Israel attack on Lebanon : इजरायल का लेबनान पर भीषण प्रहार, शांति वार्ता के बीच नबातीह में मची तबाही, दर्जनों की मौत

लेबनान के नबातीह शहर में इजरायली वायुसेना ने उस वक्त भीषण बमबारी की, जब पूरी दुनिया शांति वार्ता की उम्मीद लगाए बैठी थी। आसमान से बरसी आग ने चंद सेकंड में रिहायशी इमारतों को मलबे में तब्दील कर दिया। क्या यह हमला शांति प्रक्रिया को हमेशा के लिए दफन कर देगा? जानें हकीकत।

Israel attack on Lebanon

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 11, 2026

Israel attack on Lebanon  : मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को इजरायली वायुसेना ने दक्षिणी लेबनान के नबातीह क्षेत्र स्थित मेफादौन कस्बे को निशाना बनाया। इस हमले में एक रिहायशी इमारत पूरी तरह ध्वस्त हो गई, जिसमें तीन नागरिकों की मौके पर ही मौत हो गई। यह हमला उस नाजुक समय पर हुआ है जब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच उच्च-स्तरीय शांति वार्ता का आगाज होने जा रहा है। इजरायल की इस ताजा सैन्य कार्रवाई ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है और वैश्विक समुदायों की चिंता बढ़ा दी है कि क्या यह हिंसा शांति की कोशिशों को पटरी से उतार देगी।

सीजफायर के दायरे पर विवाद: ईरान और इजरायल के अलग-अलग दावे

लेबनान का मुद्दा वर्तमान में चल रही शांति वार्ताओं में सबसे बड़ा अड़ंगा बनकर उभरा है। इस पूरे घटनाक्रम में दावों और प्रति-दावों का दौर जारी है। ईरान का स्पष्ट रूप से कहना है कि हाल ही में घोषित दो सप्ताह के युद्धविराम समझौते में लेबनान भी एक अनिवार्य पक्ष के रूप में शामिल था। इसके विपरीत, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख पूरी तरह अलग है। उनका दावा है कि यह सीजफायर केवल ईरान और अमेरिका के बीच सीधे तनाव को कम करने के लिए था और इसमें लेबनान या हिजबुल्लाह जैसे समूहों को कोई सुरक्षा कवर नहीं दिया गया है।

इस्लामाबाद वार्ता और लेबनान के साथ भविष्य की सीधी बातचीत

इजरायल के लगातार होते हमलों के कारण शुरुआत में ईरान ने इस्लामाबाद की मेज पर बैठने से इनकार कर दिया था। हालांकि, कूटनीतिक दबाव और इजरायल द्वारा लेबनान के साथ अलग से बातचीत करने की इच्छा जताने के बाद तेहरान वार्ता के लिए सहमत हुआ। अब ताजा अपडेट यह है कि इजरायल और लेबनान के बीच आगामी 14 अप्रैल से सीधी द्विपक्षीय बातचीत शुरू होने की संभावना प्रबल है। लेबनान के सेना प्रमुख जोसेफ औन के अनुसार, इस वार्ता का प्राथमिक उद्देश्य युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करना और सीमा पर शांति के लिए एक ठोस समाधान खोजना है। इसमें अमेरिका एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

लेबनान में मानवीय संकट: 40 दिनों में 1,900 से अधिक लोगों की मौत

लेबनान में मानवीय स्थिति अत्यंत भयावह होती जा रही है। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी से भड़के इस संघर्ष के पिछले 40 दिनों में अब तक लगभग 1,900 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। संघर्ष की विभीषिका का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुछ दिन पहले एक ही दिन में हुए भीषण हमलों में 300 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी। अस्पतालों में घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और बुनियादी सुविधाओं का अभाव संकट को और गहरा कर रहा है।

शांति प्रयासों के बीच सैन्य कार्रवाई: क्षेत्र में बढ़ता तनाव

इजरायल ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है कि जब तक कोई औपचारिक समझौता नहीं होता, हिजबुल्लाह के खिलाफ उसकी सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। इजरायल का तर्क है कि चूंकि लेबनान आधिकारिक तौर पर सीजफायर का हिस्सा नहीं है, इसलिए वह अपनी सुरक्षा के लिए हमले करने को स्वतंत्र है। दूसरी ओर, लेबनान सरकार चाहती है कि बातचीत से पहले हिंसा पूरी तरह थमे। एक तरफ जहां इस्लामाबाद में राजनयिक तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लेबनान की जमीन पर गिरते बम इस पूरे क्षेत्र की राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति को और अधिक जटिल बना रहे हैं।

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