Iran War: ईरान युद्ध के बीच अमेरिका विचार कर रहा बड़ा यूटर्न, तेल कीमतों में राहत की उम्मीद

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी खबर आ रही है। अमेरिका अब समुद्र में जहाजों पर फंसे 140 मिलियन बैरल ईरानी तेल पर लगी पाबंदी हटाने पर विचार कर रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के इस संकेत ने दुनिया भर के बाजारों में हलचल तेज कर दी है।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 20, 2026

Iran War: मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण संघर्ष के बीच विश्व बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग को बुझाने के लिए अमेरिका एक अप्रत्याशित कदम उठाने की तैयारी में है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, बाइडन प्रशासन (और आगामी ट्रंप नीतियों के संकेत) समुद्र में जहाजों पर फंसे ईरानी तेल पर लगी पाबंदियों में ढील दे सकता है। यह फैसला वैश्विक तेल आपूर्ति को सुचारू बनाने और आसमान छूती कीमतों को काबू में रखने के लिए एक ‘मजबूरी का यू-टर्न’ माना जा रहा है।

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जहाजों में कैद 140 मिलियन बैरल तेल का गणित

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने हाल ही में एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि लगभग 140 मिलियन बैरल ईरानी तेल वर्तमान में समुद्र में खड़े जहाजों में फंसा हुआ है। प्रतिबंधों के कारण यह तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार तक नहीं पहुंच पा रहा है। बेसेंट के अनुसार, यदि इन प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटाया जाता है, तो यह अतिरिक्त तेल बाजार में आपूर्ति (Supply) बढ़ा देगा, जिससे कीमतों पर बना दबाव कम हो सकता है।

फॉक्स बिजनेस नेटवर्क से बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह तेल करीब 10 से 14 दिनों तक वैश्विक बाजार में कीमतों को स्थिर रखने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। वर्तमान में युद्ध के कारण सप्लाई चेन बाधित है, जिससे हर दिन लगभग 15 मिलियन बैरल तेल की आपूर्ति पर संकट मंडरा रहा है।

अमेरिका की नीति में बदलाव

यह कदम अमेरिका की पुरानी ‘मैक्सिमम प्रेशर’ (Maximum Pressure) नीति से बिल्कुल उलट है। परंपरागत रूप से, अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए उसके तेल निर्यात पर सख्त प्रतिबंध लगाता रहा है। हालांकि, रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी अमेरिका ने रूसी तेल के मामले में कुछ ऐसी ही राहत दी थी। अब ईरान के मामले में भी अमेरिका ‘व्यावहारिक कूटनीति’ अपनाता दिख रहा है ताकि घरेलू और वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके।

भारत समेत एशियाई देशों पर क्या होगा असर?

वर्तमान में ईरान का अधिकांश तेल चोरी-छिपे या विशेष रास्तों से चीन जा रहा है। यदि अमेरिका आधिकारिक तौर पर पाबंदियां हटाता है, तो इसका सीधा लाभ एशिया के इन प्रमुख देशों को मिलेगा:

भारत और जापान: तेल आयात के लिए खाड़ी देशों पर निर्भरता कम होगी।

इंडोनेशिया और मलेशिया: सप्लाई चेन में सुधार से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

सिंगापुर: तेल शोधन (Refining) और व्यापारिक हब के रूप में राहत महसूस करेगा।

एशियाई देश पहले ही तेल के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाश रहे हैं और अमेरिका से आयात बढ़ा रहे हैं। ऐसे में ईरानी तेल का बाजार में आना एक ‘लाइफलाइन’ साबित हो सकता है।

अस्थायी राहत या दीर्घकालिक समाधान?

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह फैसला अल्पकालिक राहत (Short-term relief) तो दे सकता है, लेकिन तेल की कीमतों का भविष्य पूरी तरह से मिडिल ईस्ट के युद्ध विराम पर निर्भर करेगा। यदि ईरान और इजरायल के बीच तनाव और बढ़ता है, तो 140 मिलियन बैरल की यह अतिरिक्त सप्लाई भी नाकाफी साबित हो सकती है।

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