Israel vs Iran: मध्य पूर्व में गहराते युद्ध के बादलों के बीच इजरायल ने ईरान को बेहद सख्त और सीधा संदेश दिया है। इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सआर ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि लेबनान में जारी सैन्य संघर्ष और वहां संभावित युद्धविराम (Ceasefire) को लेकर ईरान का कोई हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह बयान उस समय आया है जब वैश्विक शक्तियां क्षेत्र में शांति बहाली की कोशिशों में जुटी हैं, लेकिन इजरायल अपने रणनीतिक हितों से समझौता करने के मूड में नहीं दिख रहा है।
मोजतबा खामेनेई को संबोधित करते हुए इजरायली चेतावनी
इजरायली विदेश मंत्री का यह बयान विशेष रूप से ईरान के सर्वोच्च नेता के संभावित उत्तराधिकारी मोजतबा खामेनेई को लक्ष्य करके दिया गया है। मोजतबा खामेनेई वर्तमान में ईरान की क्षेत्रीय राजनीति और ‘रेजिस्टेंस एक्सिस’ के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इजरायल ने स्पष्ट कर दिया है कि वह लेबनान की नियति का फैसला किसी बाहरी ताकत, विशेषकर ईरान के हाथों में नहीं छोड़ने वाला है। सआर ने तेहरान को चेतावनी देते हुए कहा कि लेबनान की सीमाएं और वहां की शांति शर्तें केवल इजरायल की सुरक्षा प्राथमिकताओं के आधार पर तय होंगी।
कमजोर होता हिजबुल्लाह और ईरान का घटता प्रभाव
गिदोन सआर के मुताबिक, इजरायली रक्षा बलों (IDF) की निरंतर और आक्रामक सैन्य कार्रवाई के कारण लेबनान स्थित आतंकी संगठन हिजबुल्लाह की कमर टूट चुकी है। इजरायल का मानना है कि हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमता में गिरावट का सीधा अर्थ लेबनान की धरती पर ईरान के दशकों पुराने प्रभाव का अंत होना है। इजरायली विदेश मंत्री ने आगाह किया कि यदि ईरान को युद्धविराम की तारीख या शर्तें तय करने की छूट दी गई, तो यह एक ‘बड़ी रणनीतिक गलती’ साबित होगी। उनके अनुसार, इससे ईरान को अपनी खोई हुई ताकत फिर से बटोरने और हिजबुल्लाह को पुनर्जीवित करने का अवसर मिल जाएगा।
सीजफायर के दायरे को लेकर बढ़ता कूटनीतिक विवाद
लेबनान को युद्धविराम के दायरे में शामिल करने को लेकर इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच गहरा मतभेद बना हुआ है। वर्तमान में एक तकनीकी सीजफायर की स्थिति तो है, लेकिन इजरायल और अमेरिका का तर्क है कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं हो सकता। उनका कहना है कि हिजबुल्लाह जैसे सक्रिय और सशस्त्र संगठनों की मौजूदगी के कारण वहां सैन्य अभियान जारी रखना अनिवार्य है। इजरायल का मुख्य उद्देश्य अपनी उत्तरी सीमा को पूरी तरह सुरक्षित करना है, जिसके लिए वह हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे को जड़ से मिटाना चाहता है।
ईरान की जवाबी दलील: ‘रेजिस्टेंस एक्सिस’ का अटूट हिस्सा
दूसरी ओर, ईरान लेबनान को किसी भी शांति वार्ता से अलग रखने के विचार का कड़ा विरोध कर रहा है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बगेर गालिबफ ने जोर देकर कहा है कि लेबनान और ‘रेजिस्टेंस एक्सिस’ ईरान के रणनीतिक सहयोगी हैं। ईरान का रुख स्पष्ट है कि जब तक लेबनान को समझौते में उचित स्थान नहीं मिलता, तब तक कोई भी शांति प्रक्रिया सफल नहीं हो सकती। ईरान इसे अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के सवाल के रूप में देख रहा है, जिसे वह किसी भी कीमत पर छोड़ने को तैयार नहीं है।
होर्मुज की नाकेबंदी और भविष्य का सैन्य संकट
यह कूटनीतिक वाकयुद्ध ऐसे संवेदनशील समय में हो रहा है जब अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी का ऐलान किया है। इस कदम से वैश्विक तेल आपूर्ति और आर्थिक सुरक्षा पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। इजरायल ने साफ कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव चाहे कितना भी बढ़ जाए, वह अपनी सुरक्षा के लिए लेबनान में सैन्य अभियान जारी रखेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि लेबनान को सीजफायर में शामिल करने या न करने का यह विवाद आने वाले दिनों में संघर्ष को और अधिक भीषण और विनाशकारी बना सकता है।
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