US Iran WAR: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान के सरकारी टेलीविजन पर IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के केंद्रीय मुख्यालय ‘खातम अल-अनबिया’ के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फागरी का एक कड़ा बयान जारी किया गया है। प्रवक्ता ने अमेरिकी राष्ट्रपति और उनकी सेना के कमांडरों द्वारा दी जा रही धमकियों के जवाब में सैन्य चेतावनी जारी करते हुए कहा कि यदि ईरान के विरुद्ध कोई भी आक्रामक कार्रवाई हुई, तो उनकी सशस्त्र सेनाएं पूरी शक्ति के साथ जवाबी प्रहार करेंगी। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसके निशाने पर पूर्व निर्धारित सैन्य लक्ष्य हैं, जिन्हें पल भर में नेस्तनाबूद किया जा सकता है।
इजरायल और अमेरिका को ‘कड़ा सबक’ सिखाने का संकल्प
बताते चले कि, ईरानी सेना ने अपनी धमकी में इजरायल को ‘बच्चों की हत्या करने वाला ज़ायोनी शासन’ करार देते हुए कहा कि इस बार सबक पहले से कहीं अधिक कठोर होगा। न्यूज एंकर द्वारा पढ़े गए आधिकारिक सैन्य वक्तव्य में ज़ोल्फ़ागरी ने जोर देकर कहा कि अगर अमेरिका या इजरायल ने ईरान की संप्रभुता को चुनौती दी, तो ईरान की सेनाएं उनके रणनीतिक ठिकानों पर भीषण हमला करेंगी। तेहरान का यह कड़ा रुख वैश्विक मंच पर एक नए शक्ति प्रदर्शन (Power Struggle) के रूप में देखा जा रहा है, जिससे मध्य पूर्व में युद्ध के बादल और गहरे हो गए हैं।
ट्रंप की युद्धविराम बढ़ाने की घोषणा
आपको बता दे कि, ईरान की इस सख्त सैन्य धमकी के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला फैसला लिया है। मंगलवार देर रात ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका, पाकिस्तान के विशेष अनुरोध पर ईरान के साथ अपने युद्धविराम (Ceasefire) को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा रहा है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि वे इस्लामी गणराज्य ईरान की ओर से एक एकीकृत शांति प्रस्ताव की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हालांकि, एक तरफ शांति की बात और दूसरी तरफ ईरान का आक्रामक तेवर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ा विरोधाभास पैदा कर रहा है।
तेहरान का वार्ता से पीछे हटना
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही राजनयिक वार्ता फिलहाल अधर में लटकती नजर आ रही है। व्हाइट हाउस ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की इस्लामाबाद यात्रा को टाल दिया है, क्योंकि तेहरान ने आगे की बातचीत में शामिल होने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान, जो इस पूरे मामले में मध्यस्थता (Mediation) की भूमिका निभा रहा है, उसके सूचना मंत्री ने बताया कि ईरान ने अभी तक औपचारिक रूप से वार्ता की मेज पर आने की पुष्टि नहीं की है। दो सप्ताह का प्रारंभिक युद्धविराम समाप्त होने के कगार पर है, और ईरान का वार्ता से इनकार करना आने वाले समय में सैन्य टकराव के जोखिम को बढ़ा सकता है।
मध्य पूर्व में गहराता संकट
ईरानी संयुक्त कमान का ताजा बयान और वाशिंगटन की ओर से बढ़ाया गया युद्धविराम यह संकेत देते हैं कि स्थिति बेहद नाजुक है। एक ओर जहां डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान के जरिए दबाव और संवाद की नीति अपना रहा है, वहीं ईरान अपनी सैन्य क्षमताओं और जवाबी कार्रवाई के संकल्प को दोहराकर पीछे हटने को तैयार नहीं है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि तेहरान और वाशिंगटन के बीच कोई ठोस समझौता नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में क्षेत्रीय स्थिरता (Regional Stability) पूरी तरह भंग हो सकती है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ेगा।









