Islamabad Talks Fail: जेडी वेंस ने खोला राज, बताया ईरान के लिए क्या है डोनाल्ड ट्रंप का ‘खुफिया’ प्लान

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता की विफलता पर बड़ा खुलासा किया है। वेंस के अनुसार, ईरानी वार्ताकार समझौता करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र नहीं थे और उन्हें हर निर्णय के लिए तेहरान से अंतिम मंजूरी लेनी पड़ रही थी।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अप्रैल 14, 2026

Islamabad Talks Fail: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही शांति वार्ता एक बार फिर असफल हो गई है, जिसके बाद क्षेत्रीय तनाव और अधिक बढ़ गया है। पाकिस्तान में हुई बातचीत के दौरान कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है। इसी बीच अमेरिकी प्रशासन की ओर से कड़े कदम उठाने की घोषणा की गई है।

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वार्ता में आंशिक प्रगति, लेकिन अंतिम समझौता नहीं

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने फॉक्स न्यूज के ‘स्पेशल रिपोर्ट’ कार्यक्रम में दिए एक इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान में हुई वार्ता में कुछ सकारात्मक प्रगति जरूर हुई है। उनके अनुसार ईरान से जुड़े परमाणु मुद्दों पर बातचीत के दौरान कुछ बिंदुओं पर सहमति बनी, खासकर यूरेनियम संवर्धन को सीमित करने और परमाणु सामग्री को हटाने के विषय पर चर्चा आगे बढ़ी।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरानी पक्ष पूरी तरह से किसी अंतिम समझौते पर नहीं पहुंच सका, क्योंकि उन्हें तेहरान में अन्य राजनीतिक नेतृत्व से अनुमति लेनी पड़ती है।

ईरान से नरमी की उम्मीद, अमेरिका का सख्त रुख

जेडी वेंस ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान उसकी दिशा में आगे बढ़े और बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका यह चाहता है कि डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में ईरान को एक सामान्य राष्ट्र की तरह व्यवहार करने का अवसर मिले, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था सामान्य स्थिति में लौट सके।

हालांकि वेंस ने यह भी स्वीकार किया कि बातचीत में अभी कई बड़े मुद्दे अनसुलझे हैं और आगे की प्रगति पूरी तरह ईरान के अगले कदमों पर निर्भर करेगी।

होर्मुज स्ट्रेट और बंदरगाहों पर नाकाबंदी का ऐलान

इस बीच अमेरिका की ओर से ईरान के समुद्री मार्गों पर सख्ती बढ़ा दी गई है। ईरानी बंदरगाहों और होर्मुज स्ट्रेट पर नाकाबंदी की घोषणा की गई है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ने की संभावना है।

वैश्विक राजनीति में बढ़ी चिंता

इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस को जन्म दे दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर गहरा असर डाल सकते हैं। वहीं कई देशों ने इस स्थिति पर चिंता जताई है और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। कुल मिलाकर, ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है, जहां बातचीत की उम्मीदों के साथ-साथ टकराव की आशंका भी बनी हुई है।

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