Israel Lebanon Conflict : इजरायल और लेबनान के बीच घोषित युद्धविराम (सीजफायर) के बावजूद सीमावर्ती इलाकों में तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि उन्होंने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के कम से कम 250 आतंकवादियों को मार गिराया है। इजरायली सेना के अनुसार, यह कार्रवाई युद्धविराम लागू होने के बाद की गई है, क्योंकि ये आतंकी समूह इजरायली नागरिकों और सैनिकों के लिए निरंतर खतरा बने हुए थे। आईडीएफ ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि उनकी सेना लेबनान में किसी भी संभावित खतरे को जड़ से समाप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
हिजबुल्लाह के कमांडरों और सैन्य ठिकानों को हवाई हमलों में किया गया नष्ट
इजरायली सैन्य प्रवक्ता ने अभियान की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि युद्धविराम समझौते की शुरुआत से अब तक हिजबुल्लाह के 220 से अधिक लड़ाकों और महत्वपूर्ण कमांडरों को निशाना बनाया गया है। आईडीएफ का तर्क है कि ये तत्व समझौते की शर्तों का उल्लंघन कर इजरायल के खिलाफ नई साजिशें रच रहे थे। इस सैन्य अभियान के दौरान न केवल आतंकवादियों का सफाया किया गया, बल्कि हिजबुल्लाह के कई रणनीतिक कमांड सेंटरों और महत्वपूर्ण सैन्य बुनियादी ढांचों को भी हवाई हमलों के जरिए मलबे में तब्दील कर दिया गया। इजरायल का मानना है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल भविष्य में सीमा पार हमलों के लिए किया जा सकता था।
बेरूत पर ताजा हमला: युद्धविराम के उल्लंघन और बढ़ती हताहतों की संख्या
बृहस्पतिवार को इजरायली वायुसेना ने एक बार फिर लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगरों और दक्षिणी लेबनान के विभिन्न हिस्सों पर बमबारी की। इस ताजा हमले को अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों और लेबनानी सरकार द्वारा युद्धविराम का गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बेरूत के घनी आबादी वाले दहिएह इलाके में हुए इस हमले में कम से कम 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि 7 अन्य नागरिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि अचानक हुई इस गोलाबारी से इलाके में अफरा-तफरी मच गई और रिहायशी इमारतों को भी काफी नुकसान पहुंचा है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और इजरायल का कड़ा रुख: भविष्य की चुनौतियां
आईडीएफ ने अपनी पोस्ट में यह स्पष्ट कर दिया है कि वे लेबनान के भीतर उन सभी गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं जो इजरायल की संप्रभुता के लिए खतरा हो सकती हैं। इजरायल का कहना है कि जब तक हिजबुल्लाह पूरी तरह से पीछे नहीं हटता और हथियारों का प्रदर्शन बंद नहीं करता, तब तक उनकी कार्रवाई जारी रह सकती है। दूसरी ओर, लेबनान इन हमलों को अपनी क्षेत्रीय अखंडता पर प्रहार बता रहा है। दोनों देशों के बीच जारी यह ‘खूनी लुका-छिपी’ अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि इससे एक बार फिर बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय युद्ध छिड़ने की आशंका पैदा हो गई है।
आतंक के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस और सुरक्षा का संकल्प
इजरायली सेना ने अपने बयान में अंत में यह दोहराया कि उनका एकमात्र उद्देश्य अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सेना ने कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध उनकी ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति जारी रहेगी। सीजफायर की नाजुक स्थिति के बीच 250 आतंकियों के मारे जाने का दावा हिजबुल्लाह के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक और सैन्य झटका माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि अंतरराष्ट्रीय संगठन और मध्यस्थता कर रहे देश इन ताजा हमलों के बाद युद्धविराम को कैसे बचाए रखते हैं और क्या लेबनान की धरती पर शांति की बहाली संभव हो पाएगी।










