गिरकर 66 तक पहुँच गया है। सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि वांगचुक के स्वास्थ्य को कोई गंभीर नुकसान होता है, तो उसकी सीधी जिम्मेदारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की होगी। वांगचुक ने पूर्व में भी सरकार से बल प्रयोग के बजाय संवेदनशीलता दिखाने की अपील की थी और चेतावनी दी थी कि शासन का ऐसा रवैया जनता का भरोसा खत्म कर रहा है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की अपनी मांग पर अडिग रहने का निर्णय लिया है।
आईसा के छात्रों का अनशन
प्रदर्शन के इस कारवां में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आईसा) के छह छात्र नेता भी जुड़ गए हैं, जो लगातार तीसरे दिन से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इसमें नेहा, दानिश, मनीष, दीपक, ऋषिकेश और आमीन जैसे युवा चेहरे शामिल हैं, जो देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। गौरतलब है कि 20 जून से शुरू हुआ यह आंदोलन अब नीट परीक्षा अनियमितताओं से ऊपर उठकर एक बड़े छात्र जनांदोलन का रूप ले चुका है। शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहा यह धरना प्रदर्शन अब सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर रहा है। सरकार की चुप्पी और छात्रों का बढ़ता आक्रोश किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की ओर इशारा कर रहा है।










