Iran US Tension : 5 अरब देशों पर ईरान का गंभीर आरोप, युद्ध में नुकसान की मांगी भारी क्षतिपूर्ति

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखकर सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, कतर और जॉर्डन पर अमेरिकी-इजरायली हमलों में शामिल होने का आरोप लगाया है। ईरान का दावा है कि इन देशों ने अपनी जमीन का इस्तेमाल हमले के लिए होने दिया, जिसके बदले अब उसे भारी क्षतिपूर्ति चाहिए। क्या यह खाड़ी में नए युद्ध की आहट है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 14, 2026

Iran US Tension : मध्य पूर्व में युद्ध के बादल और गहरे होते जा रहे हैं। ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच अब पांच पड़ोसी अरब देशों—सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन और जॉर्डन—के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ईरान का दावा है कि इन देशों ने अपनी धरती का उपयोग ईरान के विरुद्ध सैन्य अभियानों के लिए होने दिया है।

संयुक्त राष्ट्र को ईरान का कड़ा पत्र

ईरानी सरकारी मीडिया ‘प्रेस टीवी’ की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर-सईद इरावानी ने यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और सुरक्षा परिषद को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र में ईरान ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि जिन अरब देशों ने अपनी जमीन पर अमेरिकी और इजरायली सैन्य गतिविधियों को अनुमति दी, वे अब मासूम नहीं रह गए हैं। ईरान ने इन देशों द्वारा किए गए किसी भी प्रकार के ‘आत्मरक्षा’ (यूएन चार्टर अनुच्छेद 51) के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।

अरब देशों की भूमिका और हमले के आरोप

ईरान ने अपने पत्र में बहरीन, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन पर आरोप लगाया है कि वे न केवल मूकदर्शक रहे, बल्कि कुछ मामलों में सीधे तौर पर ईरान के भीतर नागरिक ठिकानों पर हुए हमलों में सहभागी बने। ईरान का तर्क है कि जब कोई देश अपनी संप्रभु भूमि का उपयोग किसी दूसरे देश पर हमले के लिए करने देता है, तो वह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उस हमले का भागीदार माना जाता है। ईरान ने मांग की है कि ये देश तत्काल प्रभाव से अपनी जमीन का ‘दुरुपयोग’ बंद करें।

हर्जाने और ‘नैतिक नुकसान’ की मांग

ईरान ने पहली बार इन पांचों देशों से पूर्ण भरपाई’ (Full Reparation) की मांग की है। तेहरान के अनुसार, इन हमलों से ईरान को जो आर्थिक और भौतिक नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई तो होनी ही चाहिए, साथ ही ‘नैतिक नुकसान’ (Moral Damage) के लिए भी ये देश जिम्मेदार हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला देते हुए ईरान ने कहा है कि इन देशों को अपनी गलतियों की जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी और भविष्य में ऐसे किसी भी उकसावे से बचना होगा।

अमेरिका पर ‘नौसैनिक नाकेबंदी’ का आरोप

पड़ोसी देशों के साथ-साथ ईरान ने अमेरिका पर भी तीखा हमला बोला है। ईरान ने एक अलग पत्र में आरोप लगाया कि 12 अप्रैल को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरानी बंदरगाहों की अवैध नौसैनिक नाकेबंदी शुरू की है। ईरान के अनुसार, यह कदम यूएन चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन है, जो किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ बल प्रयोग को प्रतिबंधित करता है।

क्षेत्रीय शांति और ईरान की चेतावनी

ईरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी नाकेबंदी अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून और वैध व्यापार के अधिकारों का हनन है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए ‘जरूरी और उचित कदम’ उठाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। ईरान ने वैश्विक समुदाय को आगाह किया है कि यदि स्थिति बिगड़ती है, तो इसके गंभीर परिणाम क्षेत्रीय और वैश्विक शांति पर पड़ेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी वाशिंगटन की होगी।

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