Islamic Flag Controversy : ओवैसी के बयान पर BJP विधायक का पलटवार, AK-47 को लेकर कही बड़ी बात

उत्तर प्रदेश के देवरिया में धार्मिक झंडे पर कथित AK-47 जैसी आकृति को लेकर विवाद गहरा गया है। असदुद्दीन ओवैसी के बयान के बाद BJP विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने तीखा पलटवार किया। उनके बयान से राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। आखिर झंडे पर बनी आकृति को लेकर विवाद इतना क्यों बढ़ा?

Islamic Flag Controversy

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 29, 2026

Islamic Flag Controversy : उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में इस्लामी झंडे पर कथित तौर पर AK-47 का चिन्ह लगाए जाने के मामले ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। सलेमपुर के मझौलीराज में एक कार्यक्रम के दौरान देवरिया सदर विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि धार्मिक झंडे के साथ हथियार का प्रतीक जोड़ना गलत संदेश देने वाला कदम है। विधायक ने प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में नियमों का पालन जरूरी है।

विधायक बोले- धार्मिक प्रतीक की आड़ में गलत संदेश नहीं

मंच से संबोधन के दौरान शलभ मणि त्रिपाठी ने कथित AK-47 वाले झंडों का जिक्र करते हुए कहा कि धार्मिक परंपरा के नाम पर किसी भी ऐसे प्रतीक का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए, जिससे समाज में डर या तनाव का माहौल बने। उन्होंने कहा कि त्योहार और धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से मनाए जाने चाहिए। उनके मुताबिक, यदि किसी धार्मिक प्रतीक की आड़ में हथियार का प्रदर्शन करने का प्रयास होता है तो प्रशासन को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

सनातनी डरने वाला नहीं, विधायक ने कहा

BJP विधायक ने अपने संबोधन में कहा कि मझौलीराज और देवरिया के लोग किसी तरह के डर या दबाव में नहीं आएंगे। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों का सम्मान होना चाहिए, लेकिन किसी भी समुदाय को ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे दूसरे वर्ग में भय पैदा हो। विधायक ने प्रशासन से कानून के मुताबिक सख्ती बरतने की बात कही और अपने संबोधन में कड़ा रुख अपनाया।

ओवैसी के बयान पर भी साधा निशाना

शलभ मणि त्रिपाठी ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि कथित AK-47 वाले झंडे हटाए जाने के बाद ओवैसी ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। विधायक ने कहा कि इसे किसी समुदाय के डर से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि देवरिया के लोग कानून-व्यवस्था और सामाजिक शांति बनाए रखने के पक्ष में हैं।

त्योहार मनाने की अपील के साथ दी चेतावनी

विधायक ने कहा कि हर समुदाय को अपने धार्मिक त्योहार और परंपराएं शांतिपूर्ण तरीके से मनाने का अधिकार है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक आयोजनों में ऐसे प्रतीकों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, जिनसे विवाद या तनाव बढ़ सकता है। अपने संबोधन में उन्होंने बेहद तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि देवरिया की धरती पर किसी को भी धार्मिक झंडे की आड़ में डर का माहौल बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

ओवैसी के अखिलेश को गठबंधन प्रस्ताव का भी जिक्र

अपने भाषण में शलभ मणि त्रिपाठी ने असदुद्दीन ओवैसी की हालिया राजनीतिक गतिविधियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने ओवैसी की ओर से समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव को गठबंधन का प्रस्ताव दिए जाने की बात कही। विधायक ने इस राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा और बिहार की राजनीति का उदाहरण देते हुए अपनी बात रखी।

राम नगीना यादव की हत्या का उठाया मुद्दा

विधायक ने अपने संबोधन में देवरिया में एक कथित मजार को लेकर पुराने विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देवरिया में रेलवे ओवरब्रिज के पास सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण कर धार्मिक ढांचा बनाए जाने का मामला उनके लिए चिंता का विषय रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनके राजनीतिक कार्यकर्ता और प्रचारक राम नगीना यादव ने इस मुद्दे का विरोध किया था।

पुरानी घटना को मौजूदा विवाद से जोड़ा

शलभ मणि त्रिपाठी ने दावा किया कि राम नगीना यादव द्वारा कथित मजार का विरोध किए जाने के बाद उनकी दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। विधायक ने इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक या सार्वजनिक स्थलों से जुड़े विवादों को कानून के दायरे में सुलझाया जाना चाहिए। हालांकि, उनके संबोधन में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

झंडा विवाद से बढ़ी सियासी बयानबाजी

मझौलीराज में विधायक के बयान के बाद झंडे से जुड़ा विवाद राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। एक तरफ प्रशासन की कार्रवाई और धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर BJP नेता इसे कानून-व्यवस्था और सामाजिक शांति से जोड़ रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान किसी भी तरह के विवादित या उकसावे वाले प्रतीकों से बचा जाए और सभी पक्ष कानून के दायरे में रहें।

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