Islamabad Lockdown: अमेरिका-ईरान की महावार्ता आज, किले में तब्दील हुई राजधानी, जानें क्या हैं सुरक्षा के इंतजाम

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की मेजबानी के नाम पर इस्लामाबाद की सड़कें वीरान हैं और इंटरनेट से लेकर राशन तक पर पहरा है। क्या यह सिर्फ सुरक्षा प्रोटोकॉल है या किसी बड़े विरोध प्रदर्शन को कुचलने की साजिश? देखिए इस्लामाबाद से इस ग्राउंड रिपोर्ट की डरावनी तस्वीर!

Islamabad Lockdown

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 10, 2026

Islamabad Lockdown : वैश्विक मंच पर अपनी साख मजबूत करने और एक सुरक्षित मेजबान की छवि पेश करने की होड़ में पाकिस्तान सरकार ने अपनी ही जनता की नाक में दम कर दिया है। शनिवार, 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने वाली अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति वार्ता ने राजधानी को किसी युद्ध क्षेत्र में तब्दील कर दिया है। इस उच्च-स्तरीय बैठक के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए हैं कि इस्लामाबाद के आम नागरिक अपने ही घरों में ‘कैदी’ बनकर रह गए हैं। दिखावे की इस कूटनीति के चक्कर में हजारों परिवारों की दैनिक दिनचर्या पूरी तरह तहस-नहस हो गई है।

जेडी वेंस और मोहम्मद बागेर गालिबाफ की सुरक्षा के लिए ‘लोहे की दीवार’

इस कूटनीतिक बैठक के केंद्र में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ हैं। इन दोनों दिग्गजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तान ने पूरी राजधानी को एक अभूतपूर्व सुरक्षा घेरे में ले लिया है। शहर के चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल, अर्धसैनिक बलों और सेना की टुकड़ियों को तैनात किया गया है। न केवल मुख्य राजमार्गों, बल्कि रिहायशी इलाकों की छोटी गलियों को भी कंटीले तारों और भारी बैरिकेडिंग से सील कर दिया गया है। प्रशासन ने धारा 144 लागू करते हुए किसी भी प्रकार के सार्वजनिक आवागमन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

बाजार बंद और सड़कें वीरान: नागरिकों के लिए खड़ी हुई राशन की समस्या

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स और ‘डॉन’ अखबार के अनुसार, कूटनीतिक काफिलों की निर्बाध आवाजाही दिखाने के लिए सड़कों के किनारे स्थित सभी दुकानों, पेट्रोल पंपों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को जबरन बंद करा दिया गया है। इस नाकेबंदी का सबसे भयावह असर आम लोगों की बुनियादी जरूरतों पर पड़ा है। शाह खालिद कॉलोनी और एयरपोर्ट हाउसिंग सोसाइटी जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में राशन की आपूर्ति ठप हो गई है। दुकानों के बंद होने से लोगों के पास रोजमर्रा का सामान खरीदने का कोई विकल्प नहीं बचा है, जिससे भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हो रही है।

पानी और दवाओं के लिए हाहाकार: ठप पड़ीं आपातकालीन सेवाएं

सुरक्षा के नाम पर बरती जा रही इस सख्ती ने मानवीय संकट खड़ा कर दिया है। इस्लामाबाद के कई हिस्सों में पानी के टैंकरों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है, जिससे भीषण गर्मी के बीच लोगों के पास पीने का पानी तक खत्म हो गया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्रशासन ने न केवल बाजार, बल्कि अस्पतालों तक जाने वाले रास्तों को भी सीमित कर दिया है। कई दवा की दुकानें बंद हैं और एम्बुलेंस सेवाओं को भी कड़ी जांच से गुजरना पड़ रहा है। मरीजों और बुजुर्गों के लिए यह सुरक्षा चक्र किसी बुरे सपने से कम नहीं साबित हो रहा है।

सेरेना होटल बना किला: 11 हजार जवानों की तैनाती और ‘ब्लू बुक’ सुरक्षा

शांति वार्ता के मुख्य आयोजन स्थल, सेरेना होटल के आसपास के 3 किलोमीटर क्षेत्र को पूरी तरह ‘नो-गो ज़ोन’ घोषित कर दिया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को वैश्विक मानकों, विशेषकर ‘ब्लू बुक’ प्रोटोकॉल के तहत तैयार किया गया है। इस्लामाबाद पुलिस के साथ-साथ पंजाब और सिंध से आए अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों और सेना के जवानों को मिलाकर कुल 11,000 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां भी इस घेरे की बारीकी से निगरानी कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस बैठक को भले ही मील का पत्थर बताया जा रहा हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता का प्रतीक बन गई है।

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