Israel-Iran War Ceasefire: इजरायली राजदूत रूवेन अजार की दो टूक- ‘सीजफायर चाहिए तो माननी होंगी ये शर्तें’

इजरायली राजदूत रूवेन अजार ने स्पष्ट कर दिया है कि सीजफायर की मेज पर आने से पहले ईरान को अपने प्रॉक्सी नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना होगा। इजरायल ने तेहरान को आखिरी चेतावनी देते हुए कहा है कि शर्तें न मानने पर अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें। क्या ईरान झुकेगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 25, 2026

Israel-Iran War Ceasefire: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने एक विशेष साक्षात्कार में इजरायल की रणनीतिक स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीजफायर (युद्धविराम) केवल बातों से संभव नहीं है, इसके लिए ईरान को ठोस कदम उठाने होंगे। राजदूत के अनुसार, यदि ईरान वास्तव में शांति चाहता है, तो उसे अपना परमाणु कार्यक्रम तुरंत बंद करना होगा, यूरेनियम संवर्धन पर रोक लगानी होगी और अपने खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को पूरी तरह समाप्त करना होगा। इजरायल का मानना है कि इन सैन्य क्षमताओं के रहते क्षेत्र में स्थायी शांति की कल्पना करना असंभव है।

आतंकी समूहों को समर्थन बंद करे ईरान: राजदूत की दोटूक

राजदूत रूवेन अजार ने स्पष्ट किया कि इजरायल की लड़ाई सीधे तौर पर ईरान की जनता से नहीं, बल्कि उस शासन की नीतियों से है जो आतंकवाद को खाद-पानी दे रहा है। उन्होंने कहा कि सीजफायर की एक अनिवार्य शर्त यह है कि ईरान हिज़्बुल्लाह, हूती और हमास जैसे समूहों को वित्तीय और सैन्य सहायता देना बंद करे। इजरायल का तर्क है कि ईरान इन प्रॉक्सी समूहों के माध्यम से इजरायल के अस्तित्व को चुनौती देता रहा है। जब तक ईरान इन सशस्त्र समूहों के पीछे खड़ा है, तब तक इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई जारी रखने के लिए विवश है।

अमेरिका-इजरायल गठबंधन और ईरान में सत्ता परिवर्तन की भविष्यवाणी

अमेरिका के साथ अपने संबंधों पर चर्चा करते हुए अजार ने कहा कि दोनों देश सुरक्षा के मुद्दों पर पूरी तरह एकमत हैं। उन्होंने अमेरिका द्वारा युद्ध को समाप्त करने के लिए किए जा रहे राजनयिक प्रयासों की सराहना की। एक चौंकाने वाला दावा करते हुए राजदूत ने कहा कि ईरान में वर्तमान शासन का अंत निकट है। उनके अनुसार, ईरान की जनता जल्द ही वर्तमान नेतृत्व को उखाड़ फेंकेगी और वहां सत्ता परिवर्तन होगा। उन्होंने मुज्तबा खामेनेई का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें कोई विशेष छूट नहीं दी जाएगी। वर्तमान में ईरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग (आइसोलेट) पड़ चुका है और उसे उन देशों से भी मदद नहीं मिल रही है, जिनसे उसे बड़ी उम्मीदें थीं।

भारत की भूमिका: पश्चिम एशिया में संतुलन का केंद्र

भारत और इजरायल के रिश्तों तथा क्षेत्रीय राजनीति पर बात करते हुए राजदूत ने भारत की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत एक वैश्विक शक्ति के रूप में पश्चिम एशिया में संतुलन बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। भारत के सभी पक्षों के साथ मधुर संबंध हैं, जिसका उपयोग तनाव कम करने के लिए किया जा सकता है। इजरायल भारत को एक जिम्मेदार और रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है, जो आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में समान विचारधारा रखता है।

इजरायल का सुरक्षा तंत्र और मानवीय क्षति का ब्योरा

युद्ध की विभीषिका पर प्रकाश डालते हुए रूवेन अजार ने बताया कि इजरायल का डिफेंस सिस्टम (रक्षा तंत्र) दुनिया में सबसे मजबूत होने के बावजूद नागरिकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ईरान की ओर से हो रहे लगातार मिसाइल हमलों के कारण लोगों को बार-बार बंकरों और शेल्टरों में शरण लेनी पड़ रही है। इन हमलों में अब तक इजरायल के 20 नागरिकों की मौत हो चुकी है और लगभग 100 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। अंत में उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल शांति का पक्षधर है, लेकिन यह शांति आत्मसमर्पण की कीमत पर नहीं, बल्कि सुरक्षा और ईरान की नीतियों में बदलाव के आधार पर ही होगी।

Read More :  Ramnavami Holiday in UP: रामनवमी पर छुट्टियों की सौगात, हाईकोर्ट के कैलेंडर में भी बड़ा बदलाव