Iran US Conflict: ईरान का अमेरिका पर बड़ा आरोप, फिर बातचीत शुरू करने की अपील

ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने वाशिंगटन पर अंतरिम समझौते की कोशिशें विफल करने का आरोप लगाया है। पाकिस्तान की मध्यस्थता से बातचीत की संभावना बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी पर विवाद के बीच सवाल है कि क्या दोनों देश फिर समझौते की मेज पर लौटेंगे?

Iran US Conflict

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 25, 2026

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Iran US Conflict : ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयासों को लेकर नया बयान सामने आया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने शनिवार को अमेरिका पर दोनों देशों के बीच अंतरिम समझौते की कोशिशों को विफल करने का आरोप लगाया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा संघर्ष को समाप्त करने और किसी समझौते तक पहुंचने के लिए बातचीत दोबारा शुरू करना जरूरी है। ईरानी सरकारी टेलीविजन पर दिए गए बयान में पेजेशकियान ने अमेरिकी पक्ष की आलोचना की और कहा कि बातचीत के दौरान हुई प्रगति को नुकसान पहुंचाया गया। उनके बयान से संकेत मिलता है कि तनाव के बावजूद तेहरान कूटनीतिक रास्ता खुला रखने के पक्ष में है।

ईरानी राष्ट्रपति ने बातचीत बहाल करने पर दिया जोर

पेजेशकियान ने अपने बयान में कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही थी, लेकिन अमेरिकी कार्रवाई ने प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने अमेरिका के रवैये पर नाराजगी जताई, लेकिन साथ ही वार्ता फिर से शुरू करने की आवश्यकता भी स्वीकार की। ईरानी नेतृत्व की यह अपील ऐसे समय आई है, जब संघर्ष समाप्त करने के लिए विभिन्न स्तरों पर राजनयिक प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच बातचीत कब और किन शर्तों पर दोबारा शुरू होगी, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। किसी संभावित समझौते की सफलता दोनों पक्षों की सहमति और शर्तों पर निर्भर करेगी।

पाकिस्तान की मध्यस्थता से बातचीत के लिए तैयार ईरान

इस बीच, पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोगदम ने शनिवार को कहा कि तेहरान पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए वाशिंगटन के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, प्रस्तावित अंतरिम समझौते के तहत दोनों देशों के बीच संवाद आगे बढ़ाया जा सकता है। पाकिस्तान की भूमिका इस मामले में महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि उसके माध्यम से ईरान ने अमेरिका तक अपना संदेश पहुंचाने की बात कही है। हालांकि, वार्ता की दिशा और संभावित समझौते की शर्तों को लेकर अभी अंतिम सहमति की पुष्टि नहीं हुई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान की शर्त

ईरानी राजदूत के अनुसार, तेहरान ने हाल ही में पाकिस्तान के माध्यम से वाशिंगटन को संदेश दिया था कि यदि अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटा लेता है, तो ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए तैयार है। मोगदम ने आरोप लगाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखने पर जोर दिया। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच मतभेद समझौते की राह में बड़ी चुनौती बन सकते हैं। हालांकि, इन दावों पर अमेरिकी पक्ष की प्रतिक्रिया की पुष्टि आवश्यक है।

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वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर संकट का असर

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर दबाव पड़ सकता है। इस क्षेत्र में लंबे समय तक तनाव बने रहने पर ऊर्जा बाजार, समुद्री परिवहन और कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसलिए ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की बहाली को केवल क्षेत्रीय सुरक्षा ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा स्थिरता के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

28 फरवरी से संघर्ष और कूटनीति की चुनौती

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए। इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत होने का दावा किया गया है। संघर्ष के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान की मध्यस्थता, होर्मुज जलडमरूमध्य और नौसैनिक नाकेबंदी जैसे विवादित मुद्दों पर सहमति बन पाएगी और दोनों देश किसी अंतरिम समझौते तक पहुंच सकेंगे।

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