Parliament Ruckus: संसद के हंगामे पर जगदंबिका पाल सख्त, सदन की बर्बादी और करोड़ों का नुकसान

बजट सत्र के दोबारा शुरू होते ही संसद में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होने पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सदन चलाना विपक्ष की भी जिम्मेदारी है और शोर-शराबे से केवल देश का नुकसान हो रहा है। क्या है बर्बादी का पूरा आंकड़ा?

Parliament Ruckus

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 9, 2026

Parliament Ruckus: लोकसभा में जारी गतिरोध और विपक्षी सांसदों के हंगामे पर पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। सदन की कार्यवाही में बार-बार हो रहे व्यवधान पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने आंकड़ों के जरिए देश को बताया कि संसद चलाने में जनता का कितना पैसा खर्च होता है। पाल ने स्पष्ट किया कि सदन चलाने में प्रति घंटा लगभग 1.5 करोड़ रुपये का खर्च आता है। अगर इसे मिनटों में बांटें, तो संसद के एक-एक मिनट की कीमत 2.5 लाख रुपये है। पूरे दिन की कार्यवाही का बजट लगभग 9 करोड़ रुपये बैठता है। उन्होंने सांसदों को चेतावनी दी कि उनका गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार हर दिन जनता की गाढ़ी कमाई के 9 करोड़ रुपये बर्बाद कर रहा है।

विपक्ष का दोहरा रवैया: अविश्वास प्रस्ताव और स्पीकर की अनुपस्थिति पर रार

जगदंबिका पाल ने विपक्षी सदस्यों को समझाते हुए उनके आचरण पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक तरफ विपक्ष ने माननीय लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है, और दूसरी तरफ वे चाहते हैं कि स्पीकर सदन में आएं भी नहीं। पाल ने इसे ‘राजनीतिक एजेंडा’ करार देते हुए कहा कि स्पीकर सदन के कस्टोडियन (संरक्षक) होते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि अविश्वास प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है और जिस सांसद ने इसे पेश किया है, उन्हें बोलने की अनुमति भी दी गई है। इसके बावजूद, चर्चा करने के बजाय हंगामा करना समझ से परे है।

सदन चलाने की चुनौती: सरकार तैयार, पर विपक्ष का ‘अपरिपक्व’ व्यवहार

पीठासीन अधिकारी ने सदन में मौजूद सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि देश देख रहा है कि कौन सदन चलाना चाहता है और कौन नहीं। उन्होंने सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए कहा कि सत्ता पक्ष चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन विपक्ष की ओर से लगातार बाधा डाली जा रही है। जगदंबिका पाल ने इस व्यवहार को ‘अपरिपक्व’ और ‘गैर-जिम्मेदाराना’ बताया। उन्होंने कहा कि सांसदों को यह समझना चाहिए कि सदन चर्चा और संवाद का मंच है, न कि केवल शोर-शराबे का। चर्चा से भागना और कार्यवाही रोकना लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ है।

जनता का पैसा और जवाबदेही: करोड़ों की बर्बादी पर तीखे सवाल

सदन में हंगामे के बीच जगदंबिका पाल ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि यह पैसा किसी पार्टी का नहीं, बल्कि देश की जनता का है। उन्होंने कहा कि टैक्सपेयर्स के पैसे का इस तरह से दुरुपयोग करना बेहद दुखद है। “आप क्या चाहते हैं? आप चर्चा भी नहीं कर रहे और सदन को बाधित कर रहे हैं,” पाल ने सांसदों से सीधे सवाल पूछे। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करना हर सदस्य की जिम्मेदारी है। अविश्वास प्रस्ताव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीरता से बात करने के बजाय सदन को ठप करना जनता के साथ विश्वासघात के समान है।

कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित: अंतहीन हंगामे का नतीजा

जगदंबिका पाल के काफी समझाने-बुझाने और बार-बार अपील करने के बाद भी जब विपक्षी सदस्यों का हंगामा शांत नहीं हुआ, तो अंततः सदन की कार्यवाही को अगले दिन तक के लिए स्थगित करना पड़ा। सदन में स्थिति इतनी अनियंत्रित हो गई थी कि सामान्य विधायी कार्य कर पाना असंभव हो गया था। स्थगन की घोषणा के साथ ही आज के करोड़ों रुपये बिना किसी परिणाम के बर्बाद हो गए। अब सबकी नजरें कल की कार्यवाही पर टिकी हैं कि क्या अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हो पाएगी या ‘अपरिपक्व व्यवहार’ की भेंट एक और दिन चढ़ जाएगा।

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