Israel Politics: इजरायल में नेतन्याहू की सत्ता पर मंडराया संकट, गादी आइजनकोट को सरकार बनाने का न्योता

इजरायल की राजनीति में बड़ा सियासी तूफान उठता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कुर्सी पर संकट के बीच गादी आइजनकोट को सरकार बनाने का न्योता दिए जाने की खबर ने हलचल बढ़ा दी है। क्या इजरायल में सत्ता परिवर्तन होने जा रहा है और क्या नेतन्याहू की राजनीतिक पारी पर लगेगा विराम?

Israel Politics

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

नवम्बर 8, 2026

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Israel Politics : इजराइल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने विपक्षी नेता और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट को नई गठबंधन सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है। यह घटनाक्रम 27 अक्टूबर को हुए संसदीय चुनावों के बाद सामने आया है। चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके सहयोगी दल बहुमत हासिल करने में नाकाम रहे। राष्ट्रपति के इस फैसले के बाद नेतन्याहू की सत्ता पर संकट गहराता दिखाई दे रहा है। यदि आइजनकोट सरकार बनाने में सफल होते हैं तो इजराइल की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है।

गादी आइजनकोट ने राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने का किया ऐलान

राष्ट्रपति से निमंत्रण मिलने के बाद याशर पार्टी के प्रमुख गादी आइजनकोट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश में राष्ट्रीय आपातकालीन सरकार बनाने का समय आ गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह और उनकी टीम इस जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, आइजनकोट को संसद यानी नेसेट में बहुमत साबित करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया गया है। हालांकि, उनके सामने अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं वाले दलों को एकजुट करने की बड़ी चुनौती होगी।

हमास हमले और गाजा युद्ध के बीच नई सरकार की चुनौती

इजराइल पिछले कुछ वर्षों से गंभीर सुरक्षा और राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमलों के बाद इजराइल और गाजा के बीच भीषण संघर्ष शुरू हुआ था। इस युद्ध का असर देश की अर्थव्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था और आंतरिक राजनीति पर भी पड़ा है। ऐसे हालात में नई सरकार का गठन करना आसान नहीं होगा। आइजनकोट को ऐसी सरकार बनानी होगी जो सुरक्षा चुनौतियों के साथ-साथ देश के अंदरूनी मतभेदों को भी संभाल सके।

अरब पार्टियां बन सकती हैं नई सरकार की किंगमेकर

चुनाव परिणामों में किसी भी प्रमुख राजनीतिक गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण अरब नेतृत्व वाली पार्टियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। ये दल सरकार गठन में किंगमेकर साबित हो सकते हैं। हालांकि, इजराइल की राजनीति में अरब पार्टियों की भागीदारी हमेशा संवेदनशील मुद्दा रही है। इससे पहले भी अरब दलों की भूमिका को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में आइजनकोट के लिए इन पार्टियों का समर्थन हासिल करना और अपने सहयोगियों को साथ बनाए रखना बड़ी परीक्षा होगी।

नेतन्याहू ने अरब पार्टियों पर लगाए चुनाव में धांधली के आरोप

चुनाव में बहुमत नहीं मिलने के बाद बेंजामिन नेतन्याहू ने विपक्षी गठबंधन को रोकने के लिए राजनीतिक अभियान तेज कर दिया है। उन्होंने अरब पार्टियों पर चुनाव में धांधली के आरोप लगाए, हालांकि इन दावों के समर्थन में कोई सबूत सामने नहीं आया है। राष्ट्रपति की घोषणा से पहले जारी वीडियो संदेश में नेतन्याहू ने राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने की अपील की। साथ ही उन्होंने आतंकवादी समर्थक बताए जाने वाले दलों के सहयोग से जल्दबाजी में सरकार बनाने के खिलाफ चेतावनी दी।

हमास को लेकर आइजनकोट ने स्पष्ट की अपनी राजनीतिक शर्त

गादी आइजनकोट और उनकी पार्टी याशर ने नेतन्याहू के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि वह केवल उन्हीं सांसदों और राजनीतिक दलों के साथ सरकार बनाएगी, जो उसके बुनियादी सिद्धांतों से सहमत होंगे। इनमें हमास को आतंकवादी संगठन मानना और उसका खात्मा करना प्रमुख शर्त है। आइजनकोट ने अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है।

सैन्य सेवा और 7 अक्टूबर की जांच पर नेतन्याहू से मतभेद

नेतन्याहू और आइजनकोट के बीच कई महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दों पर मतभेद हैं। आइजनकोट अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स युवाओं को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट देने के खिलाफ हैं। इसके अलावा वह 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले से पहले और उसके दौरान हुई सुरक्षा एवं खुफिया चूकों की निष्पक्ष जांच की मांग करते रहे हैं। दूसरी ओर, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी एकल पार्टी के रूप में उभरी है।

अगले 42 दिन तय करेंगे इजराइल की राजनीति का भविष्य

आइजनकोट के सामने एक विकल्प अल्पमत सरकार बनाने का भी हो सकता है, जिसे बाहर से दूसरे दलों का समर्थन मिले। हालांकि, उनके अपने गठबंधन के कुछ दक्षिणपंथी नेता ऐसी व्यवस्था के पक्ष में नहीं हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आइजनकोट अगले 42 दिनों में बहुमत जुटाकर नई सरकार बना पाएंगे या नेतन्याहू एक बार फिर सत्ता बचाने में सफल होंगे। इसका जवाब इजराइल की आने वाली राजनीति की दिशा तय कर सकता है।

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