Jammu Kashmir Landslide: जम्मू-कश्मीर के पुंछ और राजौरी जिले इन दिनों कुदरत के कहर का सामना कर रहे हैं। भारी बारिश के कारण आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन (लैंडस्लाइड) ने जन-जीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। अब तक प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, इस त्रासदी में 10 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई अन्य के मलबे में दबे होने की आशंका है। प्रशासन और राहत एजेंसियां युद्ध स्तर पर बचाव कार्य में जुटी हैं।
पुलस्त्य नदी का रौद्र रूप
पुंछ जिले में बारिश का असर सबसे अधिक देखने को मिला है। जिले की पुलस्त्य नदी उफान पर है, जिसके तेज बहाव में कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान और वाहन बह गए। सुरनकोट तहसील के संगलेयानी गांव में एक मकान गिरने की हृदयविदारक घटना में एक 18 वर्षीय युवक की मौत हो गई, जबकि अन्य लोग मलबे में फंस गए। शुरुआती आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सुरनकोट में 9 और हवेली में 1 व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है। हवेली में कम से कम 7 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं और मंडी क्षेत्र में भी भारी संपत्ति का नुकसान हुआ है।
भूस्खलन के कारण जिले के मुख्य सड़क मार्ग पूरी तरह से बंद हो गए हैं, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय प्रशासन ने चेतावनी दी है कि मलबे के नीचे दबे लोगों की संख्या के आधार पर मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है।
प्रशासन की सक्रियता और राहत कार्य
इस संकट की घड़ी में सरकार ने मोर्चा संभाल लिया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पुंछ में हुई जान-माल की क्षति पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि एसडीआरएफ (SDRF), पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियां दिन-रात बचाव अभियान चला रही हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने दिल्ली से वापस जम्मू लौटने का निर्णय लिया है ताकि राहत कार्यों का व्यक्तिगत रूप से समन्वय कर सकें। उन्होंने प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
वहीं, उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने राजौरी और पुंछ के हालातों की समीक्षा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि सिविल प्रशासन, सेना और स्थानीय स्वयंसेवक जमीन पर सक्रिय हैं। उप-राज्यपाल ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए और आपातकालीन टीमें किसी भी स्थिति से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर रहें। उन्होंने निवासियों से धैर्य रखने और आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
आपदा प्रबंधन के समक्ष चुनौतियां
भारी बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बना हुआ है, जो बचाव कार्यों में सबसे बड़ी बाधा है। सड़कों के कटने से प्रभावित इलाकों में पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो गया है। सरकार ने सभी विभागों को समन्वय के साथ काम करने और मरम्मत कार्य को प्राथमिकता देने को कहा है। फिलहाल, प्राथमिकता मलबे में दबे लोगों को खोजने और विस्थापित परिवारों को भोजन, आश्रय व चिकित्सा सहायता प्रदान करने की है। यह आपदा जम्मू-कश्मीर के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है, जहाँ प्रशासन के सामने मानसून के दौरान जन-हानि रोकने का दबाव बढ़ गया है।
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