Iran-US Nuclear Talks: ओमान की राजधानी मस्कट में होने वाली ऐतिहासिक परमाणु वार्ता से ठीक पहले ईरान ने एक बड़ा कदम उठाया है। एक तरफ जहाँ पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली सुलह की कोशिशों पर टिकी हैं, वहीं दूसरी ओर ईरानी नौसेना ने फारस की खाड़ी में बड़ी कार्रवाई की है। ईरान ने ईंधन की कथित तस्करी के आरोप में दो विदेशी तेल टैंकरों को अपने कब्जे में ले लिया है। हालांकि, स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में अभी तक इन टैंकरों की राष्ट्रीयता या उन पर लगे झंडों का खुलासा नहीं किया गया है, जिससे यह मामला और अधिक रहस्यमयी हो गया है।
10 लाख लीटर ईंधन और बुशहर बंदरगाह: ‘रेवोल्यूशनरी गार्ड’ का एक्शन
ईरान की ‘इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) की नौसेना के क्षेत्रीय कमांडर जनरल हैदर होनारियन मोजर्रद ने इस जब्ती की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि दोनों टैंकर डीजल सहित लगभग 10 लाख लीटर (तकरीबन 6,300 बैरल) ईंधन की तस्करी कर रहे थे। जनरल मोजर्रद के अनुसार, इन पोतों को फारसी द्वीप के पास से पकड़ा गया और आगे की कानूनी कार्यवाही के लिए बुशहर बंदरगाह की ओर रवाना कर दिया गया है। ईरान का दावा है कि ये टैंकर अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में अवैध गतिविधियों में लिप्त थे।
चालक दल के 15 सदस्य हिरासत में: न्यायिक जांच शुरू
टैंकरों की जब्ती के साथ ही उन पर सवार 15 चालक दल के सदस्यों को भी न्यायिक हिरासत में ले लिया गया है। ईरान ने अभी तक इन सदस्यों की नागरिकता या उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की है। गौरतलब है कि ईरान इससे पहले भी समुद्री तेल तस्करी को रोकने के नाम पर फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में विदेशी जहाजों को जब्त करता रहा है। पश्चिमी देशों ने अक्सर ईरान की इन कार्रवाइयों को ‘समुद्री डकैती’ या राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति करार दिया है, जबकि तेहरान इसे अपनी आर्थिक सुरक्षा का हिस्सा बताता है।
मस्कट में महाशक्तियों का जमावड़ा: परमाणु कार्यक्रम पर निर्णायक चर्चा
तमाम तनावों के बावजूद, आज सुबह लगभग 10 बजे (स्थानीय समयानुसार) मस्कट में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता शुरू होने वाली है। इस उच्च स्तरीय बैठक में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ आमने-सामने होंगे। इस बातचीत का मुख्य केंद्र बिंदु ईरान का विवादित परमाणु कार्यक्रम और 2015 की ‘जेसीपीओए’ (JCPOA) डील को फिर से सक्रिय करना या किसी नए सुरक्षा समझौते पर सहमति बनाना है।
ट्रंप प्रशासन का दबाव और कूटनीति का रास्ता: क्या निकलेगा समाधान?
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर ‘मैक्सिमम प्रेशर’ (अधिकतम दबाव) की नीति अपनाते हुए भारी सैन्य तैनाती कर रखी है। मध्य-पूर्व में अमेरिका के बढ़ते सैन्य प्रभुत्व के बीच दोनों देशों का वार्ता की मेज पर आना एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आज की वार्ता सफल रहती है, तो यह न केवल ईरान की डगमगाती अर्थव्यवस्था को राहत देगी बल्कि वैश्विक तेल बाजार और क्षेत्रीय शांति के लिए भी एक मील का पत्थर साबित होगी। हालांकि, तेल टैंकरों की ताजा जब्ती इस बातचीत के माहौल में कड़वाहट पैदा कर सकती है।
कूटनीतिक संतुलन की बड़ी चुनौती
आज की यह बैठक केवल दो देशों के बीच की बातचीत नहीं है, बल्कि यह भविष्य के वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को तय करने वाली है। जहाँ एक तरफ अमेरिका अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और इजरायल के हितों को सुरक्षित करना चाहता है, वहीं ईरान प्रतिबंधों से मुक्ति पाकर अपनी संप्रभुता को बरकरार रखने की कोशिश में है। अब देखना यह होगा कि मस्कट की मेज पर ‘युद्ध’ की धमकियां शांत होती हैं या तनाव का नया दौर शुरू होता है।










