Israel-Lebanon War: लेबनान और इजरायल के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच इजरायली रक्षा बल (IDF) ने एक बड़ा सामरिक दावा किया है। IDF के अनुसार, उनके सैनिकों ने दक्षिणी लेबनान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर ‘बिंत ज्बील’ को चारों तरफ से घेर लिया है। इजरायली सेना का मानना है कि अगले कुछ ही दिनों में इस शहर पर उनका पूर्ण प्रशासनिक और सैन्य नियंत्रण स्थापित हो जाएगा। अल जज़ीरा की रिपोर्टों के मुताबिक, इजरायली सेना ने क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के बाद वहां मौजूद इमारतों और घरों को ध्वस्त करना भी शुरू कर दिया है, ताकि हिजबुल्लाह के छिपने के ठिकानों को हमेशा के लिए खत्म किया जा सके।
शांति वार्ता की विफलता और इजरायल का आक्रामक रुख
इजरायल की यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब कूटनीतिक प्रयास विफल होते दिख रहे हैं। गौरतलब है कि 11 अप्रैल को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी। वार्ता के विफल होने के तुरंत बाद इजरायल ने अपने सैन्य अभियानों की गति बढ़ा दी। सेना की 98वीं डिवीजन के सैनिकों ने पिछले एक सप्ताह से बिंत ज्बील की घेराबंदी की योजना पर काम किया और अब शहर के भीतर प्रवेश कर आक्रामक अभियान (Ground Offensive) छेड़ दिया है। यह कदम ईरान और उसके समर्थित समूहों के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका माना जा रहा है।
हिजबुल्लाह को भारी नुकसान: 100 से अधिक लड़ाके मारे जाने का दावा
इजरायली सेना ने प्रेस वक्तव्य जारी कर दावा किया है कि बिंत ज्बील में चल रही कार्रवाई के दौरान अब तक हिजबुल्लाह के 100 से अधिक आतंकवादी मारे जा चुके हैं। IDF के अनुसार, सैनिकों ने आमने-सामने की लड़ाई और सटीक हवाई हमलों के जरिए हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया है। इस अभियान के दौरान सैकड़ों की संख्या में आधुनिक हथियार और गोला-बारूद भी जब्त किए गए हैं। लेबनान की आधिकारिक समाचार एजेंसी के मुताबिक, शहर के मुख्य बाजार और केंद्र की ओर इजरायली सैनिक तेजी से बढ़ रहे हैं और अब वे मुख्य बाजार से महज 500 मीटर की दूरी पर तैनात हैं।
हिजबुल्लाह का अभेद्य किला: बिंत ज्बील का ऐतिहासिक महत्व
बिंत ज्बील को हिजबुल्लाह का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है। इस शहर का प्रतीकात्मक महत्व भी बहुत अधिक है, क्योंकि हिजबुल्लाह के पूर्व नेता हसन नसरल्लाह ने यहीं से अपना प्रसिद्ध “मकड़ी का जाला” (Spider’s Web) भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने इजरायल की ताकत को खोखला बताया था। आज उसी शहर के केंद्र में भारी तबाही की खबरें आ रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया के अनुसार, इजरायली बलों ने शहर के मध्य हिस्से को लगभग मलबे में तब्दील कर दिया है, जिसे हिजबुल्लाह के प्रभाव को समाप्त करने की एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
हिजबुल्लाह का पलटवार: ‘खूनी जंग’ जारी रहने की चेतावनी
इजरायल के दावों के विपरीत, हिजबुल्लाह ने इन खबरों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। समूह का कहना है कि शहर अभी पूरी तरह उनके हाथ से नहीं निकला है और वहां “खूनी लड़ाई” जारी है। हिजबुल्लाह के लड़ाकों ने दावा किया है कि वे घात लगाकर किए जा रहे हमलों के जरिए इजरायली टैंकों और पैदल सेना को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। हिजबुल्लाह का कहना है कि वे अंतिम सांस तक अपने गढ़ की रक्षा करेंगे। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि इजरायली वायुसेना के निरंतर हमलों ने लेबनानी प्रतिरोध की कमर तोड़ दी है।
मानवीय संकट और कूटनीति की धुंधली उम्मीदें
इस भीषण संघर्ष के बीच सबसे ज्यादा नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ रहा है। दक्षिणी लेबनान से हजारों लोग विस्थापित होकर सुरक्षित स्थानों की तलाश में भटक रहे हैं। शहर के बुनियादी ढांचे जैसे अस्पताल, स्कूल और बाजार पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। एक तरफ जहां अमेरिका और लेबनान के बीच वाशिंगटन में बातचीत की तैयारियां चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर बिंत ज्बील की गलियों में बारूद की गंध और गोलियों की गूंज कूटनीति की उम्मीदों पर पानी फेरती नजर आ रही है। क्षेत्र में तनाव चरम पर है और आने वाले कुछ दिन युद्ध की दिशा तय करने में निर्णायक साबित होंगे।









