Iran-US Ceasefire: सीजफायर की शर्तों पर इजरायल का यू-टर्न, नेतन्याहू बोले- ‘लेबनान इसमें शामिल नहीं’

मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर के ऐलान के बावजूद इजरायल ने लेबनान पर हमले जारी रखने का फैसला किया है। पीएम नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि यह युद्धविराम लेबनान पर लागू नहीं होता। इस बीच, इजरायली सेना ने टायर में एक एम्बुलेंस को निशाना बनाया, जिससे शांति समझौते पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

Iran-US Ceasefire

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 8, 2026

Iran-US Ceasefire: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 दिनों के युद्धविराम (Ceasefire) की खबरों के बीच इजरायल ने एक चौंकाने वाला रुख अपनाया है। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने स्पष्ट कर दिया है कि यह युद्धविराम लेबनान पर लागू नहीं होगा। इस घोषणा के तुरंत बाद इजरायली सेना ने लेबनान के टायर क्षेत्र में एक एम्बुलेंस को निशाना बनाया और बेका घाटी (Beqaa) पर बमबारी कर दी। नेतन्याहू सरकार के इस कड़े रुख ने अंतरराष्ट्रीय शांति प्रयासों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का आधिकारिक स्टैंड

बताते चले कि, इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि दो सप्ताह का यह युद्धविराम केवल ईरान-अमेरिका प्रत्यक्ष संघर्ष तक सीमित है। नेतन्याहू का मुख्य उद्देश्य लेबनान सीमा पर हिजबुल्लाह (Hezbollah) के खिलाफ एक मजबूत ‘बफर जोन’ तैयार करना है। इजरायल का मानना है कि लेबनान में सक्रिय आतंकी गुटों को निशस्त्र किए बिना शांति संभव नहीं है, इसलिए वहां सैन्य कार्रवाई को विराम नहीं दिया जाएगा।

ट्रंप के समझौते और इजरायल की सुरक्षा चिंताओं में विरोधाभास

भले ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ शर्तों पर सहमति जताई है, लेकिन इजरायल ने कहा है कि अमेरिका ने उसे क्षेत्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता का आश्वासन दिया है। दिलचस्प बात यह है कि इजरायली मीडिया के अनुसार, सुरक्षा अधिकारियों ने पहले संकेत दिए थे कि लेबनान भी शांति वार्ता का हिस्सा है। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय के विरोधाभासी संकेतों ने अब कूटनीतिक गलियारों में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।

ईरान और पाकिस्तान की अनिवार्य शर्त

इस संकट में मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान और ईरान ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी शांति योजना में लेबनान का शामिल होना एक अनिवार्य शर्त (Mandatory Condition) है। ईरान ने दो टूक शब्दों में कहा है कि वह ऐसी किसी भी अस्थायी शांति को स्वीकार नहीं करेगा जिसमें लेबनान को सुरक्षा की गारंटी न मिले। ईरान की इस शर्त और इजरायल के अड़ियल रवैये के कारण यह समझौता लागू होने से पहले ही लड़खड़ाता हुआ नजर आ रहा है।

परमाणु और मिसाइल खतरे पर इजरायल का अल्टीमेटम

इजरायल ने कहा है कि वह ट्रंप के उस फैसले का समर्थन करता है जिसमें ईरान पर हमले निलंबित किए गए हैं, लेकिन इसके पीछे कुछ शर्तें हैं। इजरायल चाहता है कि अमेरिका यह सुनिश्चित करे कि ईरान भविष्य में परमाणु, मिसाइल या आतंकवादी खतरा न बने। साथ ही, इजरायल की मांग है कि ईरान तुरंत अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य (Straits) को व्यापार के लिए खोल दे और क्षेत्र के देशों पर हमले पूरी तरह बंद कर दे। यदि ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, तो इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।