Islamabad Peace Talks: “21 घंटे का महामंथन”, क्या अमेरिका और ईरान के बीच सुलझ जाएगा होर्मुज विवाद?

इस्लामाबाद के सेरेना होटल में 21 घंटे तक चले तीन दौर के गहन विचार-विमर्श के बाद भी अमेरिका और ईरान किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी विदेश मंत्री के बीच चली इस लंबी बातचीत के विफल होने के बाद, खाड़ी देशों में युद्ध के बादल फिर से गहरा गए हैं।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 18, 2026

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Islamabad Peace Talks:  अमेरिका और ईरान के बीच दशकों से चले आ रहे तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद एक बार फिर वैश्विक कूटनीति का केंद्र बनने जा रही है। सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का अगला और महत्वपूर्ण दौर सोमवार को होने की संभावना है। ईरानी अधिकारियों ने इस बात के संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल रविवार को ही इस्लामाबाद पहुँच सकते हैं। हालांकि, वाशिंगटन ने अभी तक इस वार्ता को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन पर्दे के पीछे जारी ‘बैक-चैनल’ कूटनीति इस बात की गवाही दे रही है कि संघर्ष को टालने की कोशिशें युद्ध स्तर पर जारी हैं।

ट्रंप और तेहरान के बीच विरोधाभास: समझौते की राह में अब भी कई रोड़े

भले ही वार्ता की मेज सज रही हो, लेकिन दोनों पक्षों के बयानों में भारी विरोधाभास नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा था कि समझौते की दिशा में अच्छी प्रगति हो रही है। इसके उलट, तेहरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने किसी भी बड़े समझौते या झुकने की बात को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान का स्पष्ट कहना है कि वे अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेंगे। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सोमवार की बैठक में दोनों पक्ष किन साझा बिंदुओं पर सहमति बना पाते हैं, क्योंकि अविश्वास की खाई अभी भी बहुत गहरी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर खींचतान: नौसैनिक नाकेबंदी और धमकियों का दौर

वार्ता के बीच सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को लेकर तनाव चरम पर है। शुक्रवार को इस समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही बेहद सीमित रही। जहाँ एक ओर ईरान के विदेश मंत्री ने इसे वाणिज्यिक यातायात के लिए खुला बताया है, वहीं ईरानी संसद के स्पीकर ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका ने क्षेत्र से अपनी नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटाई, तो ईरान इस मार्ग को दोबारा बंद करने से पीछे नहीं हटेगा। दूसरी ओर, ट्रंप ने भी जवाबी दावा करते हुए कहा है कि होर्मुज का रास्ता पूरी तरह खुला है और किसी भी बाधा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

क्षेत्रीय शक्तियों की सक्रियता: कतर, तुर्की और पाकिस्तान की मध्यस्थता

मिडिल ईस्ट में शांति बहाली के लिए क्षेत्रीय शक्तियां भी एकजुट होती दिख रही हैं। अंताल्या डिप्लोमेसी फोरम के दौरान कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी और तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ से विशेष मुलाकात की। इस त्रिपक्षीय विमर्श का केंद्र अमेरिका-ईरान तनाव को कम करना ही था। साथ ही, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की तेहरान यात्रा और ईरानी संसद अध्यक्ष से उनकी मुलाकात को इस कूटनीतिक कड़ी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

पिछली विफलता से सबक: क्या इस बार निकलेगा कोई ठोस नतीजा?

गौरतलब है कि 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई ‘पीस टॉक्स’ साल 1979 की क्रांति के बाद पहली ऐसी कोशिश थी जहाँ दोनों देश आमने-सामने बैठे थे। हालांकि, वह दौर किसी नतीजे पर नहीं पहुँच सका था, जिससे दुनिया भर में निराशा फैली थी। अब दूसरे दौर की बातचीत से उम्मीदें बढ़ गई हैं। इसी बीच इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच जारी 10 दिनों का युद्धविराम भी एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। हालांकि लेबनान ने कुछ उल्लंघनों के आरोप लगाए हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर शांति का दिखना वार्ता के लिए एक सकारात्मक माहौल तैयार कर सकता है।

पाकिस्तान की भूमिका पर टिकी दुनिया की निगाहें

इस्लामाबाद में प्रस्तावित यह वार्ता न केवल अमेरिका और ईरान के भविष्य के संबंधों को तय करेगी, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट की स्थिरता के लिए भी निर्णायक साबित होगी। पाकिस्तान जिस तरह से एक मध्यस्थ के रूप में उभर रहा है, वह दक्षिण एशियाई कूटनीति के लिए भी एक बड़ा संदेश है। यदि सोमवार की बातचीत सफल रहती है, तो यह वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए साल 2026 की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।

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