Jamshedpur News: जहरीला हुआ स्वर्णरेखा नदी का पानी, हजारों मछलियों की तड़पकर मौत

जमशेदपुर की स्वर्णरेखा नदी में हजारों मछलियों की मौत से इलाके में हड़कंप मच गया। पानी की जांच में ऑक्सीजन कम और जहरीले तत्व अधिक होने का खुलासा हुआ।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अप्रैल 4, 2026

Jamshedpur News: झारखंड के जमशेदपुर में स्वर्णरेखा नदी किनारे हजारों मछलियों के मृत पाए जाने से इलाके में हड़कंप मच गया। यह दृश्य स्थानीय लोगों के लिए बेहद हैरान करने वाला था। सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों की संख्या में मछलियों की मौत ने पर्यावरण और प्रशासन दोनों को चिंता में डाल दिया है।

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जांच रिपोर्ट का खुलासा

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जहरीला हुआ स्वर्णरेखा नदी का पानी

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच रिपोर्ट में सामने आया कि नदी के पानी में ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम हो गया था। साथ ही जहरीले तत्वों की मात्रा बढ़ गई थी। यही कारण मछलियों की सामूहिक मौत का मुख्य कारण बना।

गंदे पानी और औद्योगिक अपशिष्ट का असर

जांच में यह भी पाया गया कि शहर के कई इलाकों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे नदी में गिर रहा है। बस्तियों का सीवेज और औद्योगिक इकाइयों का रसायनयुक्त अपशिष्ट बिना किसी ट्रीटमेंट के नदी में छोड़ा जा रहा है। इससे नदी का पानी लगातार प्रदूषित हो रहा है और जलीय जीवों के लिए खतरा बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से जारी है।

शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं

लोगों ने बताया कि नदी के दूषित होने को लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। नतीजतन हालात बिगड़ते चले गए और अब हजारों मछलियों की मौत हो गई। लोगों ने प्रशासन से दोषियों पर सख्त कार्रवाई और नदी की सफाई की मांग की है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते नदी में गिरने वाले गंदे पानी पर रोक नहीं लगाई गई, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है। इससे न केवल जलीय जीवन खत्म होगा बल्कि आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ेगा।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दी है। प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों की पहचान कर कार्रवाई की बात कही गई है। साथ ही नदी की सफाई और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए कदम उठाने की तैयारी की जा रही है।

स्वर्णरेखा नदी में हजारों मछलियों की मौत ने पर्यावरण प्रदूषण की गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है। यह घटना दिखाती है कि औद्योगिक अपशिष्ट और सीवेज का बिना ट्रीटमेंट नदी में गिरना कितना खतरनाक हो सकता है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह न केवल जलीय जीवन बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा साबित होगा।

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