Israel General Election 2026, : इजरायल चुनाव में नेतन्याहू और आइजेनकोट आमने-सामने, सरकार बनाने का पेच फंसा

इजरायल के आम चुनाव में नेतन्याहू की पार्टी सबसे बड़ी बनकर उभरी, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत नहीं मिला। दूसरी तरफ गादी आइजेनकोट भी सत्ता की दावेदारी कर रहे हैं। 19 सीटों वाली अरब पार्टियां पूरा खेल बदल सकती हैं। क्या इजरायल में फिर चुनाव होंगे?

Israel General Election 2026

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 30, 2026

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Israel General Election 2026 : इजरायल में 2026 के आम चुनाव के नतीजों के बाद राजनीतिक स्थिति बेहद दिलचस्प हो गई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट ने अगली सरकार बनाने का दावा पेश किया है। हालांकि, चुनाव में किसी भी राजनीतिक दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। सेंट्रल इलेक्शन कमेटी (CEC) ने शुक्रवार सुबह चुनाव के अंतिम नतीजे जारी किए। अब सरकार बनाने के लिए दोनों खेमों को छोटे राजनीतिक दलों का समर्थन जुटाना होगा। ऐसे में आने वाले दिनों में इजरायल की राजनीति में गठबंधन को लेकर बड़ी उठापटक देखने को मिल सकती है।

लिकुड सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन बहुमत से काफी दूर

अंतिम चुनावी नतीजों के मुताबिक, बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वहीं, गादी आइजेनकोट की याशर पार्टी को 21 सीटें मिली हैं। बी’याचद को 12, जॉइंट लिस्ट को 11 और डेमोक्रेट्स को 8 सीटें हासिल हुई हैं। इसके अलावा रा’आम को 8, यिसराइल बेयतेनु को 7, यूनाइटेड तोराह जूडाइज़्म को 7 और ओत्ज़मा येहुदित को भी 7 सीटें मिली हैं। शास और रिलीजियस ज़ायोनिज़्म के खाते में 6-6 सीटें आई हैं।

सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का समर्थन जरूरी

इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है, जिसमें कुल 120 सीटें हैं। यहां किसी भी पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन हासिल करना जरूरी होता है। लिकुड सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है। शुरुआती एग्जिट पोल में भी लिकुड को लगभग 27 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था। दूसरी तरफ आइजेनकोट की पार्टी उससे पांच से छह सीटें पीछे बताई गई थी। अब अंतिम नतीजों के बाद दोनों नेताओं के सामने बहुमत जुटाने की चुनौती है।

नेतन्याहू ने दक्षिणपंथी सरकार बनाने का किया दावा

चुनाव परिणाम सामने आने के बाद बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने समर्थकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि लिकुड इजरायल की सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है और उनकी पार्टी अगली सरकार बनाने के लिए पूरी कोशिश करेगी। नेतन्याहू ने दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी विचारधारा वाली सरकार बनाने की इच्छा जताई। साथ ही उन्होंने अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने का विरोध किया। उनके इस रुख से गठबंधन की संभावनाएं और अधिक जटिल हो गई हैं।

आइजेनकोट ने बदलाव और नई सरकार का दिया संदेश

दूसरी तरफ गादी आइजेनकोट ने चुनाव परिणामों को बदलाव की इच्छा से जोड़ते हुए नेतन्याहू से पद छोड़ने की मांग की। उन्होंने कहा कि जनता बदलाव चाहती है और वह सभी नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाली सरकार बनाने की कोशिश करेंगे। आइजेनकोट की प्रमुख प्राथमिकताओं में सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा और हमास को खत्म करना शामिल है। अब उनके सामने अलग-अलग राजनीतिक दलों को साथ लाकर बहुमत का आंकड़ा हासिल करने की चुनौती है।

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अरब पार्टियों के समर्थन से बदल सकता है पूरा खेल

इस चुनाव में अरब नेतृत्व वाली पार्टियों की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण हो गई है। अंतिम नतीजों के अनुसार, इन पार्टियों के पास कुल 19 सीटें हैं। वहीं नेतन्याहू के गठबंधन को 53 और आइजेनकोट के विरोधी गठबंधन को 48 सीटें मिली हैं। ऐसे में अरब पार्टियों का समर्थन विपक्षी खेमे को बहुमत के करीब पहुंचा सकता है। हालांकि, विपक्ष के कई नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान अरब पार्टियों के साथ गठबंधन नहीं करने का वादा किया था। यही वजह है कि आइजेनकोट के लिए सरकार बनाने का रास्ता आसान नहीं दिख रहा है।

क्या इजरायल में फिर होंगे आम चुनाव?

इजरायल में सरकार गठन को लेकर अब कई विकल्पों पर चर्चा हो सकती है। राजनीतिक दलों के बीच बातचीत से नया गठबंधन बन सकता है। इसके अलावा कुछ पार्टियां अपने पुराने राजनीतिक रुख में बदलाव करके दूसरे खेमे को समर्थन दे सकती हैं। एकता सरकार बनाने का विकल्प भी सामने आ सकता है। हालांकि, अगर कोई भी पक्ष 61 सांसदों का समर्थन जुटाने में नाकाम रहता है तो देश में दोबारा चुनाव कराने की स्थिति पैदा हो सकती है।

राष्ट्रपति हर्जोग ने दलों से की बातचीत की अपील

इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने सभी राजनीतिक दलों से खुले मन से बातचीत करने और सरकार गठन का रास्ता निकालने की अपील की है। उन्होंने एक और चुनाव की नौबत से बचने पर जोर दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि नेतन्याहू अपनी राजनीतिक पकड़ के दम पर सरकार बना पाते हैं या आइजेनकोट बदलाव के नारे के साथ नया गठबंधन तैयार करने में सफल होते हैं। आने वाले दिनों की बातचीत ही इजरायल की अगली सरकार का भविष्य तय करेगी।

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