SFI Opposes RSS Centenary Event: यूनिवर्सिटी या अखाड़ा? जामिया में संघ के कार्यक्रम पर छात्रों का भीषण प्रदर्शन!

दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में RSS के 'युवा कुंभ' कार्यक्रम को लेकर भारी बवाल शुरू हो गया है। AISA और SFI जैसे छात्र संगठनों ने कैंपस के 'संघीकरण' का आरोप लगाते हुए FET ऑडिटोरियम के बाहर जमकर नारेबाजी की। विरोध के कारण सुबह 10:30 बजे प्रस्तावित यह कार्यक्रम शुरू नहीं हो सका, जिससे पूरे परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 28, 2026

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SFI Opposes RSS Centenary Event: देश की राजधानी दिल्ली का प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, एक बार फिर छात्र राजनीति के अखाड़े में तब्दील हो गया है। मंगलवार को विश्वविद्यालय के FET ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा आयोजित ‘युवा कुंभ’ कार्यक्रम को लेकर परिसर में जबरदस्त तनाव देखने को मिला। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और अन्य वामपंथी छात्र संगठनों ने इस आयोजन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, जिसके चलते प्रस्तावित कार्यक्रम अपने निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो सका।

परिसर में हंगामा और विरोध प्रदर्शन की वर्तमान स्थिति

मंगलवार सुबह से ही जामिया के गेट और ऑडिटोरियम के बाहर भारी संख्या में छात्र जमा होने लगे। पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार, कार्यक्रम सुबह 10:30 बजे शुरू होना था, लेकिन प्रदर्शनकारियों की नारेबाजी और विरोध के कारण स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। हालांकि प्रशासन की ओर से कार्यक्रम के आधिकारिक स्थगन (Postponement) की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन छात्रों के कड़े प्रतिरोध ने आयोजन की संभावनाओं पर फिलहाल प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।

RSS के शताब्दी वर्ष आयोजन

यह विवाद RSS के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित ‘युवा कुंभ’ को लेकर है। प्रदर्शनकारी संगठन AISA का आरोप है कि इस तरह के आयोजनों के माध्यम से विश्वविद्यालय परिसरों में एक खास राजनीतिक विचारधारा को जबरन थोपने की कोशिश की जा रही है। छात्रों का तर्क है कि शैक्षणिक संस्थानों का उपयोग किसी भी संगठन के प्रचार-प्रसार के लिए नहीं होना चाहिए, विशेषकर तब जब वह संगठन विवादों के केंद्र में रहा हो।

जामिया प्रशासन के रुख पर उठाए तीखे सवाल

छात्र संगठनों ने जामिया प्रशासन के रुख पर भी तीखे सवाल उठाए हैं। AISA द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि जहां एक ओर प्रशासन छात्रों के लोकतांत्रिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों पर पाबंदी लगाता है, वहीं दूसरी ओर संघ को मंच उपलब्ध कराना ‘दोहरे मापदंड’ को दर्शाता है। छात्रों का दावा है कि किसी भी सामान्य छात्र संगठन को इस तरह के बड़े आयोजनों की अनुमति आसानी से नहीं मिलती, जबकि RSS को कैंपस में जगह देना सांप्रदायिक एजेंडे को बढ़ावा देने जैसा है।

AISA को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया का समर्थन मिला

इस विरोध प्रदर्शन में AISA को स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) का भी पुरजोर समर्थन मिला है। SFI ने एक बयान जारी कर कहा कि जामिया के छात्र विश्वविद्यालय के ‘संघीकरण’ (Saffronization) के खिलाफ एकजुट हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जामिया जैसी पब्लिक यूनिवर्सिटी का इस्तेमाल नफरत और विभाजनकारी राजनीति के लिए नहीं किया जाना चाहिए। छात्र संगठनों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम देश की आजादी और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की विरासत को कमजोर करते हैं, जिसे वे स्वीकार नहीं करेंगे।

सांप्रदायिकता बनाम शैक्षणिक स्वायत्तता की जंग

कुल मिलाकर, जामिया में चल रहा यह बवाल केवल एक कार्यक्रम का विरोध नहीं है, बल्कि यह सांप्रदायिकता बनाम शैक्षणिक स्वतंत्रता की एक बड़ी वैचारिक लड़ाई का रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने साफ कर दिया है कि वे कैंपस में किसी भी ऐसी ताकत को प्रवेश नहीं करने देंगे जो उनके अनुसार हिंसा और नफरत की राजनीति को बढ़ावा देती हो। फिलहाल, पूरा कैंपस पुलिस और सुरक्षा बलों की निगरानी में है और विश्वविद्यालय प्रशासन इस गतिरोध को सुलझाने की कोशिश कर रहा है।

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