
Israel Election 2026 : इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता को चुनौती देने के लिए चार प्रमुख विपक्षी दलों ने एक साथ आने का फैसला किया है। याशर पार्टी, डेमोक्रेट्स, इजरायल बेतेनु और टुगेदर गठबंधन के नेताओं ने चुनाव में मिलकर मुकाबला करने और सरकार बनाने के लिए सहयोग का संकल्प लिया है। इस एकता को इजरायली राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
चुनाव से पहले समझौता, सत्ता परिवर्तन की तैयारी
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, 26 सितंबर को हस्ताक्षरित घोषणा में विपक्षी नेताओं ने चुनाव से पहले एक-दूसरे के खिलाफ आक्रामक प्रचार से बचने और चुनाव बाद सरकार गठन में सहयोग करने की बात कही। बैठक में यायर लैपिड, गादी आइजेनकोट, नफ्ताली बेनेट, एविगडोर लिबरमैन और यायर गोलान शामिल हुए। संभावित प्रधानमंत्री के रूप में आइजेनकोट का नाम भी चर्चा में है।

सर्वे में कांटे की टक्कर, बहुमत से दूर दोनों पक्ष
चैनल 12 के एक सर्वे के मुताबिक, याशर पार्टी को 23 और नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 21 सीटें मिलने का अनुमान है। टुगेदर गठबंधन को 13, जबकि इजरायल बेतेनु और डेमोक्रेट्स को नौ-नौ सीटें मिल सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, चार विपक्षी दलों की कुल सीटें 54 तक पहुंच सकती हैं। 120 सदस्यीय संसद में बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी हैं।
अरब दलों की भूमिका बन सकती है निर्णायक
सर्वे में नेतन्याहू के गठबंधन को 49 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। अरब नेतृत्व वाली पार्टियों को कुल 13 सीटें मिल सकती हैं। हालांकि, यहूदी नेतृत्व वाले कई विपक्षी नेताओं ने इन दलों के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार किया है। ऐसे में सरकार गठन का गणित चुनाव परिणाम और संभावित राजनीतिक समझौतों पर निर्भर करेगा।

नेतन्याहू विरोध का अर्थ फिलिस्तीन नीति में बदलाव नहीं
विश्लेषकों के मुताबिक, विपक्षी दलों के बीच नेतन्याहू को हटाने की सहमति है, लेकिन फिलिस्तीन के मुद्दे पर उनके विचार अलग-अलग होने के बावजूद कई मामलों में सख्त हैं। गादी आइजेनकोट पश्चिमी तट पर इजरायली बस्तियों को मजबूत करने के पक्षधर हैं, जबकि नफ्ताली बेनेट फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना का विरोध करते हैं। एविगडोर लिबरमैन भी बस्तियों के विस्तार और पश्चिमी तट के कुछ हिस्सों को इजरायल में मिलाने का समर्थन करते हैं।
गाजा और पश्चिमी तट पर चुनौतियां बरकरार
यायर गोलान के नेतृत्व वाली डेमोक्रेट्स पार्टी दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करती है, लेकिन उसके प्रस्ताव में भी फिलिस्तीनी राज्य के पूर्ण निरस्त्रीकरण और कुछ क्षेत्रों में इजरायली सुरक्षा नियंत्रण की बात शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर बहुमत वाली गठबंधन सरकार के लिए गाजा से सेना हटाने जैसे बड़े फैसलों पर सहमति बनाना मुश्किल हो सकता है।

युद्ध और बस्तियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव
गाजा में सैन्य कार्रवाई, पश्चिमी तट पर बस्तियों का विस्तार और फिलिस्तीनियों के विस्थापन को लेकर इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बना हुआ है। विश्लेषकों का कहना है कि नई सरकार बनने पर मानवीय सहायता बढ़ाने, पुनर्निर्माण शुरू करने और बस्तियों से जुड़ी कुछ योजनाओं को रोकने की गुंजाइश बन सकती है। हालांकि, व्यापक नीति परिवर्तन की संभावना सीमित मानी जा रही है।
क्या सत्ता परिवर्तन से फिलिस्तीनियों को राहत मिलेगी?
इजरायल में सरकार बदलने से राजनीतिक दिशा में कुछ बदलाव संभव हैं, लेकिन फिलिस्तीनियों के अधिकारों और स्वतंत्र राष्ट्र की मांग पर निर्णायक प्रगति की गारंटी नहीं है। चुनाव में सीटों का गणित, अरब दलों की भूमिका और गठबंधन की स्थिरता अहम होगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि नेतन्याहू विरोधी एकता सत्ता परिवर्तन के साथ वास्तविक नीतिगत बदलाव भी ला पाएगी या नहीं।
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