Iran-US War : मध्य पूर्व में युद्ध की लपटें अब और भी विनाशकारी रूप ले रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने पूरी दुनिया को सकते में डाल दिया है। ट्रंप ने ईरान को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि उनके पास अब केवल 48 घंटे का समय बचा है। इस समयसीमा के समाप्त होते ही अमेरिका ईरान पर अब तक का सबसे भीषण हमला करने की तैयारी में है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह अल्टीमेटम एक निर्णायक सैन्य कार्रवाई का संकेत है।
अमेरिका की नई सैन्य रणनीति: JASSM-ER मिसाइलों का जखीरा रवाना
ब्लूमबर्ग की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका अपनी सबसे उन्नत और घातक ‘जॉइंट एयर-टू-सरफेस स्टैंडऑफ मिसाइल एक्सटेंडेड रेंज’ (JASSM-ER) को मिडिल ईस्ट में तैनात करने जा रहा है। मार्च के अंत में जारी एक गुप्त आदेश के तहत इन स्टील्थ क्रूज मिसाइलों की खेप को युद्ध क्षेत्र की ओर रवाना कर दिया गया है। यह कदम दर्शाता है कि पेंटागन अब ईरान के खिलाफ युद्ध को एक नए और अधिक आक्रामक चरण में ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
JASSM-ER की ताकत: अभेद्य एयर डिफेंस को भेदने में सक्षम
JASSM-ER कोई साधारण मिसाइल नहीं है; इसकी मारक क्षमता और सटीक निशाना इसे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ हथियारों में शामिल करता है। लगभग 15 लाख डॉलर की लागत वाली यह मिसाइल 600 मील से अधिक दूरी तक वार कर सकती है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका ‘स्टील्थ’ फीचर है, जिसकी वजह से यह दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम और रडार की नजरों से बचकर बेहद सुरक्षित ठिकानों को भी मलबे में तब्दील कर सकती है। इसे विशेष रूप से उन लक्ष्यों के लिए बनाया गया है जहाँ पहुंचना लगभग असंभव माना जाता है।
खत्म होता अमेरिकी हथियारों का भंडार और चीन का डर
युद्ध की तीव्रता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका अपने मिसाइल जखीरे का लगभग दो-तिहाई हिस्सा पहले ही इस जंग में झोंक चुका है। सूत्रों के अनुसार, शुरुआती चार हफ्तों में ही 1,000 से अधिक JASSM-ER मिसाइलें दागी जा चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तेजी से अमेरिका अपने संसाधनों का उपयोग कर रहा है, उन्हें दोबारा भरने में कई साल लग सकते हैं। इससे रक्षा गलियारों में यह चिंता बढ़ गई है कि यदि भविष्य में चीन जैसे शक्तिशाली देशों से टकराव होता है, तो अमेरिका के पास पर्याप्त हथियारों की कमी हो सकती है।
ईरान का पलटवार: अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मार गिराया
भले ही अमेरिका और इजरायल ने ईरान के अधिकांश एयर डिफेंस को तबाह करने का दावा किया हो, लेकिन ईरान भी कड़ा प्रतिरोध कर रहा है। हाल ही में ईरान ने अमेरिका के एक अत्याधुनिक F-15E लड़ाकू विमान और एक A-10 विमान को मार गिराकर अपनी ताकत का अहसास कराया है। इतना ही नहीं, ईरानी सेना ने अमेरिकी रेस्क्यू हेलीकॉप्टरों को भी निशाना बनाया है, जो यह साबित करता है कि जंग एकतरफा नहीं है और अमेरिकी सेना को भी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।
इजरायल की तैयारी: ईरान के ऊर्जा केंद्रों पर हमले का मेगा प्लान
जंग के इस माहौल में इजरायल ने भी अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली सेना ईरान की ‘एनर्जी फैसिलिटीज’ (ऊर्जा केंद्रों) को निशाना बनाने की फिराक में है। इजरायल बस व्हाइट हाउस से अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहा है। सैन्य अधिकारियों का कहना है कि एक बार हरी झंडी मिलते ही एक हफ्ते के भीतर ईरान के तेल भंडारों और बिजली संयंत्रों पर हमला किया जा सकता है, जिससे ईरानी अर्थव्यवस्था की कमर टूट जाएगी।










