Iran US War: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे सैन्य टकराव के बीच पश्चिम एशिया में तनाव का पारा सातवें आसमान पर है। इस नाजुक मोड़ पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तेहरान के नेतृत्व को अत्यंत सख्त चेतावनी दी है। एक वीडियो संदेश जारी करते हुए नेतन्याहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ईरान ने इजरायल पर किसी भी प्रकार का हमला किया, तो उसे शांति की अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए। उन्होंने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि वे दिन लद गए हैं जब इजरायल पर हमला होता था और वह चुप रहता था। नेतन्याहू ने चेतावनी दी कि यदि अब कोई दुस्साहस हुआ, तो इजरायल का पलटवार पहले से कहीं अधिक आक्रामक और निर्णायक होगा।
रोम वार्ता और लेबनान में पायलट जोन की संभावना
एक ओर जहाँ इजरायल ईरान को सीधे चेतावनी दे रहा है, वहीं दूसरी ओर रोम में कूटनीतिक स्तर पर बातचीत का एक नया दौर शुरू हुआ है। इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने जानकारी दी है कि उनका देश लेबनान में एक ‘पायलट जोन’ लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि रोम में चल रही चर्चाएं इस दिशा में सकारात्मक कदम साबित होंगी। गौरतलब है कि पिछले महीने एक युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर होने के बावजूद, इजरायली सेना का दक्षिणी लेबनान में सैन्य अभियान जारी है, जो क्षेत्र की स्थिति को और अधिक जटिल बना रहा है।
क्षेत्रीय अस्थिरता: खाड़ी देशों में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय
ईरान द्वारा खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं के बाद, पूरा क्षेत्र सुरक्षा के लिहाज से हाई अलर्ट पर है। बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन जैसे देशों ने एहतियात के तौर पर अपने एयर डिफेंस सिस्टम को फिर से सक्रिय कर दिया है। इस तनाव की भयावहता तब और बढ़ गई जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात के दो तेल टैंकरों पर क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया। इस हमले में एक भारतीय चालक दल के सदस्य की दुखद मृत्यु ने भारत सरकार को भी सक्रिय कर दिया है, जिसने ईरान के राजनयिकों को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
ईरान का अडिग रुख और परमाणु केंद्रों के पास धमाके
ईरानी न्यूज एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी ईरान के बुशहर—जहाँ महत्वपूर्ण परमाणु सुविधाएं स्थित हैं—और बंदर अब्बास के पास कई धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं। इन घटनाओं के बावजूद ईरान का रुख नरम पड़ता नहीं दिख रहा है। ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया ने दोटूक कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिका की सैन्य दादागिरी के आगे झुककर नहीं खोला जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरानी सेना इस रणनीतिक क्षेत्र से एक इंच भी पीछे नहीं हटेगी। यह सैन्य तनातनी न केवल क्षेत्र के देशों के लिए बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए भी एक बड़ा संकट बनती जा रही है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।
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