NCERT: ‘आइडियोलॉजिकल वायरस’ से किताबों को नुकसान! NCERT मुद्दे पर भड़की कांग्रेस

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने NCERT किताबों में न्यायपालिका पर विवादित सामग्री को लेकर पीएम मोदी पर 'नकली गुस्सा' दिखाने का आरोप लगाया है। उन्होंने इसे आरएसएस प्रेरित 'वैचारिक वायरस' और डैमेज कंट्रोल की कवायद बताया। इधर, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गलती स्वीकारते हुए विवादित किताबें वापस लेने और दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

फ़रवरी 27, 2026

NCERT: नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) की कक्षा 8 की किताब में न्यायपालिका के खिलाफ विवादित सामग्री को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया को “डैमेज कंट्रोल” करार देते हुए आरोप लगाया है कि यह सब एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

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प्रधानमंत्री का ‘नकली गुस्सा’ और डैमेज कंट्रोल की कोशिश

बताते चले कि, जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक कड़ा पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि NCERT की किताबों में न्यायपालिका की आलोचना पर प्रधानमंत्री जो नाराजगी दिखा रहे हैं, वह महज एक दिखावा है। जयराम रमेश के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में शिक्षा प्रणाली में जो बदलाव किए गए हैं, वे अनजाने में हुई चूक नहीं बल्कि “एक सिस्टमैटिक कैंपेन” का हिस्सा हैं। उन्होंने पीएम पर “एकेडमिक झोलाछाप डॉक्टरों” के एक नेटवर्क को संरक्षण देने का आरोप लगाया, जिन्होंने टेक्स्टबुक्स में “वैचारिक वायरस” (Ideological Virus) भरकर छात्रों के भविष्य और देश की शिक्षा व्यवस्था को गहरा नुकसान पहुँचाया है।

आरएसएस और नागपुर कम्युनल इकोसिस्टम पर सीधा प्रहार

कांग्रेस नेता ने इस विवाद की जड़ों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जोड़ते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने खुद “नागपुर कम्युनल इकोसिस्टम” को किताबों के पुनर्लेखन के लिए दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब किताबों की सामग्री ने सुप्रीम कोर्ट को नाराज कर दिया, तो अब प्रधानमंत्री का उससे पल्ला झाड़ना “दोगलापन” है। रमेश ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट को इस बात की गहन जांच करनी चाहिए कि आखिर कैसे और किन परिस्थितियों में टेक्स्टबुक्स को राजनीतिक ध्रुवीकरण और व्यक्तिगत हिसाब-किताब का जरिया बनाया गया।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का खेद और किताबों को वापस लेने का निर्देश

इस बीच, विवाद बढ़ता देख केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सरकार का पक्ष रखा है। उन्होंने कक्षा 8 की सोशल साइंस की किताब में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” नामक सब-चैप्टर के शामिल होने पर गहरा अफ़सोस जताया। प्रधान ने स्पष्ट किया कि जैसे ही उन्हें इस मामले की जानकारी मिली, उन्होंने तुरंत NCERT को उन सभी किताबों को बाजार से वापस लेने और उन्हें रद्द करने का निर्देश दे दिया है। उन्होंने कहा, “हमारा न्यायपालिका का अपमान करने का कोई इरादा नहीं है और जिस किसी ने भी यह गैर-जिम्मेदाराना अध्याय जोड़ा है, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

सुप्रीम कोर्ट का कारण बताओ नोटिस और सख्त चेतावनी

यह मामला तब गरमाया जब सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा मंत्रालय के सचिव और NCERT के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी को “कारण बताओ नोटिस” जारी किया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस सामग्री पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे न्याय प्रशासन में सीधा दखल माना। कोर्ट ने टेक्स्टबुक के उस विशेष हिस्से पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि NCERT ने इस पर माफी मांगी है, लेकिन अदालत ने कार्रवाई रोकने से इनकार करते हुए चेतावनी दी है कि नियमों की अनदेखी करने पर अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई की जाएगी।

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